MP Today Weather: मध्य प्रदेश में एक साथ तीन मौसम प्रणालियां सक्रिय होने से मानसून ने फिर रफ्तार पकड़ ली है। इसका सबसे ज्यादा असर मालवा-निमाड़ समेत कई जिलों में देखने को मिल रहा है। मौसम विभाग ने गुरुवार को 17 जिलों में भारी से अति भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। हालांकि, लगातार हो रही बारिश के बावजूद प्रदेश में अब तक सामान्य से 16 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज हुई है और 47 जिले अभी भी औसत बारिश के आंकड़े से पीछे चल रहे हैं।
MP Today Weather: मध्य प्रदेश में मानसून ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ ली है। प्रदेश के ऊपर एक साथ तीन अलग-अलग मौसम प्रणालियों (Weather Systems) के सक्रिय होने से बारिश का दौर तेज होने की संभावना है। मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले कुछ दिनों तक कई जिलों में अच्छी बारिश देखने को मिलेगी, जबकि मालवा-निमाड़ क्षेत्र (Malwa-Nimar Region) सबसे अधिक प्रभावित हो सकता है।
17 जिलों के लिए भारी बारिश की चेतावनी
भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने गुरुवार के लिए प्रदेश के 17 जिलों में भारी से अति भारी बारिश (Heavy to Very Heavy Rain) की चेतावनी जारी की है। विभाग के अनुसार कुछ इलाकों में अगले 24 घंटे के भीतर चार इंच से अधिक वर्षा दर्ज की जा सकती है, जिससे निचले क्षेत्रों में जलभराव और नदी-नालों का जलस्तर बढ़ने की आशंका है।
इन पांच जिलों में ऑरेंज अलर्ट
धार, देवास, बुरहानपुर, हरदा और नर्मदापुरम जिलों में अति भारी बारिश की संभावना को देखते हुए ऑरेंज अलर्ट (Orange Alert) जारी किया गया है। इसके अलावा उज्जैन, शाजापुर, सीहोर, बड़वानी, खरगोन, खंडवा, रायसेन, सागर, बैतूल, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा और सिवनी में भारी बारिश (Rain Forecast) होने का अनुमान है। वहीं भोपाल, इंदौर, झाबुआ, आलीराजपुर, नीमच, मंदसौर, रतलाम और आगर-मालवा सहित कई अन्य जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश का सिलसिला जारी रह सकता है।
2 अगस्त तक बना रहेगा बारिश का दौर
मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक प्रदेश में सक्रिय मौसम प्रणालियों का असर 2 अगस्त तक बना रह सकता है। इस दौरान कई जिलों में तेज बारिश (Weather Update) के साथ कुछ स्थानों पर अति भारी वर्षा भी हो सकती है। विशेष रूप से मालवा-निमाड़ और उससे जुड़े इलाकों में मौसम ज्यादा प्रभावी रहने की संभावना है।
एक दिन की बारिश से कई इलाकों में बढ़ी मुश्किलें
बुधवार को बालाघाट, रतलाम, पचमढ़ी, भोपाल और ग्वालियर सहित कई जिलों में अच्छी बारिश दर्ज की गई। बालाघाट में तेज वर्षा के कारण नदी-नाले उफान पर आ गए, जबकि बैहर-परसवाड़ा मार्ग पर पेड़ गिरने से यातायात प्रभावित हुआ। कई ग्रामीण इलाकों में सड़कों पर पानी भरने से लोगों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ा।
सामान्य बारिश से अब भी पीछे है मध्य प्रदेश
लगातार बारिश के बावजूद प्रदेश अभी भी सामान्य मानसूनी वर्षा (Rainfall Deficit) के आंकड़े से पीछे चल रहा है। अब तक औसतन 14.1 इंच बारिश रिकॉर्ड की गई है, जबकि इस समय तक करीब 16.9 इंच वर्षा हो जानी चाहिए थी। यानी प्रदेश में लगभग 2.8 इंच यानी 16 प्रतिशत बारिश की कमी बनी हुई है। पूर्वी मध्य प्रदेश में वर्षा सामान्य से 15 प्रतिशत कम दर्ज की गई है, जबकि पश्चिमी हिस्से में यह कमी 17 प्रतिशत तक पहुंच गई है। मौसम विभाग का मानना है कि यदि अगले कुछ दिनों तक तेज बारिश जारी रहती है तो यह अंतर काफी हद तक कम हो सकता है।
47 जिलों में सामान्य से कम बारिश
प्रदेश के 47 जिलों में अब तक सामान्य से कम बारिश दर्ज हुई है। इनमें उज्जैन, सागर, धार, खरगोन, खंडवा, रतलाम, बैतूल, ग्वालियर, गुना, नर्मदापुरम, जबलपुर, सिवनी, मंडला, रीवा, सतना और शहडोल जैसे जिले शामिल हैं। वहीं भोपाल, भिंड, बुरहानपुर, देवास, इंदौर, मंदसौर, राजगढ़ और सीहोर में सामान्य से अधिक बारिश रिकॉर्ड की गई है। सबसे ज्यादा बढ़त देवास में देखने को मिली, जहां सामान्य से करीब 29 प्रतिशत अधिक वर्षा हो चुकी है।
जुलाई की बारिश से पूरी नहीं हो सकी जून की भरपाई
जून में कमजोर मानसून के बाद जुलाई की शुरुआत में बारिश ने रफ्तार पकड़ी थी, लेकिन पिछले कुछ दिनों में वर्षा की गतिविधियां कमजोर पड़ने से प्रदेश फिर सामान्य आंकड़े से नीचे पहुंच गया। मौसम विभाग का कहना है कि पूरे मानसून सीजन में जुलाई की बारिश सबसे अहम मानी जाती है। ऐसे में महीने के आखिरी दिनों में होने वाली तेज बारिश प्रदेश के कुल मानसूनी आंकड़ों को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
प्रदेश में सामान्य मानसूनी बारिश कितनी?
मध्य प्रदेश में पूरे मानसून सीजन के दौरान सामान्य वर्षा 37.3 इंच मानी जाती है। वहीं भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर जैसे प्रमुख शहरों में सामान्य मानसूनी बारिश 38 से 39 इंच के बीच रहती है। यदि आने वाले दिनों में अनुमान के अनुसार तेज बारिश होती है तो प्रदेश का मौजूदा बारिश घाटा काफी हद तक कम हो सकता है।

