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एमपी का जहाज महल, टूरिस्टों को करता है आकर्षित, बारिश में यहां का नजारा हो जाता है अद्रभुद

मांडू। विश्व धरोहर की दौड़ में शामिल मांडू का ऐतिहासिक जहाज महल अपनी स्थापत्य कला से देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित करता है। अपनी प्राकृतिक सुंदरता और शानदार वास्तुकला के कारण मांडू यूनेस्को की टेंटेटिव वर्ल्ड हेरिटेड साइट लिस्ट में भी शामिल है। धार जिले में स्थित मांडू या मांडव इंदौर से लगभग 100 किमी दूर है। आज भले ही दूर से एक छोटा-सा शहर नजर आता है, लेकिन एक समय था जब यह दुनिया के सबसे समृद्ध और बड़े शहरों में से एक था।

घूमने का सही समय

मांडू घूमने के लिए बारिश का महीना सबसे बेहतरीन है। जुलाई से सिंतबर के महीनों में यहां की खूबसूरती और बढ़ जाती है। विंध्याचल की पहाड़ियां हरियाली से घिर जाती है और मौसम इतना सुहाना हो जाता है कि घूमने का मजा दोगुना हो जाता है।

ऐसे जहाज महल का हुआ नामकरण

यह महल राजाओं-महाराजाओं का पसंदीदा गढ़ रहा है, क्योंकि प्राकृतिक रूप से इसकी बनावट की छठा देखते ही बनती है। आज दुनियाभर में अपनी वास्तुकला के लिए यह मशहूर हैं। इस महल में दो कृत्रिम झीले है। कूपर और मुंज सागर तालाब के बीच बना है और इसकी बनावट इस तरह है कि ऐसा लगे, जैसे पानी के बीच कोई बड़ा जहाज खड़ा हो। इसलिए इसे जहाज महल कहा जाता है। मानसून में जब झीलें पानी से भर जाती हैं, तब यह और भी खूबसूरत लगता है।

पर्यटकों के लिए नेटवर्क बन रही समस्या

जो जानकारी आ रही है उसके तहत जहाज महल में इन दिनों पर्यटकों के नेटवर्क की बड़ी समस्या आ रही है। महल परिसर में प्रवेश करते ही पर्यटक डिजिटल दुनिया से कट जाते हैं। यहां न मोबाइल नेटवर्क मिलता है, न इंटरनेट और न ही गूगल मैप काम करता है। स्थिति यह है कि संस्कृति मंत्रालय और बीएसएनएल की ओर से शुरू की गई डिजिटल हेरिटेज योजना के तहत बनाया गया फ्री वाई-फाई जोन भी अब बंद पड़ा है। उद्देश्य था कि पर्यटकों को बेहतर इंटरनेट सुविधा मिले, वे महल के इतिहास की जानकारी ऑनलाइन प्राप्त कर सकें और इंटरनेट मीडिया के माध्यम से मांडू का प्रचार-प्रसार हो, लेकिन यह योजना कुछ समय बाद ही दम तोड़ गई।

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