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घर में रखे मृतक के शव के सामने कभी मत सोना वरना……

The dead body should not be left alone,The dead body should not be left alone,

The dead body should not be left alone,

हिन्दू धर्म में जब किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है. तो शव का अंतिम संस्कार संध्या होने से पहले ही कर दिया जाता है, ये तो सभी को पता होता है. लेकिन अगर किसी कारणवश मृतक का अंतिम संस्कार संध्या तक नहीं हो पता तो उसे घर में ही उत्तर की ही ओर मुख करके लेटाया जाता है. और रात भर पूरा अपरिवार उस शव के आस पास बैठा हुआ होता है. लेकिन आपने कभी ये सोचा है की शव के घर में रखे रहने पर परिवार का कोई सदस्य सोता क्यों नहीं है. इसके पीछे एक कारण है जिसका उल्लेख गरुड़ पुराण में भी है.

शव के सामने लोगों का जागना क्यों है जरुरी?

पुराणी मान्यताओं की माने तो संध्या से पहले जब मृतक का अंतिम संस्कार नहीं होता है, तब उसके शव को घर में ही सफ़ेद चादर से उसके शरीर को ढक कर रखा जाता है, क्यूंकि ऐसा गरुण पुराण में लिखा हुआ है की अंतिम संस्कार के पहले मृतक की आत्मा उसी घर में रहती है और यह देखती है की उसका परिवार शोक में है. अगर शव के पास कोई भी व्यक्ति नहीं बैठता तो मृतक की आत्मा को ठेस पहुँचती है. लेकिन ऐसा भी कहा गया है की जब तक शव घर में रख हुआ होता है, तब तक शव के बैठे लोगों को सोना भी नहीं चाहिए और यदि बैठे हुए सारे लोग सो जाते हैं तो शव खड़ा हो जाता है, और मृतक को लगता है मेरे मृत्यु के शोक में मेरा परिवार भी अब जीवत नहीं रहना चाहता है और मृतक आत्मा परिवार के सभी सदस्यों को मारने की कोशिश करती है. यही कारण है की जब तक मृतक का शव घर में रखा हुआ होता है तब तक परिवार के किसी न किसी सदस्य का रात भर जागना जरुरी होती है.

जब मृत शरीर ने बना डाली परिवार के लिए चिता

एक समय की बात है आज से तक़रीबन 60 से 70 साल पहले एक गांव था जहाँ एक परिवार के सदस्य की मृत्यु हो गयी थी. गांव में जब भी किसी व्यक्ति की मृत्यु होती थी और यदि संध्या तक मृतक का अंतिम संस्कार नहीं होता था, तो गांव में ढोल वाले को बुलाया जाता था. ताकि यदि रात में शव के पास बैठे लोग सो जाये तो ढोल की आवाज़ से उन्हें उठाया जा सके. ऐसा ही कुछ इस परिवार में भी हुआ. रात में शव के पास ४ लोग बैठे हुए थे काफी रात हो गयी और धीरे धीरे उन चार लोगों को नींद आने लगी और गलती से उन चार लोगों के साथ साथ न जाने कैसे वो ढोल बजाने वाला व्यक्ति भी सो गया. पर कुछ समय बाद उसकी किसी आवाज़ से आंख खुली और उसने देखा की शव अपनी जगह पर नहीं है. उसने इधर उधर देखा और दरवाजे के पास उसे वो शव दिखा जो खड़ा हुआ था और परिवार के उस एक सदस्य को घसीटते हुए घर की चौखट लांगने वाला था. ढोल वाले को पता था यदि ये ये शरीर को चौखट के बाहर ले गया तो उस व्यक्ति की मृत्यु हो जाएगी, तभी उस ढोल वाले ने ढोल बजा दिया जिसकी आवाज़ से बाकि सोये हुए भी उठ गए. और जो शव परिवार के सदस्य को घसीट कर चौखट तक ले गया था वो शव वहीँ गिर गया और वो व्यक्ति जाग गया. जब सुबह शव को अंतिम संस्कार के लिए घाट ले गया तो वहां जो मंज़र था उसने सबके होश उड़ा उस जगह पर मृतक की चिता के साथ साथ ४ और चिताएं बनी हुई थी. पंडित ने बताया की तुम सब कल रात को सो गए थे इस लिए जो 4 सदस्य सो गए थे ये चिता उन्ही के लिए मृतक की आत्मा के रात में ही द्वारा बनाई गयी थी. यदि वो आत्मा परिवार के एक भी सदस्य को चौखट के पार ले आती तो तुम चारों की चिता आज यहां जल रही होती।

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