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NSE: FO Tax बढ़ोतरी से छोटे निवेशक नहीं रुकेंगे..ceo ने कहा

NSE: F&O tax hike will not deter small investors, says CEO Ashish Chauhan

NSE: F&O tax hike will not deter small investors, says CEO Ashish Chauhan

FO Tax: भारत में फ्यूचर्स एंड ऑप्शन टैक्स बढ़ाने के बावजूद छोटे-छोटे निवेश करने वाले लोगों की भागीदारी पर बड़ा असर नहीं पड़ने वाला है। हाल ही में नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के प्रबंध निदेशक और ceo आशीष चौहान ने कहा कि सिर्फ टैक्स बढ़ना ही समाधान नहीं होता है। उनका मानना है कि डेरिवेटिव ट्रेडिंग में रिस्क को कम करने के लिए टैक्स आधारित एंट्री फिल्टर ज्यादा काम करेगा।

Tax बढ़ाने से व्यवहार नहीं बदलता है

हाल ही में बजट में सरकार द्वारा फाइनेंशियल फ्यूचर्स एंड ऑप्शन टैक्स यानी सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स में बढ़ोतरी की गई है जिसका उद्देश्य ज्यादातर सट्टेबाजी को नियंत्रित करना है। हालांकि चौहान के अनुसार टैक्स बढ़ने से छोटे-छोटे निवेशकों का व्यवहार नहीं बदल सकता है। कंपनी ने अपने ऑफिशियल बयान में बताया कि इस ट्रेडिंग होने से कई निवेश करने वाले लोगों के लिए उच्च रिस्क वाला क्षेत्र बन जाएगा, लेकिन इससे अक्सर तुरंत लाभ पाने के अवसर के रूप में भी देखा जा सकता है। ऐसे में टैक्स बढ़ने से केवल लागत ही बढ़ती है बल्कि भागीदारी नहीं घटती है।

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इसमें योग्यता आधार पर एंट्री का सुझाव

NSE प्रमुख ने ऐसा सुझाव दिया कि FO Tax प्लानिंग के साथ एक योग्य आधारित प्रवेश की प्रक्रिया लागू होनी चाहिए। जिसमें इनकम या टैक्स भुगतान के आधार पर निवेश करने वाले लोगों को डेरिवेटिव बाजार में प्रवेश की अनुमति दे दी जाए। मार्केट विशेषज्ञ के अनुसार इस तरह की प्रणाली का उद्देश्य फाइनेंशियल रूप से कम सक्षम होने वाले निवेश करने वाले लोगों को बड़े नुकसान से बचाना हो सकता है। स्टॉक एक्सचेंज डाटा के अनुसार बीते कुछ सालों में बड़ी संख्या में रिटेल निवेशकों को इस ट्रेडिंग से नुकसान उठाना पड़ा है।

अंतरराष्ट्रीय बाजारों से की गई तुलना

वैश्विक लेवल पर कई विकसित बाजारों के डेरिवेटिव ट्रेडिंग के लिए न्यूनतम पूंजी, रिस्क की समझ और निवेश करने वाले लोगों का अनुभव जैसे योग्यता को लागू किया गया है। चौहान ने संकेत दिया है कि भारत में भी फ्यूचर्स एंड ऑप्शन टैक्स के साथ ऐसे ही योग्यता को अपना कर बाजार की स्थिति को बेहतर की जा सकती है। मार्केट विशेषज्ञ का मानना है कि केवल टैक्स आधारित उपाय से बाजार का व्यवहार स्थाई रूप से नहीं बदल सकता है बल्कि इसकी बजाय निवेश करने वाले लोगों की फाइनेंसियल क्षमता और रिस्क सहने की क्षमता को ध्यान में रखना ज्यादा प्रभावित हो सकता है।

निवेशकों और बाजार पर क्या होगा संभावित असर

अगर योग्यता आधारित मॉडल लागू होता है तो इससे छोटे-छोटे निवेश करने वाले लोगों की सुरक्षा बढ़ सकती है। ज्यादातर रिस्क लेने से इसकी प्रवृत्ति भी कम हो सकती है। बाजार की स्थिरता भी इसे मजबूत देखी जा सकती है हालांकि यह केवल एक सुझाव की तरह हैऐसी किसी भी संभावित प्लानिंग परिवर्तन होने की पुष्टि नहीं की गई है।

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निवेश करने वाले लोगों के लिए आगे का दृष्टिकोण

FO Tax संरचना के साथ भविष्य में कई सारी ऐसी संस्था है जो सूटेबिलिटी मॉडल पर विचार कर सकती है इससे बाजार में संतुलित भागीदारी होने में मदद मिलेगी हालांकि हमारे द्वारा लिखी जाने वाली यह रिपोर्ट केवल सूचना के उद्देश्य से है ऐसे निवेश की सलाह ना ले।

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