MP UCC Tribal Exemption: मध्य प्रदेश में गुजरात की तर्ज पर आदिवासी वर्ग को समान नागरिक संहिता (UCC) से छूट देने की तैयारी है। सरकार आदिवासियों की मूल सांस्कृतिक पहचान और पारंपरिक रीति-रिवाजों को बनाए रखने के लिए उन्हें यूसीसी के दायरे से बाहर रखने का विचार कर रही है। इस विधेयक को आगामी मानसून सत्र में विधानसभा में पेश किए जाने की संभावना है। सरकार ने पुलिस मुख्यालय को गुजरात और उत्तराखंड में लागू प्रविधानों का अध्ययन कर रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए हैं।
MP UCC Tribal Exemption: मध्यप्रदेश सरकार गुजरात और उत्तराखंड की तर्ज पर समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code – UCC) लागू करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। सरकार की योजना आदिवासी समुदाय को यूसीसी के दायरे से बाहर रखने की है, ताकि उनकी पारंपरिक सांस्कृतिक पहचान और रीति-रिवाज बरकरार रह सकें। यूसीसी से छूट मिलने पर आदिवासियों के विवाह, विवाह-विच्छेद, विरासत और संपत्ति के मामलों में पारंपरिक रिवाजों पर Uniform Civil Code के प्रावधान लागू नहीं होंगे।
रंजना देसाई की अध्यक्षता में छह सदस्यीय समिति गठित
प्रदेश में यूसीसी लागू करने की तैयारियों के तहत सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश Justice Ranjana Prasad Desai की अध्यक्षता में छह सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति गठित कर दी गई है। यह समिति जनसुनवाई आयोजित कर आम लोगों, विशेषज्ञों और विभिन्न समुदायों की राय लेगी तथा यूसीसी का ड्राफ्ट तैयार करेगी। समिति को 60 दिनों के अंदर अपना प्रतिवेदन और ड्राफ्ट बिल सरकार को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।
गुजरात-उत्तराखंड मॉडल का अध्ययन
मध्यप्रदेश सरकार यूसीसी लागू करने से पहले गुजरात और उत्तराखंड में लागू किए गए प्रावधानों का विस्तृत अध्ययन कराएगी। पुलिस मुख्यालय को इस जिम्मेदारी सौंपी गई है। दोनों राज्यों के मॉडल की रिपोर्ट के आधार पर मध्य प्रदेश के सामाजिक- सांस्कृतिक संदर्भ में कानून तैयार किया जाएगा। सरकार हर प्रावधान के विधिक पहलू को भी ध्यान में रख रही है। इसी कारण समिति में विधि विशेषज्ञ, शिक्षाविद और सामाजिक कार्यकर्ताओं को शामिल किया गया है।
जुलाई में विधानसभा में आ सकता है विधेयक
सरकार की मंशा है कि मानसून सत्र में विधानसभा में संबंधित विधेयक पेश किया जाए। यदि सब कुछ योजना के अनुसार हुआ तो मध्य प्रदेश Uniform Civil Code लागू करने वाला तीसरा राज्य बन जाएगा। Uniform Civil Code के तहत विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और गोद लेने जैसे व्यक्तिगत कानूनों को एक समान रूप दिया जाएगा, जबकि आदिवासी समुदाय को उनकी सांस्कृतिक संवेदनशीलता को देखते हुए विशेष छूट दी जाएगी।

