MP: असम से MP आएंगे जंगली भैंसे, गैंडे और कोबरा, बदले में मिलेंगे टाइगर और मगरमच्छ

MP Wildlife News

MP News: मध्यप्रदेश और असम के बीच वन्यजीवों के आदान-प्रदान पर सहमति बनी है। इस समझौते के तहत, आने वाले तीन वर्षों में असम से मध्यप्रदेश को 50 जंगली भैंसें, एक जोड़ा एक सींग वाला गैंडा तथा तीन किंग कोबरा लाए जाएंगे। जंगली भैंसों को कान्हा टाइगर रिजर्व में पुनर्स्थापित किया जाएगा, जबकि गैंडे और कोबरा शुरुआत में भोपाल के वन विहार राष्ट्रीय उद्यान में रखे जाएंगे।

MP Wildlife News: मध्यप्रदेश और असम के बीच वन्यजीवों के आदान-प्रदान पर महत्वपूर्ण सहमति बनी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरुवार को गुवाहाटी में असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा से मुलाकात की, जिसमें दोनों राज्यों के बीच दुर्लभ प्रजातियों के स्थानांतरण पर सैद्धांतिक समझौता हुआ।

इस समझौते के तहत अगले तीन वर्षों में असम से मध्यप्रदेश को 50 जंगली भैंसे (तीन चरणों में), एक जोड़ा एक सींग वाला गैंडा और तीन किंग कोबरा लाए जाएंगे। शुरुआत में गैंडे और कोबरा को भोपाल के वन विहार नेशनल पार्क में रखा जाएगा, जहां वे जलवायु अनुकूलन और जनता के प्रदर्शन के लिए उपलब्ध रहेंगे। वहीं, जंगली भैंसों की पुनर्स्थापना कान्हा टाइगर रिजर्व में की जाएगी, जो उनकी ऐतिहासिक निवास स्थली है।
बदले में मध्यप्रदेश असम को रॉयल बंगाल टाइगर का एक जोड़ा और छह मगरमच्छ (मगर) प्रदान करेगा। इससे असम की जैव विविधता भी समृद्ध होगी।

जैव विविधता को मिलेगा नया आयाम

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश पहले से ही ‘टाइगर स्टेट’ और ‘लेपर्ड स्टेट’ के रूप में जाना जाता है। चीतों की सफल पुनर्स्थापना के बाद अब जंगली भैंसों की वापसी से राज्य के वन्यजीव संरक्षण प्रयासों में नया अध्याय जुड़ेगा। जंगली भैंसों की पुनर्स्थापना से प्रदेश की जैव विविधता समृद्ध होगी और जंगलों के पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूती मिलेगी।

जंगली भैंसा (एशियाटिक वाइल्ड वॉटर बफेलो) एक लुप्तप्राय प्रजाति है, जो मध्यप्रदेश में एक सदी से अधिक समय पहले विलुप्त हो चुकी थी। देश में इसकी प्राकृतिक आबादी अब मुख्य रूप से असम तक सीमित है, जबकि छत्तीसगढ़ में भी इनकी संख्या बेहद कम है।

कान्हा टाइगर रिजर्व सबसे उपयुक्त

वन्यजीव संस्थान, देहरादून के वैज्ञानिक अध्ययन में कान्हा टाइगर रिजर्व को जंगली भैंसों के पुनर्स्थापन के लिए सबसे उपयुक्त पाया गया। अध्ययन में घास के मैदानों की गुणवत्ता, स्थायी जल स्रोतों की उपलब्धता, मानव हस्तक्षेप की न्यूनता और अन्य शाकाहारी जीवों के दबाव जैसे कारकों का मूल्यांकन किया गया।

अनुमतियां लेने की प्रक्रिया शुरू

मध्यप्रदेश सरकार ने इस योजना को सुरक्षित और चरणबद्ध तरीके से लागू करने के लिए केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण (CZA) और भारत सरकार से आवश्यक अनुमतियां प्राप्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। योजना का मुख्य उद्देश्य दीर्घकालिक संरक्षण और प्राकृतिक प्रजनन सुनिश्चित करना है।

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