नेपाल में कभी युवाओं की पहली पसंद रहे काठमांडू के मेयर बालेन शाह अब लोगों के विरोध का सामना कर रहे हैं। रविवार (12 जुलाई) को बड़ी संख्या में युवा, खासकर जेन-जी, सरकार और प्रशासन के खिलाफ सड़कों पर उतर आए। प्रदर्शनकारी काठमांडू के सिंघदरबार सचिवालय पहुंचे और जमकर नारेबाजी की। उनके हाथों में ऐसे पोस्टर थे, जिन पर ‘तानाशाही नहीं चलेगी’, ‘गरीबों पर अत्याचार बंद करो’ और ‘मानवाधिकारों की रक्षा करो’ जैसे नारे लिखे थे।
इस विरोध की सबसे बड़ी वजह 25 साल के राइड-शेयरिंग ड्राइवर गणेश नेपाली की मौत बताई जा रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुलिस ने उनकी मोटरसाइकिल जब्त कर ली थी। इससे परेशान होकर उन्होंने कथित तौर पर आत्महत्या कर ली। इस घटना के बाद लोगों का गुस्सा और बढ़ गया और विरोध प्रदर्शन तेज हो गया।
हालांकि, सिर्फ यही एक वजह नहीं है। पिछले कुछ समय से काठमांडू में चल रहे अतिक्रमण हटाओ अभियान को लेकर भी लोगों में नाराजगी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस कार्रवाई से कई परिवार बेघर हो गए। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि प्रभावित लोगों के रहने का इंतजाम किया जाए और गैर-कानूनी तरीके से होने वाली गिरफ्तारियों पर रोक लगे।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बालेन शाह के कार्यकाल में काठमांडू महानगर पुलिस के रवैये पर भी सवाल उठ रहे हैं। कई लोगों का आरोप है कि पुलिस जरूरत से ज्यादा सख्ती कर रही है और मनमाने तरीके से कार्रवाई कर रही है। इससे पहले 2022 में जब बालेन शाह मेयर चुने गए थे, तब भी प्रशासन के कामकाज को लेकर ऐसे आरोप सामने आए थे।
बालेन शाह ने मेयर बनने के बाद शहर को व्यवस्थित करने के लिए कई सख्त फैसले लिए। फुटपाथों से अतिक्रमण हटाने, सड़क किनारे लगने वाले बाजारों पर कार्रवाई करने और नदी किनारे बनी झुग्गियों को हटाने जैसे कदमों की कुछ लोगों ने सराहना की, लेकिन बड़ी संख्या में लोगों ने इसका विरोध भी किया। अब गणेश नेपाली की मौत और हालिया प्रशासनिक कार्रवाइयों के बाद उनके खिलाफ लोगों का गुस्सा खुलकर सामने आ रहा है।

