Birth Anniversary of Actress Nanda: 60 और 70 के दशक में दिग्गज अभिनेत्री रहीं नंदा आज अपनी सादगी से बहोत याद आ रही हैं, आज ही के दिन वो सन 1938 में महाराष्ट्र के कोल्हापुर में पैदा हुई थीं उनका फिल्मों से नाता ऐसे जुड़ा कि उनके पिता विनायक दामोदर, मराठी फ़िल्मों के मशहूर अभिनेता और निर्देशक थे।उन्हें ‘मास्टर विनायक’ भी कहते थे। नन्दा अपने घर में सात भाई-बहनों में सबसे छोटी थीं और लाड प्यार में बड़ा ख़ुशहाल बचपन बिता रही थीं तभी यकायक उनके पिता का देहांत हो गया था और जीवन की कठिनाइयों ने उन्हें काम करने पर मजबूर कर दिया उनके सामने एक ही रास्ता साफ़ दिख रहा था वो था एक्टिंग का इसलिए बतौर बाल कलाकार वो फिल्मों से जुड़ गईं ,उनकी पहली फिल्म थी साल 1948 में आई फिल्म ‘मंदिर’ इसके बाद आई ‘जग्गू’, ‘अंगारे’, ‘तूफान और दीया’, ‘शतरंज’, ‘साक्षी गोपाल’ जैसी फिल्में जिनमें एक्टिंग करते हुए वो बड़ी होती गईं और अपनी दमदार एक्टिंग का लोहा मनवाती गईं इसलिए जब बतौर हीरोइन फिल्मों में आईं तो लोग उनके भोले से चेहरे और दमदार एक्टिंग के दीवाने हो गए।
शुरुआत में ज़्यादातर बनीं बहन :–
हालाँकि अपने करियर की शुरुआत में, नंदा ने ज़्यादातर बहन के किरदार में सबका दिल जीता ये फिल्में रहीं -‘तूफ़ान और दिया’ [1956], ‘भाभी’ [1957], ‘दुल्हन’ [1958], ‘छोटी बहन’ [1959] और ‘काला बाज़ार’ [1960] लेकिन जल्दी ही वो इस दायरे से बाहर निकल गईं और लीड रोल निभाए एक रेकॉर्ड भी उनके नाम याद आता है कि उन्होंने आठ सिंगर्स के लिए लिप-सिंक किया है। जी हाँ ये किसी आश्चर्य से काम नहीं लगता क्योंकि नंदा का करियर ज़्यादा लम्बा नहीं था शायद कुछ 72 फिल्मों में हीरोइन रहीं , इसके बावजूद उन्होंने आठ अलग-अलग गायिकाओं की आवाज़ों पर लिप-सिंक किया।
किन आठ गायिकाओं ने गाये नंदा ने लिए गाने :-
तो चलिए कुछ गाने हम आपको याद दिलाए देते हैं जिनमें नंदा ने लिप सिंक किया है मगर हर बार अलग गायिका के लिए
तो पहला गाना जिसका हम ज़िक्र करने जा रहे हैं उसमें नंदा बेहद अलग अंदाज़ के साथ नज़र आती हैं ,ये है 1963 की फिल्म ‘नर्तकी’ और गाने के बोल हैं -‘बेताब निगाहों से मुझे देखने वालों ‘इस गाने को लिखा है शकील बदायूँनी ने संगीत दिया है रवि ने और इस गाने में नंदा जी ने लिप सिंक किया है- आशा भोसले के लिए। अगला गीत है “गुनाहों का चिराग जल ना सकेगा …” – आगरा रोड [1957] की फिल्म से , गीतकार हैं प्रेम धवन संगीतकार हैं रोशन और नंदा का लिप सिंक है गीता दत्त के लिए। नंदा पर फिल्माया गया अगला गाना है लता मंगेशकर की आवाज़ में ‘मिले तो फिर झुके नहीं …’ – फिल्म -आकाशदीप [1965] के लिए ,गीतकार हैं मजरूह सुल्तानपुरी संगीतकार हैं – चित्रगुप्त। अब याद आ रहा है शारदा का गाया ,’जान-ए-चमन शोला बदन. ..’ गाना ,फिल्म – गुमनाम [1965] के लिए, हसरत जयपुरी के नग़मे की तर्ज़ बनाई है शंकर-जयकिशन ने। उस भजन को हम कैसे भूल सकते हैं जिसने नंदा को हाइलाइट कर दिया था जी हाँ “ना मैं धन चाहूँ …” फिल्म – काला बाज़ार [1960] से जिसे आवाज़ दी थी सुधा मल्होत्रा ने गीतकार थे शैलेंद्र और संगीतकार एसडी बर्मन। नंदा के लिए सुमन कल्याणपुर ने भी एक खूबसूरत गीत गाया है ,’ठहरिये होश में आ लू. ..’ -फिल्म मोहब्बत इसको कहते हैं [1965] की फिल्म के लिए ,मजरूह सुल्तानपुरी के नग़मे की तर्ज़ बनाई है खैय्याम ने। अब आती है बारी उषा मंगेशकर की जिनके लिए नंदा ने लिप सिंक किया गाने ‘पीके हम तुम जो चले. ..’ – गुमनाम [1965] की फिल्म के लिए ,हसरत जयपुरी के शब्द संयोजन को संगीतबद्ध किया था ,शंकर-जयकिशन ने। अब बात वाणी जयराम की जिन्होंने नंदा के लिए गीत गाया ‘जिंदगी में आप आए. …’ – फिल्म छलिया [1973] में जिसके बोल लिखे थे राजिंदर कृष्ण ने ,संगीत था आर.डी. बर्मन का।
प्यार परवान न चढ़ सका :-
नंदा कर्नाटकी क़रीब 2 दशक तक भारतीय सिनेमा में राज करने वाली नंदा कर्नाटकी ने यूँ तो बहोत कुछ हासिल किया पर मोहब्बत के लिए तरसती रही बचपन में पिता का साया सर से उठ गया तो जवानी में महबूब का साथ न मिला उनका इश्क़ मंज़िल ए मक़सूद को न पा सका दरअसल नंदा मनमोहन देसाई से प्यार करती थीं और दोनों ने सगाई भी कर ली थी लेकिन फिर अचानक मनमोहन देसाई की बालकनी से गिर कर मरने की खबर आई और नंदा बिखर के रह गईं इसके बाद उन्होंने कभी शादी नहीं की और 2014 में वो भी ये दुनिया छोड़ कर चली गईं।
साल 1957 में रिलीज़ हुई फिल्म ‘लक्ष्मी’ से नंदा ने करियर की शुरुआत करने वाली नंदा ने हमें ‘भाभी’, ‘बंदी’, ‘आगरा रोड’, ‘दुल्हन’, ‘धूल के फूल’, ‘जरा बचके’, ‘कैदी नंबर 911’, ‘नया संसार’, ‘छोटी बहन’, ‘इत्तेफाक’, ‘मोहब्बत इसको कहते हैं’, ‘आहिस्ता आहिस्ता’ ‘जब -जब फूल खिले ‘और ‘मंहदी लगी मेरे हाँथ’ जैसी दर्जनों फिल्मों में अपने अभिनय की अमिट छाप छोड़ी।

