MP Transport Department News: 1 जनवरी 2025 के बाद प्रदेश में 1,71,413 वाहनों का पंजीकरण महज 1,342 मोबाइल नंबरों के आधार पर कर दिया गया। परिवहन आयुक्त कार्यालय ने इसे डीलरों की लापरवाही और प्रक्रियाओं की अनदेखी का नतीजा बताया है। इस गड़बड़ी की सजा आम लोगों को भुगतनी पड़ रही है।
MP Transport Department News: मध्य प्रदेश परिवहन विभाग ने वाहन पंजीकरण प्रक्रिया में बड़ी अनियमितता का पर्दाफाश किया है। विभाग की तकनीकी जांच में सामने आया है कि ऑटोमोबाइल डीलर्स ने वाहन मालिकों की जानकारी या सहमति के बिना हजारों वाहनों को चुनिंदा ‘फर्जी’ या डुप्लिकेट मोबाइल नंबरों पर रजिस्टर्ड कर दिया। यह मामला सुरक्षा, पारदर्शिता और डिजिटल सिस्टम की विश्वसनीयता के लिए गंभीर चुनौती है।
1 जनवरी 2025 के बाद 1,71,413 वाहनों में गड़बड़ी
परिवहन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 1 जनवरी 2025 के बाद प्रदेश में कुल 1,71,413 वाहनों का पंजीकरण महज 1,342 मोबाइल नंबरों के आधार पर किया गया। कई मोबाइल नंबरों पर सैकड़ों-हजारों वाहन रजिस्टर्ड मिले, जो स्पष्ट रूप से अनियमितता की ओर इशारा करता है। इस गड़बड़ी के कारण वाहन मालिकों को कई परेशानियां झेलनी पड़ रही हैं। उन्हें ट्रैफिक उल्लंघन के ई-चालान नहीं मिल पा रहे हैं और न ही वे विभाग की ऑनलाइन सुविधाओं जैसे PUC रिन्यूअल, टैक्स पेमेंट या अन्य डिजिटल सेवाओं का लाभ उठा पा रहे हैं।
ओटीपी की समस्या से बचने के चक्कर में की गई छेड़छाड़
परिवहन विभाग के अनुसार, वाहन पंजीकरण की प्रक्रिया अब पूरी तरह डिजिटल है, जिसमें आधार या मोबाइल नंबर पर प्राप्त ओटीपी के जरिए सत्यापन जरूरी है। कई बार सर्वर डाउन होने, ग्राहक के पास आधार लिंक्ड मोबाइल न होने या अन्य तकनीकी दिक्कतों के कारण ओटीपी नहीं आ पाता। ऐसे में डीलर्स ने प्रक्रिया जल्दी पूरी करने और अपने टारगेट/कमीशन को सुरक्षित करने के लिए अपने कर्मचारियों या शोरूम के एक ही मोबाइल नंबर का बार-बार इस्तेमाल किया।
बल्क अपलोड और कॉपी-पेस्ट की तकनीक से बढ़ी गड़बड़ी
शोरूम में एक साथ 50-100 वाहनों की डिलीवरी होने पर ऑपरेटर काम के बोझ से बचने के लिए हर ग्राहक का सही मोबाइल नंबर सत्यापित करने के बजाय कॉपी-पेस्ट विधि अपनाते हैं। इससे कागजी काम तो पूरा हो जाता है, लेकिन डेटाबेस में गलत जानकारी दर्ज हो जाती है। विभाग का मानना है कि डीलर्स की लापरवाही और प्रक्रियाओं की अनदेखी इसका मुख्य कारण है।
तकनीकी जांच से हुआ खुलासा
परिवहन विभाग ने ‘डुप्लिकेट मोबाइल मैपिंग’ कमांड चलाकर डेटाबेस की जांच की। इस सॉफ्टवेयर ने उन मोबाइल नंबरों को चिह्नित किया जो एक निश्चित सीमा से अधिक बार इस्तेमाल हुए थे। जांच में एक ही नंबर पर सैकड़ों वाहन दर्ज मिले। सिस्टम ने यह भी ट्रैक किया कि ये फर्जी एंट्री किस डीलर आईडी से की गईं, जिससे दोषी शोरूम और एजेंसियों की पहचान आसान हो गई।
7 दिन का अल्टीमेटम, 31 जनवरी तक सुधार अनिवार्य
विभाग ने सख्त रुख अपनाते हुए सभी क्षेत्रीय परिवहन कार्यालयों (आरटीओ) को प्रभावित वाहनों की सूची सौंप दी है। डीलर्स को गड़बड़ी सुधारने के लिए 7 दिन का अल्टीमेटम दिया गया है। 31 जनवरी 2026 तक मोबाइल नंबर अपडेट नहीं होने पर-
- संबंधित डीलरों के खिलाफ कानूनी और वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
- प्रभावित वाहनों को प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUC) जारी नहीं किया जाएगा।
- वाहनों से जुड़ी सभी डिजिटल सेवाएं तत्काल ब्लॉक कर दी जाएंगी।
वाहन मालिकों से अपील की गई है कि वे जल्द से जल्द अपने वाहन के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर को अपडेट कराएं। विभाग ने सारथी पोर्टल पर आधार प्रमाणीकरण के माध्यम से ऑनलाइन अपडेट की सुविधा उपलब्ध कराई है।
