MP High Court Slams Police Arbitrariness: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने पुलिस की मनमानी पर कड़ी नाराजगी जताई है। जस्टिस जय कुमार पिल्लई की एकलपीठ ने बिना किसी ठोस आधार या उचित प्रक्रिया के इंदौर के व्यवसायी राजेंद्र भावसार से उनके कारोबार से जुड़े दस्तावेज तलब करने पर सख्त रुख अपनाया और पुलिस को साफ हिदायत दी कि वह कानून के दायरे में रहकर ही कार्यवाही करे, अन्यथा किसी भी नागरिक को बिना कारण परेशान नहीं किया जा सकता।
MP High Court Slams Police Arbitrariness: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने पुलिस की मनमानी पर गहरी नाराजगी जताते हुए सख्त निर्देश जारी किए हैं। जस्टिस जय कुमार पिल्लई की एकलपीठ ने एक व्यवसायी की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि पुलिस बिना ठोस आधार और उचित प्रक्रिया के किसी भी व्यक्ति को परेशान नहीं कर सकती। कोर्ट ने पुलिस को स्पष्ट आदेश दिया कि आगे से कानून के दायरे में रहकर ही कार्यवाही की जाए।
याचिकाकर्ता पर पुलिस का दबाव
एरोड्रम रोड स्थित विजयलक्ष्मी नगर, इंदौर के निवासी व्यवसायी राजेंद्र भावसार ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका में उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें कभी किसी अदालत की कार्रवाई या नोटिस की सूचना नहीं दी गई, फिर भी पुलिस द्वारा उन्हें बार-बार परेशान किया जा रहा है। सदर बाजार थाने के टीआई ने 9 मार्च को उन्हें एक नोटिस जारी किया था, जिसमें उनके कारोबार और संपत्ति से जुड़े दस्तावेज तलब किए गए थे। याचिका में उनका नाम गलती से राजेश भावसार के रूप में दर्ज था, जिसे सुधारने के लिए उन्होंने अलग से आवेदन दिया था। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता का नाम राजेंद्र भावसार करते हुए सुधार कर लिया।
कोर्ट के प्रमुख निर्देश
- पुलिस को याचिकाकर्ता के खिलाफ दर्ज शिकायत का पूरा विवरण, जिसमें शिकायतकर्ता का नाम और शिकायत की पूरी जानकारी शामिल हो, नए नोटिस में स्पष्ट रूप से उल्लेख करना होगा।
- याचिकाकर्ता को यह अधिकार है कि वह जान सके उनके खिलाफ क्या आरोप हैं, ताकि वे उचित दस्तावेज प्रस्तुत कर सकें या अपना पक्ष रख सकें।
- पुलिस केवल उसी शिकायत से सीधे संबंधित दस्तावेज ही मांग सकती है। बिना कारण के किसी भी व्यक्ति को परेशान करना अस्वीकार्य है।
- कोर्ट ने पुलिस को सख्त हिदायत दी कि आगे से किसी भी व्यक्ति को झूठे आरोपों या बिना ठोस आधार के तंग न किया जाए।
पुलिस का काम कानून का पालन कराना है
जस्टिस पिल्लई ने कहा, “पुलिस का काम कानून का पालन कराना है, न कि मनमानी करना। हर नागरिक को अपने खिलाफ लगे आरोपों की जानकारी का हक है और बिना उचित प्रक्रिया के दस्तावेज तलब नहीं किए जा सकते।” कोर्ट ने पुलिस को नए सिरे से नोटिस जारी करने और नियमों का पालन करने का आदेश दिया है। इस फैसले से पुलिस की जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की उम्मीद जताई जा रही है।
