भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा हाल ही में लागू किया गया NDD Ban यानी Non-Deliverable Derivatives Ban विदेशी मुद्रा बाजार में बढ़ती अस्थिरता को नियंत्रित करने की दिशा में जरूरी कदम बताया जा रहाहै। क्या फैसला ऐसे समय में लिया गया जब रुपए पर बाहरी दबाव और सट्टेबाजी बढ़ रही थी जिससे विनयमय दर प्रभावित हो रहा था।
NDD Ban का अर्थ और बाजार पर इसका प्रभाव
अनडीडी बैन का मतलब है उन डेरिवेटिव कॉन्टेक्ट्स पर रोक लगाना जो ऑफशोर मार्केट में बिना किसी वास्तविक मुद्रा डिलीवरी के ट्रेड होते हैं। स्टॉक एक्सचेंज डाटा के अनुसार इन कांटेक्ट में बड़े पैमाने पर विदेशी निवेश करने वाले लोग हिस्सा लेते थे जिससे हमारे रुपए की कीमत पर अप्रत्यक्ष रूप से दबाव बनता देखा जाता है। बाजार विश्लेषकों के अनुसार इस प्रतिबंध से रुपए की कीमत तय करने की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और घरेलू कारक पर आधारित होगी।
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सट्टेबाजी पर लगाम इसका मुख्य कारण
आरबीआई के इस फैसले के पीछे सबसे बड़ा कारण विदेशी बाजारों में बढ़ती सट्टेबाजी को नियंत्रित करना बताया जा रहा है। Ndd market में ट्रेडर्स बिना किसी वास्तविक रिस्क के बड़े दाव लगाते हैं जिसे अचानक ही उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है। कंपनी ने अपने ऑफिशियल बयान में बताया कि यह कदम फाइनेंशियल स्थिरता को बनाए रखने और मुद्रा बाजार को अधिक नियंत्रित करने की उद्देश्य से लिया जाता है।
क्या है विशेषज्ञों की राय और बाजार संकेत
मार्केट विशेषज्ञों का मानना है कि NDD Ban से कम समय की अस्थिरता काम हो सकती है लेकिन लंबे समय से इसका प्रभाव वैश्विक कर्म पर निर्भर करेगा। ब्रोकरेज रिपोर्ट के अनुसार या कम विदेशी निवेश करने वाले लोगों के व्यवहार को प्रभावित कर सकता है खास तौर पर फंड और शॉर्ट टर्म के ट्रेंड पर। हालांकि कुछ बाजार की विश्लेषकों का मानना है कि इससे बाजार की लिक्विडिटी पर हल्का असर पड़ता देखा जा सकता है।
इससे निवेशकों और अर्थव्यवस्था पर असर
ऐसे फैसलों से सीधा असर विदेशी मुद्रा बाजार और अप्रत्यक्ष असर इक्विटी मार्केट पर देखा जा सकता है। रुपए में स्थिरता आने से आयात निर्यात करने वाली कंपनियों को लाभ मिल सकता है मार्केट विश्लेषज्ञों के अनुसार निवेश करने वाले लोगों को इस तरह के नीतिगत बदलाव को लंबे समय तक देखना चाहिए। लेकिन यह ध्यान रखना चाहिए कि यह लेख किसी निवेश की सलाह नहीं है यह केवल जानकारी के उद्देश्य से हैं।
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क्या है आगे का आउटलुक
आने वाले समय में आगे चलकर आरबीआई स्मृति के प्रभाव का आकलन करेगा और जरूरत पड़ने पर एक्स्ट्रा कदम भी उठा सकता है। अगर हनुमान के तौर पर बताया जाए तो अगर वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों स्थिर रहती है तो रुपए में मजबूती देखने को मिल सकती है।

