MP New Transfer Policy 2026: मध्यप्रदेश में नई तबादला नीति 2026 जल्द लागू होने की संभावना है। मोहन यादव सरकार एक महीने के लिए तबादलों पर लगी रोक हटाने जा रही है। सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) ने इस संबंध में ड्राफ्ट तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिसे अप्रैल के अंत तक कैबिनेट के समक्ष पेश किया जा सकता है।
MP New Transfer Policy 2026: मध्यप्रदेश सरकार वर्ष 2026 के लिए नई तबादला नीति लागू करने की तैयारी में जुट गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के संकेतों के बाद सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) ने नीति का ड्राफ्ट तैयार करना शुरू कर दिया है। सूत्रों के अनुसार, इस ड्राफ्ट को अप्रैल के अंत तक कैबिनेट के सामने रखा जा सकता है।
कैडर के 10 प्रतिशत से अधिक नहीं होंगे तबादले
सरकार हर साल की भांति इस बार भी तबादलों पर लगी रोक को सीमित अवधि के लिए हटाने जा रही है। प्रस्तावित नीति के मुताबिक, करीब एक महीने की विंडो खोली जाएगी, जिसमें विभिन्न विभागों में कर्मचारियों के तबादले किए जा सकेंगे। अनियंत्रित तबादलों को रोकने के लिए सख्त प्रावधान रखा गया है। किसी भी विभाग में कुल तबादले उसके कैडर के 10 प्रतिशत से अधिक नहीं होंगे।
प्रभारी मंत्रियों तबादले का अधिकार
इस बार की तबादला नीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव प्रभारी मंत्रियों की भूमिका को लेकर किया जा सकता है। सूत्र बताते हैं कि मंत्रियों को अपने जिलों में तबादलों पर पहले की तरह अधिकार दिए जा सकते हैं। उनकी स्वीकृति के बिना तबादला सूची को अंतिम रूप नहीं दिया जाएगा। इससे जिला स्तर पर राजनीतिक और प्रशासनिक समन्वय मजबूत होने की उम्मीद है।
चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों के तबादले पहले कलेक्टर स्तर पर
स्थानीय स्तर पर कलेक्टर की भूमिका भी अहम रहेगी। तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों के तबादले पहले कलेक्टर स्तर पर प्रस्तावित किए जाएंगे, जिसके बाद आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। पिछले साल अपेक्षाकृत कम तबादले होने के कारण इस बार कर्मचारियों में काफी उम्मीदें बढ़ गई हैं। लंबे समय से एक ही स्थान पर तैनात अधिकारियों और कर्मचारियों को नई नीति से राहत मिलने की संभावना है। विभिन्न बैठकें में जनप्रतिनिधियों ने भी तबादला प्रतिबंध हटाने की मांग की थी, जिससे साफ है कि इस बार प्रक्रिया ज्यादा सक्रिय रहने वाली है।
कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद मई की शुरुआत से तबादलों का दौर शुरू होने के आसार हैं। सरकार का प्रयास है कि तबादले पारदर्शी और जरूरत आधारित तरीके से हों, ताकि प्रशासनिक दक्षता बनी रहे और कर्मचारियों को भी उचित राहत मिल सके।

