MLA Sanjay Pathak Contempt: 1 सितंबर 2025 को न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा ने स्वयं खुलासा किया कि विजयराघवगढ़ से भाजपा विधायक संजय पाठक ने उनसे संपर्क साधने की कोशिश की थी। हाई कोर्ट जज से संपर्क करने के इस गंभीर आरोप के बीच न्यायमूर्ति मिश्रा ने निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से मामले की सुनवाई से स्वयं को अलग कर लिया था। बाद में उन्होंने इस पूरे प्रकरण को प्रशासनिक स्तर पर मुख्य न्यायाधीश के समक्ष भेज दिया।
MLA Sanjay Pathak Contempt: मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने विजयराघवगढ़ (कटनी) से भाजपा विधायक संजय सत्येंद्र पाठक के खिलाफ आपराधिक अवमानना का प्रकरण दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा और न्यायमूर्ति विनय सराफ की युगलपीठ ने गुरुवार को इस संबंध में दायर याचिका का निराकरण करते हुए रजिस्ट्री को स्वत: संज्ञान आधारित अवमानना प्रकरण दर्ज करने का आदेश दिया। प्रकरण 6 अप्रैल 2026 को कोर्ट के समक्ष सूचीबद्ध किया जाएगा।
याचिका कटनी निवासी आशुतोष दीक्षित ने दायर की थी। इसमें आरोप लगाया गया था कि विधायक संजय पाठक ने पाठक परिवार से जुड़ी खदानों के अवैध उत्खनन से संबंधित मामले में न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा से संपर्क करने की कोशिश की। याचिकाकर्ता का कहना था कि यह न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास है।
1 सितंबर 2025 को न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा ने खुद इस बात का खुलासा किया था कि विधायक ने उनसे फोन पर संपर्क करने की कोशिश की। निष्पक्षता बनाए रखने के लिए उन्होंने मामले की सुनवाई से स्वयं को अलग कर लिया और पूरे प्रकरण को प्रशासनिक स्तर पर मुख्य न्यायाधीश के समक्ष भेजने का निर्देश दिया था।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अरविंद श्रीवास्तव और पुनीत श्रोती उपस्थित हुए। विधायक संजय पाठक की ओर से उपस्थित अधिवक्ता ने कोर्ट के आदेश पर आपत्ति जताई, जिसे युगलपीठ ने खारिज कर दिया। यह मामला पाठक परिवार की कंपनियों से जुड़े अवैध खनन के आरोपों से संबंधित है। न्यायालय ने न्यायिक स्वतंत्रता और निष्पक्षता बनाए रखने के लिए सख्त रुख अपनाते हुए स्वत: संज्ञान लिया है।

