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अमेरिका में दो वैज्ञानिकों पर Mpox Virus के जैविक नमूने छिपाने का आरोप….

Mpox Virus Case: Two scientists in the US accused of hiding biological samplesMpox Virus Case: Two scientists in the US accused of hiding biological samples

Mpox Virus Case: Two scientists in the US accused of hiding biological samples

अमेरिका में Mpox Virus से जुड़ा एक मामला चर्चा में देखा जा रहा है जहां दो वैज्ञानिकों पर डीएक्टीवेटेड एमपीओएक्स वायरस के नमूने देश में लाने और अधिकारियों को इसकी जानकारी नहीं देने का आरोप लगाया गया है। जांच एजेंसियों के अनुसार मामला पब्लिक हेल्थ रिस्क से ज्यादा जैविक नमूने के आयात नियम और उसकी पारदर्शिता से जुड़ा हुआ है तो चलिए जानते हैं आखिर पूरा मामला क्या है।

वायरस से जुड़ा अमेरिका में क्या है पूरा मामला?

प्राप्त जानकारी के अनुसार दो रिसर्च करने वाले व्यक्ति जनवरी 2026 में रिपब्लिक आफ कांगो से अमेरिका लौटे थे। अमेरिकी अधिकारियों का ऐसा आरोप है कि उनके सामान में डीएक्टीवेटेड Mpox Virus के नमूने मिले हैं जांच के दौरान इन नैनो की जानकारी अधिकारियों को नहीं दी गई बाद में जांच की जैविक सामग्री प्राप्त होने के बाद मामला कानूनी कार्रवाई तक पहुंच गयाहै। अमेरिकी न्याय विभाग के अनुसार वैज्ञानिक पर जैविक सामग्री को घोषित नहीं करने और अधिकारियों को गलत जानकारी देने के आरोप लगे हैं।

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डिएक्टिवेटेड वायरस का क्या मतलब होता है?

एएमपीओएक्स वायरस का डीएक्टीवेटेड वायरस के रूप में होना जिसका मतलब है कि ऐसा वायरस जिसको प्रयोगशाला में इस तरीके से तैयार किया जाता है कि वह सामान्य स्थिति में वायरस फैलाने में सक्षम नहीं रहे। हालांकि ऐसे नमूनों को भी एक देश से दूसरे ले जाने के लिए निर्धारित सुरक्षा और दस्तावेज के नियम का पालन करना जरूरी होता है। रिसर्च करने वाले लोग ऐसे नमूनों का उपयोग करते हैं लेकिन उनके परिवहन को लेकर सख्त प्रोटोकॉल लागू किए जाते हैं।

अधिकारियों और विशेषज्ञों ने इस पर क्या कहा?

अपने बयान में डॉक्टर ने बताया कि किसी भी जैविक नमूने को इंटरनेशनल सीमाओं के पार ले जाने के दौरान तय किए गए नियम का पालन करना बहुत जरूरी होता है। हेल्थ एजेंसी का कहना है कि पारदर्शिता और सही घोषणा व्यवस्था ही इसका महत्वपूर्ण हिस्सा होतीहै। इस मामले में अब तक ऐसा कोई संकेत नहीं मिला है कि बरामद नमूने से सार्वजनिक लेवल पर कोई वायरस फैला है।

सार्वजनिक स्वास्थ्य पर कितना असर होगा?

फिलहाल अधिकारियों ने नमूने से किसी भी प्रकार की खतरे की पुष्टि नहीं की है फिर भी डॉक्टर का कहना है कि जैविक सामग्री के आयात और निर्यात से जुड़े नियम का पालन सभी पब्लिक की स्वास्थ्य की सुरक्षा बनाए रखने के लिए जरूरी होता है।

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इस मामले में आगे क्या होगा

अब यह मामला कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ने वाला है अदालत में पेश किए गए सबूत और पशुओं की दलीलों के आधार पर अभियान निर्धारित होगा कि आप कितने सही हैं फिलहाल जांच एजेंसी मामले की जांच कररहे हैं।

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