भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को Nifty 50 और सेंसेक्स की शुरुआत लगभग सपाट ही दिख रही है। GIFT Nifty के संकेतों के आधार पर बाजार में सीमित दायरे में कारोबार की उम्मीद जताई जा रही है। पिछले सत्र में लगभग 0.2% की बढ़त होने के बाद विश्लेषकों का मानना है कि फिलहाल बाजार में आगे भी consolidation इसी तरह जारी रह सकता है।
बाजार का प्रदर्शन, सीमित दायरे में कारोबार
स्टॉक एक्सचेंज डेटा के अनुसार, पिछले कारोबारी सत्र में Nifty 50 से लगभग 0.2% तक चढ़कर बंद हुआ है, जबकि बीएसई सेंसेक्स में भी हल्की मजबूती देखी गई है। शुरुआती संकेतों के अनुसार बुधवार को भी Nifty 50 लगभग पिछले बंद लेवल के आसपास ही खुल सकता है। इंट्राडे कारोबार में निवेशकों ने चुनिंदा सेक्टरों में खरीदारी दिखाई है, जबकि बड़े बाजार में उत्साह सीमित रहा है। बाजार पूंजीकरण में बड़ा उतार-चढ़ाव तो नहीं देखा गया है, जिससे हमें स्थिर रुझान की ओर संकेत मिलता है।
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Consolidation के पीछे प्रमुख कारण
बाजार की एक्सपर्ट के अनुसार मौजूदा लेवल पर बाजार में नए ट्रिगर की कमी है। हाल ही में तेजी होने के बाद निवेश करने वाले लोग मुनाफा वसूली और पोर्टफोलियो संतुलन की प्लानिंग अपना रहे हैं। वैश्विक संकेत अभी मिश्रित देख रहे हैं जिससे घरेलू बाजार में स्पष्ट दिशा का अभाव बना हुआ ही है। विदेशी पोर्टफोलियो की निवेश करने वाले लोग की गतिविधि भी अब स्थिर दिख रही है लेकिन बड़े पैमाने पर निवेश का प्रवाह फिलहाल नहीं दिख पा रहा है। आईटी सेक्टर में हाल ही में हुए सौदे और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी साझेदारी के कारण कुछ पॉजिटिविटी जरूर देखी गई है लेकिन बड़े बाजार में इसका प्रभाव सीमित रहा।
विशेषज्ञों की राय
मार्केट एक्सपर्ट्स के अनुसार Nifty 50 फिलहाल एक निश्चित दायरे में ट्रेंड कर सकता है। तकनीकी विश्लेषक के अनुसार प्रमुख समर्थन प्रतिरोध के लेवल के बीच सम्मेकॉन की स्थिति अभी बनी रह सकती है जब तक कोई मजबूत घरेलू या फिर वैश्विक संकेत नहीं मिलते हैं। ब्रोकरेज रिपोर्ट में भी निकट की अवधि में बड़े ब्रेकआउट की संभावनाएं कम बताई गई है हालांकि लंबी अवधि के निवेश दृष्टिकोण को लेकर सतर्कता कायम है।
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निवेशकों पर असर और आगे का आउटलुक
Consolidation के इस चरण में कुछ ही समय के ट्रेडर्स को सीमित उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ रहा है। जबकि लंबे समय की निवेश करने वाले लोग बड़े आर्थिक संकेत पर अपना नजर बनाए हुए हैं। विश्लेषकों के अनुसार आने वाले आर्थिक आंकड़े और वैश्विक बाजार की दिशा ही आगे की चाल निर्धारित करेंगे हालांकि यह आर्टिकल एक सूचना के उद्देश्य है इसे निवेश की सलाह के रूप में नहीं ले।

