National Missing Persons Day : खोए-प्रियजनों की खोज व परिवारों की ख़ुशी लौटने की ज़िम्मेदारी लेने का दिन है “राष्ट्रीय गुमशुदा व्यक्ति दिवस”-गुमशुदा हुए प्रियजनों की खोज और परिवारों का सहारा-जानें क्यों मनाया जाता है राष्ट्रीय गुमशुदा व्यक्ति दिवस-हर साल 3 फरवरी को देश भर में राष्ट्रीय गुमशुदा व्यक्ति दिवस मनाया जाता है। यह दिन उन हजारों लोगों की याद में समर्पित है जो बिना किसी सुराग के लापता हो जाते हैं, और उनके परिवारों के अथक संघर्ष को सलाम करता है। यह केवल एक जागरूकता दिवस नहीं, बल्कि एक सामाजिक आंदोलन है जो हम सभी से एक जिम्मेदार और सतर्क समाज के निर्माण में योगदान की अपील करता है। राष्ट्रीय गुमशुदा व्यक्ति दिवस 3 फरवरी को मनाया जाता है। जानें इसका इतिहास, उद्देश्य और महत्व। लापता व्यक्तियों की खोज व उनके परिवारों के समर्थन में आप कैसे योगदान दे सकते हैं, पढ़ें पूरी जानकारी।
“राष्ट्रीय गुमशुदा व्यक्ति दिवस”का उद्देश्य
इस दिन के तीन प्रमुख उद्देश्य हैं-लापता लोगों की खोज में तेजी लाना: सार्वजनिक सहयोग और प्रशासनिक प्रयासों को बढ़ावा देना।
परिवारों को सहारा देना-मानसिक व भावनात्मक समर्थन प्रदान करना।
जनता को सतर्क करना-लापता होने की घटनाओं की रोकथाम और त्वरित रिपोर्टिंग के प्रति जागरूक बनाना।
“राष्ट्रीय गुमशुदा व्यक्ति दिवस”-ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
इस दिवस की नींव जो एन लोविट्जर ने 2010 में रखी थी, जब उनकी बेटी एलेक्जेंड्रिया लापता हो गई थीं। उनके व्यक्तिगत दुःख और संकल्प ने एक राष्ट्रीय पहल का रूप ले लिया। वर्ष 2018 में इस दिवस को व्यापक रूप से मान्यता मिली और तब से यह देश भर में एक महत्वपूर्ण सामाजिक कार्यक्रम के रूप में मनाया जाता है।
“राष्ट्रीय गुमशुदा व्यक्ति दिवस” का महत्व
राष्ट्रीय गुमशुदा व्यक्ति दिवस हमें यह याद दिलाता है कि लापता होने की घटनाएं केवल आंकड़े नहीं, बल्कि मानवीय त्रासदियां हैं। यह दिन-समाज में इस गंभीर समस्या पर चर्चा को बढ़ावा देता है,लापता व्यक्तियों को सुरक्षित वापस लाने के सामूहिक प्रयासों को प्रोत्साहित करता है और परिवारों को यह एहसास दिलाता है कि वे अकेले नहीं हैं।
“राष्ट्रीय गुमशुदा व्यक्ति दिवस”-अंतर्राष्ट्रीय संदर्भ में
वैश्विक स्तर पर 30 अगस्त को “जबरन गुमशुदा किए गए लोगों के पीड़ितों का अंतर्राष्ट्रीय दिवस” भी मनाया जाता है जो मुख्यतः राजनीतिक या संघर्ष के दौरान जबरन गायब किए गए लोगों पर केंद्रित है। ये दोनों दिवस मिलकर गुमशुदगी की विभिन्न समस्याओं पर प्रकाश डालते हैं।
निष्कर्ष-3-फरवरी का दिन एकजुटता, संवेदना और कार्रवाई का दिन है। यह हमें यह प्रतिबद्धता दोहराने का अवसर देता है कि कोई भी व्यक्ति गुमशुदा न रहे और हर परिवार को न्याय मिले। आइए, हम सभी सतर्क रहें, संवेदनशील बनें और इस पहल का हिस्सा बनकर एक सुरक्षित समाज के निर्माण में योगदान दें।

