Colonel Sophia Controversy: सुप्रीम कोर्ट ने कर्नल सोफिया कुरैशी पर विवादित टिप्पणी के मामले में मध्य प्रदेश सरकार और मंत्री विजय शाह के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने राज्य सरकार को स्पष्ट आदेश दिया है कि मंत्री शाह के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई में अब कोई देरी न की जाए और अभियोजन मंजूरी (Prosecution Sanction) को लेकर अपनी स्थिति तुरंत स्पष्ट करे।
Colonel Sophia Controversy: मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार के मंत्री कुंवर विजय शाह एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गए हैं। ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) की पहली वर्षगांठ पर सुप्रीम कोर्ट ने उनकी आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर मध्य प्रदेश सरकार से जवाब मांगा है। कोर्ट ने अभियोजन की मंजूरी में हो रही देरी पर नाराजगी जताते हुए सख्त रुख अपनाया है।सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने सुनवाई के दौरान साफ कहा, “अब हमारे आदेश का पालन कीजिए… बहुत हो गया। ” कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि मंत्री को सबसे पहले माफी मांगनी चाहिए थी।
मंत्री की विवादित टिप्पणी पर कोर्ट की नाराजगी
22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम स्थित बैसरन घाटी में आतंकी हमले के बाद भारत ने 7 मई 2025 को POK (Pakistan Occupied Kashmir) में आतंकी ठिकानों पर ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) लॉन्च किया था। इस अभियान की जानकारी मीडिया को देने वाली सैन्य अधिकारियों में शामिल कर्नल सोफिया कुरैशी (Colonel Sophia Qureshi) पर मंत्री विजय शाह ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम में आपत्तिजनक टिप्पणी कर दी थी।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए इसे सेना और महिला अधिकारी का अपमान बताया था। इसके बाद पुलिस ने मंत्री शाह के खिलाफ BNS की धारा 152, 196(1)(b) और 197(1)(c) के तहत मामला दर्ज किया है। ये धाराएं देश की संप्रभुता को खतरे में डालने और समुदायों के बीच शत्रुता फैलाने से जुड़ी हैं।
सॉलिसिटर जनरल की दलील, कोर्ट ने किया खारिज
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता (Solicitor General Tushar Mehta) ने कहा कि मंत्री कर्नल सोफिया की तारीफ करना चाहते थे, लेकिन अपनी बात सही ढंग से नहीं रख पाए। इस दलील पर जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने नाराजगी व्यक्त की। कोर्ट ने कहा, “यह बयान सिर्फ दुर्भाग्यपूर्ण नहीं, बल्कि बेहद दुर्भाग्यपूर्ण था।” बेंच ने स्पष्ट किया कि मामले में कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए और SIT (Special Investigation Team) द्वारा अभियोजन की मंजूरी मांगे जाने के बाद सरकार को तुरंत फैसला ले लेना चाहिए था।

