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MP: नगर निकाय चुनाव में बदलाव, पार्षद से महापौर तक, अब छुपेगा नहीं कुछ भी

mp nagar nikay chunav

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MP Municipal Body Election Changes: अब महापौर, नगरपालिका एवं नगर परिषद अध्यक्ष और पार्षद पद के हर उम्मीदवार को लोकसभा-विधानसभा प्रत्याशियों की तरह ही विस्तृत शपथ-पत्र देना होगा। चुनावी खर्च पर भी पूरी निगरानी रहेगी। उम्मीदवार को रोजाना का खर्च आयोग को जमा करना होगा और अलग से खर्च रजिस्टर रखना अनिवार्य होगा।

MP Municipal Body Election Changes: राज्य निर्वाचन आयोग ने स्थानीय निकाय चुनावों को पूरी तरह पारदर्शी बनाने का बड़ा फैसला लिया है। अब महापौर, नगरपालिका एवं नगर परिषद अध्यक्ष और पार्षद पद के हर उम्मीदवार को लोकसभा-विधानसभा प्रत्याशियों की तरह ही विस्तृत शपथ-पत्र देना होगा। यदि कोई जानकारी छुपाई या गलत दी गई तो रिटर्निंग अधिकारी नामांकन तुरंत रद्द कर देगा।

शौचालय की स्थिति तक लिखित में बतानी होगी

नई अधिसूचना के अनुसार उम्मीदवार को खुद, पति या पत्नी और तीन आश्रित बच्चों की आय, आय के स्रोत, भरा हुआ टैक्स, चल-अचल संपत्ति (व्यक्तिगत एवं संयुक्त दोनों), शेयर-निवेश, लिया-दिया कर्ज, सरकारी बकाया, सोशल मीडिया अकाउंट, ई-मेल, मोबाइल नंबर और यहां तक कि घर में फ्लश या जलवाहित शौचालय की स्थिति तक लिखित में बतानी होगी।

चुनावी खर्च पर पूरी निगरानी रहेगी

सबसे सख्त प्रावधान आपराधिक रिकॉर्ड को लेकर है। दो साल या उससे अधिक सजा वाले हर मुकदमे की पूरी डिटेल एफआईआर नंबर, थाना, जिला और कोर्ट में चल रहे केस शपथ-पत्र में देनी होगी।

चुनावी खर्च पर भी पूरी निगरानी रहेगी। उम्मीदवार को रोजाना का खर्च आयोग को जमा करना होगा और अलग से खर्च रजिस्टर रखना अनिवार्य होगा। चुनाव खत्म होने के 30 दिन के अंदर पूरा हिसाब देना होगा। कोई भी व्यक्ति मात्र 10 रुपये की फीस देकर किसी भी उम्मीदवार का खर्च रजिस्टर देख सकेगा। नगरीय विकास विभाग के साथ मिलकर महापौर, अध्यक्ष और पार्षद पद के लिए खर्च की अधिकतम सीमा भी जल्द तय की जाएगी।

तत्काल प्रभाव से लागू हुई अधिसूचना

राज्य निर्वाचन आयोग के सचिव दीपक सिंह द्वारा जारी यह अधिसूचना तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है। ये नियम 2027 में होने वाले प्रदेश के 90 प्रतिशत से अधिक नगर निकायों के आम चुनाव और बीच में होने वाले सभी पार्षद उप-चुनावों पर लागू होंगे। 2022 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हुए पिछले चुनावों के बाद अब ये सबसे बड़े सुधार माने जा रहे हैं, जिससे स्थानीय निकाय चुनावों में पारदर्शिता और जवाबदेही का नया दौर शुरू होगा।

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