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एमपी की कुटकी और अरहर को मिलने जा रहा जीआई टैग, रीवा संभाग समेत इन जिलों में खरीदी

एमपी कृर्षि न्यूज। मध्यप्रदेश की तीन फसलों सिताही कुटकी, नागदमन कुटकी और बैंगनी अरहर को शीघ्र ही जी आई टैग मिलने जा रहा है। तीनों फसलों के प्रस्ताव तैयार कर परीक्षण के लिए भौगोलिक संकेत रजिस्ट्री चैन्नई भेज दिए गए है। कृषक कल्याण वर्ष 2026 में राज्य सरकार श्रीअन्न उत्पादन बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है।

सरकार कर रही प्रोत्सहित

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जनजातीय बहुल क्षेत्रों में पारंपरिक कोदो-कुटकी को बचाने और उत्पादन करने के लिये किसानों को प्रोत्साहित कर रहे हैं। औषधीय गुणवत्ता और पौष्ट‍किता के कारण अब दुनिया श्रीअन्न की ओर लौट रही है। ग्लोबल मार्केट में श्रीअन्न की मांग बढ़ रही है। श्रीअन्न अब किसानों के लिये आर्थ‍कि लाभ देने वाली फसल बन गया है।

इन जिलों में खरीदी

सिताही कुटकी, नागदमन कुटकी और बैंगनी अरहर की खरीदी एमपी के जबलपुर, कटनी, मंडला, डिंडोरी, छिंदवाड़ा, शहडोल, अनूपपुर, उमरिया, रीवा, मऊगंज, सतना, मैहर, बालाघाट, सिवनी, सीधी और सिंगरौली की जा रही हैं ।

60 दिन में हो जाती है तैयार

जानकारी के तहत सिताही कुटकी एक कम अवधि (60 दिन) वाली ’लिटिल मिलेट’ (छोटी बाजरा) की देशी किस्म है। यह वर्षा-आधारित क्षेत्रों और देर से बुवाई की स्थितियों के लिए उपयुक्त है। यह सूखे की मार, नमी की कमी, और प्रमुख कीटों (शूट फ्लाई), ’ग्रेन स्मट’ व ’ब्राउन स्पॉट’ जैसी बीमारियों का सामना करने में सक्षम है।

जीआई टैग से लाभ

औषधीय गुणों और उच्च पोषण मूल्य के लिए जानी जाती है। जीआई टैग मिलने से इस फसल की शुद्धता और गुणवत्ता की गारंटी मिलेगी। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में इसकी मांग बढ़ेगी। वैश्विक स्तर पर पहचान मिलेगी। इससे बिक्री बढेगी। यह साबित होगा कि फसल स्थापित मानकों के अनुरूप है।

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