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MP: प्रदेश में 18 नदी खंड प्रदूषित, शिप्रा-चंबल-नर्मदा सबसे प्रभावित

MP Polluted River Stretches CPCB Report: मध्य प्रदेश की कई प्रमुख नदियों के कुछ हिस्सों में पानी की गुणवत्ता खराब पाई गई है, जहां केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार कुल 18 प्रदूषित नदी खंड चिह्नित किए गए हैं, जिनमें शिप्रा, चंबल, नर्मदा और ताप्ती जैसी 12 प्रमुख नदियों के हिस्से शामिल हैं; हालांकि देश स्तर पर प्रदूषित नदी खंडों की संख्या में सुधार हुआ है और 2022 के 311 से घटकर 2023 में 296 रह गए हैं, मध्य प्रदेश में यह चुनौती अभी भी बरकरार है, जिससे राज्य में जल संरक्षण और सीवेज उपचार की दिशा में तत्काल प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता पर बल दिया जा रहा है।

MP Polluted River Stretches CPCB Report: केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की हालिया रिपोर्ट में मध्य प्रदेश की कई प्रमुख नदियों के कुछ हिस्सों में पानी की गुणवत्ता खराब पाई गई है। रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश में कुल 18 प्रदूषित नदी खंड चिह्नित किए गए हैं, जहां जैविक प्रदूषण (बीओडी स्तर) निर्धारित मानकों से अधिक है और जल गुणवत्ता सुधार की आवश्यकता है।

प्रदूषण की गंभीरता के आधार पर श्रेणियां

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने प्रदूषित नदी खंडों को जैव-रासायनिक ऑक्सीजन मांग (बीओडी) स्तर के आधार पर पांच प्राथमिकता श्रेणियों में वर्गीकृत किया है, जिसमें मध्य प्रदेश के 18 प्रदूषित खंड शामिल हैं—दो खंड सबसे गंभीर प्रायोरिटी-1 (सबसे अधिक प्रदूषित, जहां बीओडी 30 मिलीग्राम/लीटर से अधिक है) में, एक प्रायोरिटी-2 में, दो प्रायोरिटी-3 में, तीन प्रायोरिटी-4 में और दस प्रायोरिटी-5 (सापेक्षिक रूप से कम प्रदूषित, जहां बीओडी 3.1 से 6 मिलीग्राम/लीटर के बीच है) में आते हैं, जिससे इन क्षेत्रों में जल गुणवत्ता सुधार के लिए तत्काल और क्रमिक कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।

शहरों के पास सबसे अधिक प्रदूषण

विश्लेषण से स्पष्ट है कि मध्य प्रदेश में नदियों का प्रदूषण मुख्य रूप से शहरी क्षेत्रों के निकट अधिक पाया गया है, जहां प्रभावित प्रमुख शहरों और क्षेत्रों में इंदौर, उज्जैन, देवास, भोपाल, ग्वालियर-मुरैना, नर्मदापुरम (पूर्व में होशंगाबाद) तथा खंडवा-बुरहानपुर शामिल हैं; विशेषज्ञों के अनुसार, इन शहरों से निकलने वाला अनुपचारित सीवेज और नालों का पानी सीधे नदियों में बहने से यह समस्या उत्पन्न हो रही है, जबकि औद्योगिक अपशिष्ट और बढ़ता शहरी दबाव भी प्रदूषण के प्रमुख कारण बने हुए हैं, जिसके चलते इन क्षेत्रों में जल गुणवत्ता मानकों से नीचे रहती है और तत्काल सुधारात्मक कदमों की आवश्यकता है।

राष्ट्रीय परिदृश्य में सुधार

सीपीसीबी के राष्ट्रीय जल गुणवत्ता निगरानी कार्यक्रम के तहत देशभर में 4,736 स्थानों पर निगरानी की जाती है, जिनमें 2,155 नदियों पर हैं। नवीनतम रिपोर्ट (2022-2023 डेटा पर आधारित) के अनुसार, देश की 271 नदियों में 296 प्रदूषित नदी खंड चिह्नित हुए हैं। यह 2018 के 351 खंडों से कमी दर्शाता है, जो सुधार की दिशा में सकारात्मक कदम है। हालांकि, मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में अभी भी चुनौतियां बनी हुई हैं। प्रदेश सरकार और सीपीसीबी द्वारा इन खंडों की सफाई के लिए योजनाएं चल रही हैं, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स की क्षमता बढ़ाना और सख्त निगरानी जरूरी है।

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