Norway Media vs India Media : दुनिया में प्रेस की स्वतंत्रता को लोकतंत्र की सबसे अहम पहचान माना जाता है। हर साल वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम इंडेक्स जारी किया जाता है, जिसमें यह दिखाया जाता है कि किसी देश में पत्रकार कितनी आजादी से काम कर सकते हैं। इस सूची में नॉर्वे हमेशा पहले स्थान पर रहता है, जबकि भारत की रैंकिंग को लेकर अक्सर बहस होती रहती है। भारतीय मीडिया की रैंकिंग गिरने से देश में चिंता का सवाल उठ रहा है कि क्या मीडिया की आजादी पर खतरा है? प्रेस फ्रीडम इंडेक्स में दुनिया में भारतीय मीडिया की रैंकिंग 157वें नंबर पर रही, जिससे माना जा रहा है कि भारत में लोकतंत्र की आत्मा पर प्रहार हो रहा है।
नॉर्वे में भारतीय पत्रकारिता पर पूछा गया सवाल
हाल ही में नॉर्वे की एक पत्रकार ‘हेले लिंग’ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सवाल पूछा। उन्होंने भारत में मीडिया की स्वतंत्रता और प्रेस पर बढ़ते दबाव को लेकर बात की। पत्रकार ने पूछा कि भारत की रैंक क्यों गिर रही है और क्या सरकार आलोचनात्मक मीडिया के लिए अच्छा माहौल बना पा रही है। उन्होंने यह भी पूछा कि क्या भारत में मीडिया अपने सवाल सरकार से खुलकर पूछ पा रहा है।
प्रेस फ्रीडम इंडेक्स कैसे तय होता है?
इसके बाद मीडिया में चर्चा शुरू हो गई कि आखिर यह इंडेक्स कैसे तय होता है। विश्व प्रेस फ्रीडम इंडेक्स ‘रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स’ हर साल यह रिपोर्ट जारी करता है। इसमें बताया जाता है कि किसी देश में पत्रकार कितनी स्वतंत्रता और सुरक्षा के साथ काम कर सकते हैं। इसमें सरकार का दबाव, पत्रकारों की सुरक्षा, सेंसरशिप, कानूनी कार्रवाई, मीडिया का स्वामित्व और स्वतंत्र रिपोर्टिंग जैसे कई मानकों को देखा जाता है। नॉर्वे कई सालों से इस लिस्ट में नंबर-1 पर बना हुआ है। वहाँ पर मीडिया को मजबूत कानूनी सुरक्षा मिलती है। सरकार की आलोचना करने पर पत्रकारों को डर नहीं लगता। वहाँ पारदर्शिता और सूचना का आसान पहुंच मीडिया की ताकत बनती है।
नॉर्वे में हेले लिंग ने पीएम मोदी से पूछा था ये सवाल
हेले लिंग ने नरेंद्र मोदी से पूछा कि भारत में मीडिया स्वतंत्रता क्यों कम हो रही है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत का मीडिया कई बार सत्ता के प्रति बहुत नरम हो जाता है। इसी संदर्भ में उन्होंने कहा कि भारत की मीडिया की स्थिति को क्यूबा और फिलिस्तीन जैसे इलाकों से तुलना की जा सकती है, जहाँ प्रेस पर दबाव बहुत अधिक होता है। उनका कहना था कि यदि मीडिया केवल सरकार का प्रचार करे और सवाल न पूछे, तो लोकतंत्र कमजोर हो सकता है।
नॉर्वे के एक वरिष्ठ डिप्लोमैट सीबी जॉर्ज ने बताया कि यह सवाल प्रधानमंत्री मोदी की नॉर्वे यात्रा के दौरान आया था। उन्होंने कहा कि नॉर्वे के अखबार ‘डैगसाविसेन’ की कमेंटेटर हेले लिंग ने सवाल पूछा था कि भारत की मीडिया क्यों सरकार से कठिन सवाल नहीं पूछ रही है। उनके इस सवाल का कोई जवाब नहीं मिला, इसलिए उन्होंने सोशल मीडिया पर यह बात जाहिर की।
वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम इंडेक्स में भारत की 157वीं रैंक
वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम इंडेक्स 2026 में भारत की रैंकिंग 157वीं हो गई है। यह स्थिति अपने पड़ोसी देशों पाकिस्तान (153वें), बांग्लादेश (152वें), और फिलिस्तीन (156वें) से खराब है। सबसे खराब स्थिति क्यूबा (170वें) और चीन (178वें) जैसे देशों की है।

