MP Property and Water Tax: मध्यप्रदेश सरकार शहरी क्षेत्रों में प्रॉपर्टी टैक्स और वॉटर टैक्स की चोरी पर लगाम लगाने की तैयारी में है। फरवरी 2027 में होने वाली जनगणना के दौरान घर-घर विशेष सर्वे कराया जाएगा, जिसमें ऐसे मकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की पहचान की जाएगी जो टैक्स के दायरे में होने के बावजूद कर जमा नहीं कर रहे हैं। इस अभियान के तहत जल कनेक्शन, प्रॉपर्टी रिकॉर्ड और जीआईएस आधारित जानकारी का भी सत्यापन किया जाएगा, जिससे नगर निकायों का राजस्व बढ़ाने और रिकॉर्ड को अपडेट करने में मदद मिलेगी।
MP Property and Water Tax: मध्यप्रदेश में प्रॉपर्टी टैक्स (Property Tax) और वॉटर टैक्स (Water Tax) की चोरी रोकने के लिए राज्य सरकार बड़ा अभियान शुरू करने जा रही है। फरवरी 2027 में प्रस्तावित जनगणना के दौरान घर-घर सर्वे कराया जाएगा, जिसमें ऐसे मकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की पहचान की जाएगी जो टैक्स के दायरे में होने के बावजूद कर जमा नहीं कर रहे हैं।
जनगणना के साथ होगा विशेष सर्वे
नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने सभी कलेक्टरों, नगर निगम आयुक्तों, नगरपालिकाओं और नगर परिषदों के मुख्य नगर पालिका अधिकारियों (CMO) को इस अभियान की तैयारी शुरू करने के निर्देश दिए हैं। प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में करीब 55 लाख आवासीय और व्यावसायिक भवनों का रिकॉर्ड इस सर्वे के जरिए अपडेट किया जाएगा। साथ ही हाल के वर्षों में बने नए भवनों को भी सरकारी रिकॉर्ड में शामिल किया जाएगा।
जनगणना फॉर्म में जुड़ेंगे नए कॉलम
सरकार जनगणना प्रपत्र में संपत्ति कर और जलकर से जुड़े दो अतिरिक्त कॉलम जोड़ने का प्रस्ताव तैयार कर रही है। सर्वे के दौरान प्रगणक प्रत्येक भवन का भौतिक सत्यापन करेंगे और उसके स्वामित्व, उपयोग तथा वर्तमान स्थिति की जानकारी दर्ज करेंगे। जिन संपत्तियों का अब तक टैक्स रिकॉर्ड नहीं बना है, उन्हें भी नियमों के अनुसार कर दायरे में शामिल किया जाएगा।
जल कनेक्शन और टैक्स रिकॉर्ड की होगी जांच
सर्वे के दौरान यह भी देखा जाएगा कि संबंधित भवन में नगर निकाय का जल कनेक्शन मौजूद है या नहीं, वह चालू है या बंद और मीटर की वर्तमान स्थिति क्या है। इसके अलावा प्रॉपर्टी टैक्स और जलकर की आईडी लेकर नगर निकाय के रिकॉर्ड से उसका मिलान किया जाएगा, ताकि किसी भी तरह की गड़बड़ी सामने आने पर कार्रवाई की जा सके।
GIS आधारित रिकॉर्ड होंगे अपडेट
नगरीय विकास विभाग ने सभी शहरी भवनों के लिए यूनिक प्रॉपर्टी आईडी (UPID) तैयार करने और GIS आधारित रिकॉर्ड (GIS Mapping) को अपडेट करने के निर्देश दिए हैं। सत्यापन पूरा होने के बाद सभी जानकारियां ई-नगरपालिका पोर्टल पर अपलोड की जाएंगी, जिससे भविष्य में रिकॉर्ड का रखरखाव और निगरानी आसान हो सके।
नगर निकायों की आय बढ़ाने पर फोकस
सरकार का मानना है कि इस विशेष अभियान से टैक्स के दायरे से बाहर रह गई संपत्तियों की पहचान होगी। इससे प्रॉपर्टी टैक्स, जल उपभोक्ता शुल्क और अन्य नगर निकाय करों की वसूली बेहतर होगी। साथ ही टैक्स निर्धारण, जल बिल जारी करने और नागरिक सेवाओं के संचालन में पारदर्शिता आएगी तथा नगर निकायों के राजस्व में भी उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है।

