भोपाल/रीवा । राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के बैनर तले प्रदेश के करीब 32 हजार संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों का चरणबद्ध आंदोलन अब आर-पार की जंग में बदल चुका है। पूर्व घोषित कार्यक्रम के तहत 2 जून से शुरू हुई संविदा कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल आज तीसरे दिन भी जारी है। जिलों में तैनात समस्त कर्मचारियों द्वारा सरकारी विभागों के सभी ऑनलाइन और ऑफलाइन कार्यों का पूर्णतः बहिष्कार किए जाने से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों की स्वास्थ्य सेवाएं चरमराने लगी हैं।
काली पट्टी बांधने और कलेक्टर्स व जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन सौंपने के शुरुआती चरणों के बाद भी शासन द्वारा कोई ठोस कदम न उठाए जाने से नाराज कर्मचारी अब सामूहिक अवकाश और धरने पर बैठ गए हैं। संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी संघ म.प्र. का कहना है कि अब यह लड़ाई मांगें पूरी होने तक थमेगी नहीं।
आज की स्थिति: स्वास्थ्य केंद्रों में पसरा सन्नाटा, ‘सार्थक ऐप’ का पूर्ण बहिष्कार
आज आंदोलन के इस महत्वपूर्ण पड़ाव पर जिलों के समस्त प्राथमिक व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में कामकाज प्रभावित दिख रहा है। संविदा डॉक्टरों, नर्सों, पैरामेडिकल स्टाफ और विशेषकर सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (CHO) की अनुपस्थिति के कारण ओपीडी से लेकर फील्ड मॉनिटरिंग तक का काम ठप है। शासन की मंशा के विपरीत ‘सार्थक ऐप’ पर अटेंडेंस और रिपोर्टिंग का पूरी तरह से बहिष्कार किया जा रहा है।
क्यों भड़का है 32 हजार कर्मचारियों का आक्रोश?
कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि वे निष्ठापूर्वक सेवाएं देकर प्रदेश को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित करा चुके हैं, लेकिन सरकार उनके हितों की लगातार अनदेखी कर रही है। ठीक एक वर्ष पूर्व माननीय मुख्यमंत्री जी की उपस्थिति में मांगों पर सहमति बनी थी, लेकिन आज तक कोई ठोस आदेश जारी नहीं हुआ।
कर्मचारियों की प्रमुख मांगें:
- 30 जनवरी 2026 को दशहरा मैदान में मुख्यमंत्री द्वारा की गई घोषणा के अनुसार नियमितीकरण का लाभ दिया जाए।
- सामान्य प्रशासन विभाग की 2023 की नीति के तहत NPS और स्वास्थ्य बीमा का लाभ मिले।
- अन्य राज्यों की तर्ज पर 10% वार्षिक वेतनवृद्धि और नियमित कर्मचारियों की भांति महंगाई भत्ता लागू हो।
- सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (CHO) के वेतन में PBI का समायोजन हो और वेतन विसंगति (समकक्षता) में संशोधन किया जाए।
- नियमित कर्मियों की तरह अवकाश की पात्रता हो।
अगला कदम: 8 जून को ‘भोपाल कूच’ और मुख्यमंत्री निवास का घेराव
जिलाध्यक्ष और जिला सचिवों द्वारा जारी संयुक्त बयान में चेतावनी दी गई है कि यदि अगले तीन दिनों के भीतर शासन-प्रशासन ने संवाद स्थापित कर मांगों का समयसीमा में निराकरण नहीं किया, तो आगामी 8 जून 2026 को प्रदेश भर के समस्त कर्मचारी भोपाल पहुंचेंगे और मुख्यमंत्री निवास का महाघेराव करेंगे।
शासन-प्रशासन की होगी जिम्मेदारी: संघ ने दो टूक शब्दों में स्पष्ट कर दिया है कि कर्मचारियों के इस उग्र कदम और अनिश्चितकालीन हड़ताल से आम जनता को मिलने वाली स्वास्थ्य सुविधाओं में जो भी असुविधा हो रही है, उसकी समस्त जिम्मेदारी सिर्फ और सिर्फ शासन-प्रशासन की है, जिसने एक वर्ष तक इस संवेदनशील मामले को ठंडे बस्ते में डाले रखा।

