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Jan-Vishwas Abhiyan 2026: अब हर शुक्रवार गांव पहुंचेंगे अधिकारी, मौके पर होगा शिकायतों का समाधान और योजनाओं की पड़ताल

Jan-Vishwas Abhiyan 2026: 7 अगस्त से 3 जनवरी 2027 तक चलेगा विशेष अभियान, सीएम हेल्पलाइन से लेकर आयुष्मान, पीएम आवास और जल जीवन मिशन तक दो दर्जन से अधिक बिंदुओं की होगी जमीनी समीक्षा।

Jan-Vishwas Abhiyan 2026: मुख्यमंत्री जन-विश्वास अभियान-2026 (Jan Vishwas Abhiyan 2026) के तहत उज्जैन जिले में प्रशासनिक व्यवस्था को गांव स्तर तक मजबूत करने की तैयारी पूरी कर ली गई है। 7 अगस्त से शुरू होने वाला यह अभियान 3 जनवरी 2027 तक संचालित होगा। अभियान के दौरान प्रत्येक शुक्रवार (Field Inspection) को जिले के अधिकारी गांवों में पहुंचकर आमजन की शिकायतें सुनेंगे, उनका मौके पर समाधान करेंगे और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की वास्तविक स्थिति का आकलन करेंगे। अभियान की शुरुआत जनपद पंचायत उज्जैन की ग्राम पंचायत खेमासा से होगी, जहां कलेक्टर रौशन कुमार सिंह (District Collector) स्वयं अधिकारियों के साथ समीक्षा करेंगे।

जवाबदेही अभियान का अगला चरण

प्रशासन इस अभियान को केवल औपचारिक निरीक्षण नहीं, बल्कि पिछले डेढ़ महीने से चल रही जवाबदेही प्रक्रिया (Accountability Drive) का विस्तार मान रहा है। दरअसल, 29 जून को कलेक्टर ने 50 दिनों से अधिक समय से लंबित सीएम हेल्पलाइन (CM Helpline) शिकायतों को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए बड़नगर के सीएमओ को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद 6 जुलाई को नगर निगम आयुक्त अभिलाष मिश्रा ने शिकायतों के निराकरण में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों का वेतन रोकने तक की चेतावनी दी थी। वहीं 13 जुलाई को शिकायतों पर कार्रवाई नहीं करने वाले अधिकारियों को नोटिस जारी करने के निर्देश भी दिए गए थे। अब इन्हीं निर्देशों के प्रभाव का आकलन करने के लिए प्रशासन सीधे गांवों में पहुंचकर वास्तविक स्थिति की समीक्षा करेगा।

हर गुरुवार अपडेट होगा डेटा, शुक्रवार को होगी ग्राउंड रिव्यू

अभियान की कार्यप्रणाली भी तय कर दी गई है। प्रत्येक गुरुवार (Data Update) को संबंधित विकासखंड की सीएम हेल्पलाइन और लोक सेवा गारंटी अधिनियम (Public Service Guarantee Act) के लंबित मामलों का डेटा अपडेट किया जाएगा। इसके बाद शुक्रवार (Ground Review) को अधिकारी गांव पहुंचकर उन्हीं मामलों की मौके पर समीक्षा करेंगे और समाधान की प्रगति का मूल्यांकन करेंगे। सभी विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि निर्धारित भ्रमण से पहले ही क्षेत्र में पहुंचकर अधिकतम लंबित शिकायतों और आवेदनों का निराकरण सुनिश्चित करें।

इन योजनाओं और सेवाओं की होगी मौके पर जांच

अभियान के दौरान अधिकारियों की टीम सीएम हेल्पलाइन, जनसुनवाई, नामांतरण, सीमांकन, बंटवारा, न्यायालयीन आदेशों के पालन, फार्मर आईडी, आयुष्मान कार्ड, समग्र ई-केवाईसी, प्रधानमंत्री आवास योजना, जल जीवन मिशन, आंगनवाड़ी, स्कूल-कॉलेज, स्वास्थ्य केंद्र, राशन दुकान, खाद-बीज वितरण, पुलिस थाना, तहसील, आईटीआई, छात्रावास तथा अन्य सार्वजनिक परिसंपत्तियों सहित दो दर्जन से अधिक विषयों की ऑन-स्पॉट जांच (On-site Verification) करेंगे। इसके साथ ही सामाजिक सुरक्षा पेंशन, दिव्यांग पेंशन और अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं के पात्र हितग्राहियों तक लाभ पहुंचने की स्थिति का भी मूल्यांकन किया जाएगा।

सीधे संवाद से परखी जाएगी योजनाओं की हकीकत

प्रशासन का मानना है कि केवल समीक्षा बैठकों से समस्याओं का स्थायी समाधान संभव नहीं है। अधिकारी जब गांवों में पहुंचकर नागरिकों से सीधे संवाद करेंगे तो योजनाओं की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी। इससे कागजी उपलब्धियों और जमीनी हकीकत के बीच का अंतर भी स्पष्ट होगा तथा पब्लिक फीडबैक (Public Feedback) के आधार पर आवश्यक सुधार किए जा सकेंगे।

सफलता का पैमाना होगा शिकायतों में कमी

अभियान की सफलता का आकलन केवल निरीक्षण तक सीमित नहीं रहेगा। प्रशासन यह भी देखेगा कि निरीक्षण के बाद शिकायतों का स्थायी समाधान कितना हुआ और सरकारी सेवाओं की गुणवत्ता में कितना सुधार आया। एक महीने बाद शिकायतों के आंकड़े (Complaint Trend) ही बताएंगे कि अभियान का वास्तविक असर कितना पड़ा।

हर शुक्रवार तैयार होगा जिले का रिपोर्ट कार्ड

अभियान के तहत प्रत्येक सप्ताह गुरुवार को लंबित शिकायतों का डेटा संकलित किया जाएगा, जबकि शुक्रवार को फील्ड समीक्षा के आधार पर विभागों और संबंधित अधिकारियों के प्रदर्शन का मूल्यांकन होगा। इसी आधार पर जिले का साप्ताहिक रिपोर्ट कार्ड (Performance Report) तैयार किया जाएगा।

हर महीने 10 हजार से ज्यादा शिकायतें बनी चुनौती

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के गृह जिले उज्जैन में हर महीने 10 हजार से अधिक सीएम हेल्पलाइन शिकायतें दर्ज हो रही हैं। लगातार समीक्षा बैठकों, नोटिस, वेतन रोकने की चेतावनियों और लंबित मामलों के निराकरण के निर्देशों के बावजूद शिकायतों की संख्या में अपेक्षित कमी नहीं आ सकी है। ऐसे में प्रशासन को उम्मीद है कि जन-विश्वास अभियान (Jan Vishwas Campaign) के जरिए अधिकारियों की गांवों में नियमित मौजूदगी से शिकायतों का मौके पर समाधान होगा, लंबित प्रकरणों में कमी आएगी और आम लोगों का सरकारी व्यवस्था पर भरोसा भी पहले से अधिक मजबूत होगा।

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