National Productivity Day : राष्ट्रीय उत्पादकता दिवस-सशक्त भारत का आधार-“उत्पादकता, नवाचार और दक्षता जानें क्यों मनाया जाता है राष्ट्रीय उत्पादकता दिवस और इसका महत्व” हर वर्ष 12 फरवरी को भारत में राष्ट्रीय उत्पादकता दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह दिवस केवल एक स्मरणोत्सव नहीं, बल्कि देश की आर्थिक रीढ़ को मजबूत करने वाले सिद्धांतों उत्पादकता, गुणवत्ता, दक्षता और नवाचार को समर्पित एक अभियान है। राष्ट्रीय उत्पादकता परिषद (NPC) की स्थापना की याद में मनाए जाने वाले इस दिवस का उद्देश्य औद्योगिक, कृषि और सेवा क्षेत्रों में संसाधनों के इष्टतम उपयोग के माध्यम से समावेशी विकास को गति देना है। यह लेख इस महत्वपूर्ण दिवस के इतिहास, उद्देश्य और प्रासंगिकता पर प्रकाश डालता है। राष्ट्रीय उत्पादकता दिवस 12 फरवरी को भारत में मनाया जाता है। जानें इसका इतिहास, राष्ट्रीय उत्पादकता परिषद (NPC) की भूमिका, उद्देश्य और उत्पादकता सप्ताह का महत्व। जागरूकता बढ़ाएं, दक्षता सुधारें।
मुख्य बिंदु एवं विवरण आयोजन की संरचना
राष्ट्रीय उत्पादकता दिवस का आयोजन वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार के तहत कार्यरत राष्ट्रीय उत्पादकता परिषद (NPC) द्वारा किया जाता है। यह उत्सव एक दिन से आगे बढ़कर 12 से 18 फरवरी तक राष्ट्रीय उत्पादकता सप्ताह के रूप में मनाया जाता है, जिस दौरान देश भर में विभिन्न कार्यशालाएं, सेमिनार और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
राष्ट्रीय उत्पादकता परिषद (NPC) का गठन 12 फरवरी, 1958 को एक स्वायत्त संस्था के रूप में किया गया था। तभी से इस दिन को राष्ट्रीय उत्पादकता दिवस के रूप में चिन्हित किया जाने लगा। इसकी स्थापना का मूल विचार युद्धोत्तर काल में देश की औद्योगिक क्षमता को वैज्ञानिक प्रबंधन और उत्पादकता संवर्धन के माध्यम से पुनर्जीवित करना था।
प्रमुख उपयोगी उद्देश्य
उत्पादकता, गुणवत्ता और दक्षता के संस्कृति को राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा देना।
उत्पादन लागत में कमी लाकर वैश्विक बाजार में देश की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाना।
औद्योगिक और सेवा क्षेत्र में नवाचार (Innovation) को प्रोत्साहित करना।
कार्य संस्कृति में सुधार करते हुए संसाधनों का अधिकतम एवं इष्टतम उपयोग सुनिश्चित करना।
राष्ट्रीय उत्पादकता दिवस का महत्व
जागरूकता का प्रसार-यह दिवस उत्पादकों, कर्मचारियों, प्रबंधकों और उपभोक्ताओं सभी के बीच उत्पादकता एवं दक्षता (Efficiency) के महत्व के प्रति समझ विकसित करता है।
आत्मनिर्भरता का मार्ग-संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग पर जोर देकर यह ‘आत्मनिर्भर भारत’ के निर्माण की दिशा में एक मजबूत आधार तैयार करता है।
समग्र आर्थिक विकास-यह आयोजन स्पष्ट करता है कि उत्पादकता केवल लाभ का मापदंड नहीं, बल्कि राष्ट्रीय आर्थिक विकास, रोजगार सृजन और सामाजिक उन्नति की कुंजी है।
सभी क्षेत्रों का समावेश-यह दिवस केवल विनिर्माण उद्योग तक सीमित न होकर कृषि, सेवा, स्वास्थ्य एवं शिक्षा जैसे सभी क्षेत्रों में उत्पादकता बढ़ाने पर बल देता है।
निष्कर्ष-राष्ट्रीय उत्पादकता दिवस भारत की अर्थव्यवस्था को गति, गुणवत्ता और ग्लोबल कॉम्पिटिटिवनेस प्रदान करने की दिशा में एक सार्थक पहल है। यह हमें याद दिलाता है कि सीमित संसाधनों में अधिकतम एवं बेहतर उत्पादन ही सतत विकास का आधार है। जैसा कि हम हर साल यह दिवस मनाते हैं, यह हम सभी हितधारकों-सरकार, उद्योग और नागरिकों के लिए अपनी प्रक्रियाओं, कार्यशैली और सोच में नवाचार लाकर उत्पादकता बढ़ाने का संकल्प लेने का अवसर है। एक उत्पादक राष्ट्र ही एक समृद्ध राष्ट्र बन सकता है।
