National Deworming Day : भारतीय बच्चों के स्वास्थ्य की सुरक्षा ढाल है-राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस

राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस भारत के बच्चों के स्वास्थ्य की एक सुरक्षा ढाल-राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस-राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस (National Deworming Day) भारत सरकार की एक ऐसी जन-केंद्रित स्वास्थ्य पहल है, जिसका लक्ष्य देश के भविष्य-हमारे बच्चों और किशोरों-को पेट के कीड़ों (कृमियों) के प्रकोप से मुक्त करना है। यह अभियान साल में दो बार, फरवरी और अगस्त के महीने में, देशभर के आंगनवाड़ी केंद्रों और स्कूलों में चलाया जाता है, जहां 1 से 19 वर्ष तक के लाखों बच्चों को निःशुल्क एल्बेंडाजॉल की गोली खिलाकर उन्हें कृमि-मुक्त किया जाता है। यह छोटी सी गोली बच्चों के समग्र स्वास्थ्य, पोषण और विकास में एक बड़ा बदलाव लाने की क्षमता रखती है।राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस भारत सरकार की प्रमुख पहल है, जिसके तहत 1-19 वर्ष के बच्चों को निःशुल्क एल्बेंडाजॉल दवा दी जाती है। इस लेख में जानिए इस अभियान के उद्देश्य,लाभ और कैसे यह बच्चों के स्वास्थ्य व विकास की रक्षा करता है।

राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस क्यों महत्वपूर्ण है ?

बचपन में पेट के कीड़े (Soil-Transmitted Helminths – STH) एक आम समस्या है, खासकर स्वच्छता एवं स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी वाले क्षेत्रों में। ये परजीवी बच्चे के शरीर से पोषक तत्व चूसकर उसे कुपोषण, एनीमिया (खून की कमी) और शारीरिक एवं मानसिक विकास में बाधा का शिकार बना देते हैं। इसका सीधा असर बच्चों की पढ़ाई, एकाग्रता और जीवन की समग्र गुणवत्ता पर पड़ता है। राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस इन्हीं गंभीर समस्याओं के समाधान के लिए एक सामूहिक, वैज्ञानिक और सुनियोजित हस्तक्षेप है।

भारत सरकार द्वारा संचालित अभियान के मुख्य बिंदु

उद्देश्य-देश के 1 से 19 वर्ष के बच्चों और किशोरों में कृमि संक्रमण की दर को कम करना, ताकि उनके स्वास्थ्य, पोषण स्तर और जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाया जा सके।
लक्ष्य समूह-1 से 19 वर्ष की आयु के सभी बच्चे और किशोर। इसमें स्कूल जाने वाले और स्कूल न जाने वाले दोनों ही तरह के बच्चे शामिल हैं।
दवा एवं क्रियाविधि-अभियान के तहत आंगनवाड़ी केंद्रों और स्कूलों में बच्चों को एल्बेंडाजॉल (Albendazole) की एक गोली निःशुल्क चबाकर खिलाई जाती है। यह दवा पेट के कीड़ों को नष्ट करने में अत्यंत प्रभावी है।
मॉप-अप दिवस-मुख्य अभियान दिवस पर जो बच्चे दवा लेने से छूट जाते हैं, उन्हें सुनिश्चित करने के लिए मुख्य दिन के 3 से 5 दिन बाद एक ‘मॉप-अप दिवस’ (Follow-up Day) भी आयोजित किया जाता है।
आयोजन की तिथियां-यह अभियान प्रतिवर्ष दो बार “10-फरवरी“और “10-अगस्त” के आसपास पूरे देश में सघन रूप से चलाया जाता है।

अभियान का व्यापक प्रभाव एवं लाभ

कुपोषण और एनीमिया पर नियंत्रण-कृमि शरीर के भोजन और पोषक तत्वों को अवशोषित कर लेते हैं। इनके निष्कासन से बच्चे का शरीर पोषक तत्व ग्रहण कर पाता है, जिससे कुपोषण और एनीमिया जैसी स्थितियों में सुधार होता है।
बेहतर शारीरिक एवं मानसिक विकास-पोषण मिलने से बच्चों का शारीरिक विकास बेहतर होता है और उनकी सीखने की क्षमता एवं संज्ञानात्मक विकास भी बढ़ता है।
स्कूल उपस्थिति और प्रदर्शन में सुधार-स्वस्थ बच्चे नियमित रूप से स्कूल जाते हैं और बीमारी के कारण अनुपस्थिति कम होती है। इससे उनकी पढ़ाई पर पड़ने वाला नकारात्मक प्रभाव कम होता है।
सामुदायिक स्वास्थ्य जागरूकता-यह अभियान केवल दवा खिलाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से स्वच्छता, साफ-सफाई और स्वस्थ आदतों के बारे में जागरूकता भी फैलाई जाती है।

निष्कर्ष-राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा संचालित एक सराहनीय और दूरदर्शी पहल है। यह अभियान एक साधारण, सुरक्षित और प्रभावी दवा के माध्यम से करोड़ों भारतीय बच्चों के जीवन में एक बड़ा सकारात्मक बदलाव ला रहा है। यह न केवल बच्चों को तात्कालिक रूप से कृमि-मुक्त करता है, बल्कि एक स्वस्थ, शिक्षित और उत्पादक पीढ़ी के निर्माण की नींव भी रखता है। हर अभिभावक, शिक्षक और सामुदायिक सदस्य का कर्तव्य है कि वे इस अभियान से जुड़ें और यह सुनिश्चित करें कि उनके आस-पास का कोई भी बच्चा इस जीवनरक्षक दवा से वंचित न रह जाए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *