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MP: प्रदेश में पदोन्नति को लेकर हलचल तेज, हाईकोर्ट का फैसला अप्रैल में संभावित

MP Promotion Rules 2025 High Court Verdict: मध्य प्रदेश में लोक सेवा पदोन्नति नियम 2025 पर जबलपुर हाईकोर्ट का फैसला अप्रैल में संभावित बताया जा रहा था, लेकिन वर्तमान में सुनवाई फरवरी 2026 में पूरी हो चुकी है और निर्णय सुरक्षित रख लिया गया है, जिससे विभागों ने संवर्गवार रिक्त पदों की गणना सहित पदोन्नति की तैयारियां तेज कर दी हैं और 2016 से लंबित पड़ी पदोन्नति प्रक्रिया जल्द शुरू होने की मजबूत उम्मीद जगी है।

MP Promotion Rules 2025 High Court Verdict: मध्य प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों की लंबित पदोन्नति प्रक्रिया को लेकर महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। जबलपुर हाईकोर्ट में लोक सेवा पदोन्नति नियम 2025 को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई पूरी हो चुकी है और कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। सूत्रों के अनुसार अप्रैल में इस पर निर्णय आने की संभावना जताई जा रही है। फैसले की प्रतीक्षा में राज्य सरकार के सभी विभागों ने पदोन्नति की तैयारियां शुरू कर दी हैं। सामान्य प्रशासन विभाग के निर्देश पर हर विभाग ने संवर्गवार पदों की गणना पूरी कर ली है। कुल पदों से भरे हुए पद घटाकर रिक्त पदों की संख्या निर्धारित की गई है। जिन संवर्गों में अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) का आरक्षण कोटा पहले ही पूरा हो चुका है, वहां पदोन्नति नहीं की जाएगी।

सीआर से जुड़े प्रावधानों में बड़ा बदलाव

नए लोक सेवा पदोन्नति नियम 2025 में गोपनीय चरित्रावली (सीआर) संबंधी प्रावधानों में महत्वपूर्ण संशोधन किए गए हैं। अब विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक से पूर्व पिछले पांच वर्षों की सीआर के आधार पर पात्रता तय होगी। यदि इनमें से दो वर्षों की सीआर उपलब्ध नहीं है, तो उससे पहले के दो वर्षों की सीआर को शामिल किया जाएगा। यह पहली बार स्पष्ट किया गया है कि यदि किसी वर्ष की केवल छह माह की सीआर उपलब्ध है, तो उसे पूरे वर्ष का मूल्यांकन माना जाएगा। इससे पदोन्नति प्रक्रिया में होने वाली देरी को कम करने का प्रयास किया गया है।

2016 से बंद हैं पदोन्नतियां

गौरतलब है कि 2002 के पदोन्नति नियमों के निरस्त होने और सुप्रीम कोर्ट के यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश के बाद से वर्ष 2016 से राज्य में पदोन्नतियां पूरी तरह बंद हैं। बीच-बीच में सरकार ने समाधान के प्रयास किए, लेकिन सफलता नहीं मिली। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में नए नियम 2025 लागू किए गए, हालांकि इनके कुछ प्रावधानों को लेकर सामान्य वर्ग के कर्मचारियों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी है।

मेरिट और आरक्षण में संतुलन

नियमों में स्पष्ट किया गया है कि यदि आरक्षित वर्ग के अधिकारी मेरिट में अनारक्षित वर्ग से ऊपर आते हैं, तो उन्हें पदोन्नति का लाभ मिलेगा, लेकिन ऐसा पद आरक्षण कोटे में ही गिना जाएगा। एक बार अनारक्षित श्रेणी में आ जाने के बाद अधिकारी को मूल आरक्षित श्रेणी में वापस लौटने का अवसर नहीं मिलेगा।

सीआर लिखने की समय-सारिणी जारी

सामान्य प्रशासन विभाग ने वर्ष 2025-26 के लिए गोपनीय चरित्रावली (सीआर) तैयार करने की विस्तृत समय-सारिणी जारी कर दी है, जिसके अनुसार 30 अप्रैल तक सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को स्व-मूल्यांकन फॉर्म उपलब्ध कराए जाएंगे, 30 जून तक कर्मचारियों को अपना स्व-मूल्यांकन जमा करना होगा, जबकि इसके बाद प्रतिवेदक अधिकारी 31 अगस्त तक, समीक्षक अधिकारी 30 सितंबर तक और स्वीकारकर्ता अधिकारी 30 नवंबर तक अपने-अपने स्तर पर मतांकन पूरा कर सीआर अंतिम रूप से तैयार करेंगे।

अप्रैल के फैसले पर टिकीं सारी निगाहें

अब सभी की नजरें हाईकोर्ट के अप्रैल में संभावित फैसले पर टिकी हैं। यदि नियमों को कोर्ट से मंजूरी मिलती है, तो लगभग एक दशक से रुकी पदोन्नति प्रक्रिया तेज हो सकती है। इससे हजारों अधिकारियों और कर्मचारियों को लंबे इंतजार के बाद राहत मिलने की उम्मीद जगी है।

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