Nifty Sensex fall due to US tariff threat and FPI outflows

Stock market chart showing decline amid US tariff concerns and foreign investor outflows

Nifty Sensex fall due to US tariff threat and FPI outflows के बीच गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार में दबाव दिखा। अमेरिका की ओर से नए टैरिफ संकेत, विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने निवेशकों की धारणा को कमजोर किया।

बाजार की शुरुआत कैसी रही

गुरुवार को Nifty 50 और Sensex दोनों लाल निशान में खुले। शुरुआती कारोबार में आई गिरावट से साफ संकेत मिला कि वैश्विक घटनाक्रम घरेलू बाजार पर असर डाल रहा है। एशियाई बाजारों में भी कमजोरी का रुख दिखा, जिससे स्थानीय निवेशक सतर्क नजर आए।

Nifty Sensex fall due to US tariff threat and FPI outflows: वैश्विक कारण

अमेरिका में रूस से जुड़े व्यापार पर सख़्त रुख और संभावित 500 प्रतिशत तक टैरिफ की चर्चा ने उभरते बाजारों में चिंता बढ़ा दी है। इस कदम का अप्रत्यक्ष असर भारत जैसे देशों पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। इसके अलावा, हालिया भू-राजनीतिक घटनाओं ने जोखिम वाली परिसंपत्तियों से दूरी बढ़ाई है।

विदेशी निवेशकों की बिकवाली का असर

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) लगातार भारतीय बाजार से पूंजी निकाल रहे हैं। जब वैश्विक अनिश्चितता बढ़ती है, तो FPI आमतौर पर जोखिम कम करने के लिए बिकवाली करते हैं। इसी प्रवृत्ति ने हाल के सत्रों में बाजार पर अतिरिक्त दबाव डाला है और रिकवरी की गति को सीमित किया है।

Nifty Sensex fall amid US tariff threat

अमेरिकी राजनीति और बाजार धारणा

अमेरिकी सीनेटर Lindsey Graham के बयानों और रूस से जुड़े प्रतिबंध विधेयक को लेकर चर्चाओं ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई है। वहीं, Donald Trump से जुड़े हालिया राजनीतिक संकेतों ने भी वैश्विक बाजारों में अस्थिरता को बढ़ावा दिया है। इन घटनाओं का असर भारतीय बाजारों पर भी दिखाई दिया।

सेक्टरों का प्रदर्शन

NSE पर लगभग सभी प्रमुख सेक्टर दबाव में रहे। धातु और फार्मा शेयरों में सबसे अधिक बिकवाली दिखी। ऑटो और PSU बैंक शेयरों में भी कमजोरी रही, जबकि आईटी सेक्टर अपेक्षाकृत सीमित गिरावट के साथ कारोबार करता दिखा। ब्रॉडर मार्केट में स्मॉलकैप इंडेक्स ने कुछ हद तक संतुलन दिखाया।

बाजार विशेषज्ञों की राय

बाजार जानकारों का कहना है कि प्रमुख सूचकांक फिलहाल अहम सपोर्ट स्तरों के आसपास हैं, लेकिन ऊपर की ओर मजबूत रेजिस्टेंस बना हुआ है। जब तक वैश्विक संकेत स्पष्ट नहीं होते और FPI प्रवाह स्थिर नहीं होता, तब तक बाजार रेंज-बाउंड रह सकता है।

कमोडिटी और अन्य संकेत

इसी दौरान सोना और चांदी की कीमतों में भी नरमी देखी गई। कमोडिटी इंडेक्स में री-बैलेंसिंग और संभावित बिकवाली के अनुमान से कीमती धातुओं पर दबाव बना। यह संकेत देता है कि निवेशक फिलहाल नकदी और सुरक्षित विकल्पों को प्राथमिकता दे रहे हैं।

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