Nolo Storm in Pacific Ocean : प्रशांत महासागर में बना चक्रवाती तूफान ‘नोलो’ फिर से मजबूत हो रहा है। कुछ समय तक कमजोर रहने के बाद इसकी ताकत बढ़ने लगी है। मौसम वैज्ञानिक इसकी दिशा और रफ्तार पर नजर रखे हुए हैं। अगले 36 से 48 घंटे तूफान के लिए अहम हो सकते हैं।
कितनी तेज हो सकती हैं हवाएं?
ताजा अनुमान के मुताबिक, नोलो की लगातार चलने वाली हवाओं की रफ्तार करीब 175 किलोमीटर प्रति घंटा है। आने वाले समय में यह बढ़कर 220 से 225 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है।कुछ सोशल मीडिया पोस्ट और खबरों में इसकी रफ्तार 241 किलोमीटर प्रति घंटे बताई जा रही है। हालांकि, उपलब्ध आधिकारिक अनुमान के अनुसार फिलहाल 220 से 225 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार का अनुमान ज्यादा भरोसेमंद है।
नोलो फिर से मजबूत क्यों हो रहा है?
तूफान की ताकत समुद्र के तापमान और आसपास के मौसम पर निर्भर करती है। कुछ समय पहले ऊपरी वातावरण में तेज हवाओं के कारण नोलो का ढांचा कमजोर हुआ था। मौसम विज्ञान में इन हवाओं के असर को ‘वर्टिकल विंड शीयर’ कहा जाता है। अब यह असर कम हुआ है। इससे तूफान के आसपास बादल और तेज हवाएं फिर से व्यवस्थित हो रहे हैं और नोलो को ताकत मिल रही है।
अगले 48 घंटे क्यों हैं अहम?
मौसम के अनुमान के मुताबिक, अगले 36 से 48 घंटों में नोलो और शक्तिशाली हो सकता है। इसके पश्चिम की ओर बढ़ने के साथ हवाओं की रफ्तार 200 किलोमीटर प्रति घंटे से ज्यादा होने की आशंका है। हालांकि, तूफान की असली ताकत समुद्र के तापमान और मौसम में होने वाले बदलावों पर निर्भर करेगी। आगे चलकर शुष्क हवाएं और विंड शीयर बढ़ने पर यह कमजोर भी पड़ सकता है।
डेट लाइन पार करने पर क्या बदलेगा?
नोलो के पश्चिम की ओर बढ़ते हुए इंटरनेशनल डेट लाइन पार करने की संभावना है। यह प्रशांत महासागर में करीब 180 डिग्री देशांतर पर स्थित एक काल्पनिक रेखा है। इसे पार करने पर कैलेंडर की तारीख बदल जाती है। इस रेखा के दोनों ओर तूफानों के नाम अलग-अलग हो सकते हैं। पूर्वी और मध्य प्रशांत में ऐसे तूफानों को ‘हैरिकेन’ कहा जाता है, जबकि पश्चिमी प्रशांत में इन्हें ‘टाइफून’ कहते हैं। इसलिए डेट लाइन पार करने के बाद नोलो को टाइफून कहा जा सकता है। इसका मतलब यह नहीं होगा कि कोई नया तूफान बना है।
क्या नोलो सुपर टाइफून बनेगा?
अगर नोलो की हवाएं अनुमान के मुताबिक 220 किलोमीटर प्रति घंटे या उससे अधिक की रफ्तार पकड़ती हैं, तो यह बहुत शक्तिशाली तूफान बन सकता है। पश्चिमी प्रशांत में बेहद तेज तूफानों को ‘सुपर टाइफून’ कहा जाता है। फिलहाल नोलो को सुपर टाइफून कहना जल्दबाजी होगी। इसके लिए मौसम एजेंसियों के आधिकारिक आंकड़ों का इंतजार करना होगा।
समुद्र में बढ़ सकता है खतरा
तेज हवाओं से समुद्र में ऊंची और खतरनाक लहरें उठ सकती हैं। इससे छोटी नावों, जहाजों और मछली पकड़ने वाले लोगों को खतरा हो सकता है। समुद्र में मौजूद लोगों को मौसम विभाग की चेतावनियों पर ध्यान देने की सलाह दी जा रही है।
तटीय इलाकों पर कितना खतरा?
नुकसान इस बात पर निर्भर करेगा कि तूफान किस दिशा में जाता है और क्या वह किसी आबादी वाले तट से टकराता है। अगर नोलो समुद्र के ऊपर से गुजरता है, तो जमीन पर असर सीमित रह सकता है। लेकिन तट पर पहुंचने पर तेज हवाओं, भारी बारिश और अचानक बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है।
भारी बारिश से निचले इलाकों में पानी भर सकता है और पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन हो सकता है। तेज हवाओं से पेड़ गिरने, कमजोर घरों की छतों को नुकसान पहुंचने और बिजली व संचार सेवाएं ठप होने की आशंका भी रहती है।
जापान और फिलीपींस पर नजर
नोलो पश्चिम दिशा में बढ़ रहा है, इसलिए एशिया के तटीय इलाकों पर नजर रखी जा रही है। अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि तूफान जापान या फिलीपींस से टकराएगा। तूफान का रास्ता बदल सकता है, इसलिए वैज्ञानिक इसकी गतिविधियों पर लगातार नजर रख रहे हैं। फिलहाल लोगों को आधिकारिक मौसम सूचनाओं और चेतावनियों का पालन करना चाहिए।

