रीवा, मैहर, सतना की धरती में पहुचेगा नर्मदा का पानी, स्लीमनाबाद वॉटर टनल का 85 प्रतिशत काम पूरा

रीवा। मध्यप्रदेश के जबलपुर कटनी ही नही बल्कि विंध्य की धरा यानि मैहर, सतना, रीवा की धरती में नर्मदा मईया का पानी पहुचने का रास्ता लगभग साफ हो गया है और आने वाले समय में यहां के किसानों के खेतों में नर्मदा का पानी पहचेगा। जिससे इस क्षेत्र में सिंचाई का रकवा तो बढ़ेगा ही, किसानों की फसलें लहलहाऐगी।

वॉटर टनल लगभग तैयार

प्रदेश की सबसे बड़ी और देश की सबसे लंबी कटनी में बन रही ’स्लीमनाबाद वॉटर टनल’ का 85 प्रतिश काम पूरा हो चुका है। स्लीमनाबाद टनल के पूरे होने से नर्मदा का पानी सोन कछार तक पहुंचेगा तथा विंध्य और बुंदेलखंड के 6 जिलों में बरगी परियोजना से 2.45 लाख हेक्टेयर में सिंचाई हो सकेगी।

227 क्यूमेक पानी की छमता वाली है यह नहर

बरगी व्यपवर्तन परियोजना के माध्यम से जबलपुर, कटनी, सतना, मैहर, पन्ना और रीवा जिलों के 1450 गांवों में नर्मदा का पानी पहुंचेगा। इससे 2 लाख 45 हजार हेक्टेयर जमीन सिंचित होगी। 197 किमी लंबी नहर, जिसकी क्षमता 227 क्यूमेक है। बताया जाता है कि इस नहर में खास बात यह है कि इसमें नेचुरल पानी का बहाव है। जिससे बिना खर्च के नहर का पानी पहुच सकेगा।

सीएम मोहन ने किया समीक्षा

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण की 270वीं बैठक हुई है। जिसमें 11.952 किमी लंबी जल सुरंग इस प्रोजेक्ट को लेकर समीक्षा की गई। अगले कुछ महीनों में सीएम डॉ. मोहन यादव इसका उद्घाटन करेंगे। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि सभी निर्माणाधीन परियोजनाओं को वित्तीय और प्रशासकीय बाधाएं दूर कर शीघ्र पूरा किया जाए।

स्लीमनाबाद वॉटर टनल प्रोजेक्ट की प्रमुख विशेषताएं:

  • उद्देश्य: इस परियोजना के माध्यम से बिना बिजली खर्च किए, प्राकृतिक बहाव (ग्रेविटी) से नर्मदा का पानी बरगी व्यपवर्तन परियोजना के अंतर्गत विंध्य के पहाड़ों को पार करते हुए पानी की कमी वाले क्षेत्रों तक पहुँचाया जाएगा।
  • लंबाई और स्थान: यह लगभग 11.95 किलोमीटर लंबी सुरंग है जो कटनी जिले के स्लीमनाबाद में जमीन से लगभग 80 फीट नीचे से गुजरती है।
  • लाभान्वित क्षेत्र: इस प्रोजेक्ट से जबलपुर, कटनी, सतना, मैहर और रीवा सहित आसपास के क्षेत्रों के लगभग 2.45 लाख हेक्टेयर भूमि को सिंचाई की सुविधा मिलेगी और ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल उपलब्ध होगा।
  • वर्तमान स्थिति: मार्च 2026 तक इस परियोजना का लगभग 85% काम पूरा हो चुका है, और जल्द ही इसका उद्घाटन होने की उम्मीद है।
  • तकनीकी चुनौती: यह एक कठिन इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट रहा है, जिसे पूरा करने के लिए जर्मनी से आयातित TBM (टनल बोरिंग मशीन) का उपयोग किया गया है।

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