MP Education Tender Scam: मध्य प्रदेश के स्कूल शिक्षा विभाग के टेंडरों को लेकर कांग्रेस ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि 2023 से 2025 के बीच हुए विभिन्न टेंडरों में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी और भ्रष्टाचार हुआ है। कांग्रेस का दावा है कि कंप्यूटर, प्रिंटर, यूपीएस और इंटरएक्टिव बोर्ड जैसी खरीद में तकनीकी शर्तों को इस तरह तैयार किया गया कि प्रतिस्पर्धा सीमित हो गई और उपकरणों को बाजार मूल्य से 200-250 प्रतिशत अधिक कीमत पर खरीदा गया, जिसमें कुछ मामलों में टेंडर से बाहर की गई कंपनियों का ही सामान सप्लाई किया गया।
MP Education Tender Scam: मध्य प्रदेश में स्कूल शिक्षा विभाग के टेंडरों को लेकर राजनीतिक बवाल मचा हुआ है। प्रदेश कांग्रेस के मीडिया प्रभारी और पूर्व मंत्री मुकेश नायक ने 2023 से 2025 के बीच हुए विभिन्न टेंडरों में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया है कि सरकारी धन का दुरुपयोग कर उपकरणों को बाजार मूल्य से कई गुना महंगा खरीदा गया और तकनीकी शर्तों को इस तरह तैयार किया गया कि प्रतिस्पर्धा सीमित हो गई।
2023 में कंप्यूटर-प्रिंटर खरीद में लागत दोगुनी
कांग्रेस के अनुसार, वर्ष 2023 में माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा कंप्यूटर, यूपीएस और प्रिंटर की खरीद के लिए निकाले गए टेंडर की अनुमानित लागत करीब 40 करोड़ रुपये थी, लेकिन इसे अचानक बढ़ाकर लगभग 90 करोड़ रुपये कर दिया गया। आरोप है कि तकनीकी शर्तें ऐसी बनाई गईं कि केवल चुनिंदा कंपनियां ही योग्य ठहर सकें। नतीजतन, बाजार में 39 हजार रुपये के कंप्यूटर को 1.39 लाख रुपये में और 25 हजार रुपये के प्रिंटर को 1 लाख रुपये में खरीदा गया। यह बाजार मूल्य से 200-250 प्रतिशत अधिक बताया जा रहा है।
2025 में इंटरएक्टिव बोर्ड खरीद में दोहराया वही पैटर्न
इसी तरह वर्ष 2025 में इंटरएक्टिव बोर्ड की खरीद में भी गड़बड़ी का आरोप लगा है। कांग्रेस का कहना है कि बाजार में 60-70 हजार रुपये के बोर्ड को 1.10 लाख रुपये से अधिक कीमत पर खरीदा गया। टेंडर प्रक्रिया में तकनीकी शर्तों के दुरुपयोग से सीमित कंपनियों को फायदा पहुंचाने का दावा किया गया है।
टेंडर से बाहर कंपनी, फिर उसी का सामान सप्लाई
सबसे हैरान करने वाला आरोप यह है कि एक प्रमुख कंपनी (Acer) को टेंडर प्रक्रिया से अयोग्य घोषित किया गया, लेकिन अंत में उसी कंपनी के उपकरणों की सप्लाई की गई। कांग्रेस ने इसे टेंडर को महज औपचारिकता बताते हुए पहले से सेटिंग का आरोप लगाया है।
विंध कोठी बना विवाद का केंद्र
पूरे मामले में भोपाल की विंध कोठी (Vindhya Kothi) का नाम बार-बार सामने आ रहा है। कांग्रेस ने सवाल उठाया है कि ठेकेदारों की बैठकें यहां क्यों होती हैं और अश्विन नाटू जैसे व्यक्ति किस आधार पर टेंडर से जुड़े लोगों को बुलाते हैं। हर बड़े टेंडर में इस जगह का जिक्र आने से संगठित सिंडिकेट की आशंका जताई जा रही है।
2026 के नए टेंडर पर भी घोटाले की आशंका
कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि वर्तमान में इंटरएक्टिव बोर्ड की केंद्रीकृत खरीद के लिए जारी नए टेंडर में भी वही तकनीकी शर्तों का खेल दोहराया जा सकता है, जिससे कीमतें फिर से बढ़ाई जा सकती हैं।
SIT जांच, फॉरेंसिक ऑडिट और कार्रवाई की मांग
मुकेश नायक ने मुख्यमंत्री और सरकार से मांग की है कि पूरे मामले की उच्च स्तरीय SIT जांच कराई जाए। सभी भुगतानों का फॉरेंसिक ऑडिट हो और इसमें शामिल अधिकारियों तथा ठेकेदारों की भूमिका की जांच की जाए। कांग्रेस ने याद दिलाया कि इससे पहले जल संसाधन विभाग के टेंडरों में भी फर्जी बैंक गारंटी और अन्य गड़बड़ियों के आरोप लगे थे, लेकिन सरकार की ओर से कोई संतोषजनक कार्रवाई नहीं हुई। यह मामला प्रदेश की राजनीति में गरमा सकता है, जहां कांग्रेस इसे ‘शिक्षा माफिया सिंडिकेट’ करार दे रही है, जबकि सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
