National Safe Motherhood Day-2026 : जच्चा और बच्चा के स्वस्थ जीवन व सुरक्षित भविष्य के संकल्प का दिन-हर साल 11 अप्रैल को भारत में राष्ट्रीय सुरक्षित मातृत्व दिवस (National Safe Motherhood Day) मनाया जाता है। यह दिन राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की धर्मपत्नी कस्तूरबा गांधी की जयंती के अवसर पर चुना गया, जो स्वास्थ्य और समाजसेवा के प्रति समर्पित थीं। भारत विश्व का पहला देश है जिसने 2003 में इस दिन को राष्ट्रीय स्तर पर घोषित किया। इस दिवस का मुख्य लक्ष्य गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित प्रसव, गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं , और उचित पोषण सुनिश्चित करना है ताकि मातृ मृत्यु दर (Maternal Mortality Rate – MMR) को कम किया जा सके। भारत में आज भी गर्भावस्था और प्रसव के दौरान अपर्याप्त देखभाल के कारण हजारों माताएं अपनी जान गंवा देती हैं। यह दिन उस कमी को पूरा करने का एक सार्थक प्रयास है।जानें राष्ट्रीय सुरक्षित मातृत्व दिवस (11 अप्रैल) का महत्व, इतिहास, और ज़मीनी स्तर पर मातृ मृत्यु दर कम करने के ठोस उपाय। पढ़ें आशा वर्कर, एएनसी जांच, एम्बुलेंस सेवा और पोषण से जुड़ी पूरी जानकारी।
आइए सबसे पहले जानते हैं राष्ट्रीय सुरक्षित मातृत्व दिवस का महत्व एवं उद्देश्य
Importance and Objectives of National Safe Motherhood Day
- प्रमुख उद्देश्य Objectives – गर्भावस्था, प्रसव और प्रसवोत्तर अवधि (Postnatal period) में हर महिला को सुरक्षित, सस्ती और सुलभ स्वास्थ्य सुविधा प्रदान करना।
- विशेष व महत्वपूर्ण महत्व-Importance – यह दिन महिलाओं को नियमित प्रसव पूर्व जांच (ANC), टीकाकरण (TT), पोषण, और संस्थागत प्रसव के लिए प्रेरित करता है। साथ ही, यह समाज में यह संदेश फैलाता है कि “हर गर्भावस्था सुरक्षित होनी चाहिए”
ज़मीन स्तर पर सार्थकता हेतु उपाय विशेष-ग्रामीण और शहरी मोहल्लों के लिए
Ground-Level Measures for Effectiveness
सबसे पहले आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का सशक्तिकरण
Empowering ASHA and Anganwadi Workers

इस अभियान को सार्थक बनाने के लिए ग्रामीण स्तर पर आशा (ASHA) और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता सबसे अहम कड़ी हैं। इन्हें प्रशिक्षित कर, घर-घर जाकर गर्भवती महिलाओं को जननी सुरक्षा योजना (Janani Suraksha Yojana) और प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (PMSMA) की जानकारी देनी चाहिए। साथ ही, ये कार्यकर्ता महिलाओं को संस्थागत प्रसव (अस्पताल में जन्म) के लिए प्रेरित करें।
नियमित प्रसव पूर्व (ANC) जांच को अनिवार्य बनाना
Making Regular Antenatal Care (ANC) Checkups Mandatory
हर गर्भवती महिला की कम से कम 4 बार ANC जांच सुनिश्चित की जानी चाहिए। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC), प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) और उप-केंद्रों पर हीमोग्लोबिन जांच, ब्लड प्रेशर माप, और अल्ट्रासाउंड जैसी सुविधाएँ मुफ्त या सस्ती दरों पर उपलब्ध कराई जाएं ।
कुपोषण मुक्त गर्भावस्था-आयरन और पोषण सुनिश्चित करना
Malnutrition-Free Pregnancy-Ensuring Iron and Nutrition
ग्रामीण क्षेत्रों में गर्भवती महिलाओं को आयरन और फोलिक एसिड (IFA) की गोलियां नियमित रूप से वितरित की जाएं। आंगनवाड़ी केंद्रों पर पौष्टिक आहार (Take Home Ration) उपलब्ध कराया जाए। साथ ही, एनीमिया (खून की कमी) से पीड़ित महिलाओं की विशेष देखभाल की जाए।
एम्बुलेंस सेवा (102-108) की सुलभता और समयबद्धता
Accessibility and Timeliness of Ambulance Services (102-108)
हर गांव और मोहल्ले में मुफ्त एम्बुलेंस सेवा (डायल 102 या 108) की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए जो अभी भी समग्र रूप से अपर्याप्त है । इसके अलावा गर्भवती महिला को प्रसव पीड़ा शुरू होते ही या पहले से तय तिथि पर अस्पताल पहुँचाने के लिए एक ट्रैकिंग सिस्टम विकसित किया जाए।
जागरूकता अभियान-नुक्कड़ नाटक, महिला सभाएं और ग्राम सभाएं
Awareness Campaigns-Street Plays, Women’s Gatherings & Gram Sabhas
स्वयं सहायता समूहों (SHGs) की बैठकों, नुक्कड़ नाटकों, और ग्राम सभाओं के माध्यम से सुरक्षित मातृत्व के महत्व को सरल भाषा में समझाया जाए। स्थानीय युवाओं और विद्यार्थियों को इस अभियान से जोड़ा जाए।
उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था की पहचान और रेफरल
Identification & Referral of High-Risk Pregnancies
आशा कार्यकर्ता उन महिलाओं की पहचान करें जिनमें एनीमिया, उच्च रक्तचाप (प्री-एक्लेम्पसिया), कम उम्र में गर्भधारण, या पिछली जटिल प्रसव का इतिहास हो। ऐसी महिलाओं को तुरंत उच्च स्वास्थ्य केंद्र (CHC या जिला अस्पताल) रेफर किया जाए।
सुमन (SUMAN) योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार
Wide Publicity of SUMAN Scheme
सरकार की SUMAN (Surakshit Matritva Aashwasan) योजना के तहत गर्भवती महिलाओं को सरकारी अस्पतालों में मुफ्त जांच, मुफ्त दवाइयां , मुफ्त प्रसव, और मुफ्त एम्बुलेंस सुविधा दी जाती है। इस योजना की जानकारी हर गर्भवती महिला तक पहुँचाई जाए।
निष्कर्ष-Conclusion-राष्ट्रीय सुरक्षित मातृत्व दिवस केवल एक दिन का आयोजन नहीं है, बल्कि यह मातृ मृत्यु दर को शून्य करने का एक सतत प्रयास है। जब तक गांव-गांव में आशा कार्यकर्ता, एम्बुलेंस, पोषण और जागरूकता का सशक्त तंत्र नहीं बनता, तब तक हर गर्भवती महिला को सुरक्षा नहीं मिल सकती। इसलिए, ज़मीनी स्तर पर सामुदायिक भागीदारी, सरकारी योजनाओं का लाभ, और स्वास्थ्य कर्मियों का समर्पण ही सुरक्षित मातृत्व की सच्ची तस्वीर बनाएगा। आइए, हर 11 अप्रैल को हम यह संकल्प लें कि हम अपने आसपास की हर मां और होने वाले बच्चे के जीवन को सुरक्षित बनाने में अपनी भूमिका निभाएंगे।
