MP High Court News: जल जीवन मिशन के तहत जारी कार्यक्षमता मूल्यांकन रिपोर्ट (जनवरी 2026) में खुलासा हुआ है कि मध्य प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल के 36.7% नमूने असुरक्षित पाए गए, जिनमें बैक्टीरिया या रासायनिक प्रदूषण मौजूद था। यह रिपोर्ट 2024 के सितंबर-अक्टूबर में 15,000+ ग्रामीण घरों से लिए गए सैंपलों पर आधारित है, जहां राज्य का केवल 63.3% सैंपल गुणवत्ता मानकों पर खरा उतरा
MP High Court News: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने नर्मदा नदी में प्रतिदिन 98 करोड़ लीटर अनुपचारित सीवेज बहाए जाने के मामले को गंभीरता से लिया है। मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा और न्यायमूर्ति विनय सराफ की युगलपीठ ने इस जनहित याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई के बाद संबंधित विभागों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
हाई कोर्ट ने जारी किए नोटिस, कई विभागों से मांगा जवाब
जबलपुर हाई कोर्ट की युगलपीठ ने लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के प्रमुख सचिव, नगरीय विकास एवं आवास विभाग के सचिव, जबलपुर नगर निगम, मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण मंडल और नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने इन सभी को याचिका पर अपना जवाब पेश करने का निर्देश दिया है। साथ ही, इस नई जनहित याचिका को पहले से लंबित संबंधित जनहित याचिका के साथ जोड़कर सुनवाई करने की व्यवस्था की गई है।
याचिकाकर्ता ने उठाए गंभीर मुद्दे
जनहित याचिका जबलपुर निवासी विनीता अहूजा की ओर से दायर की गई है, जिसका पक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता आदित्य संघी ने कोर्ट में रखा। याचिका में दावा किया गया है कि जबलपुर शहर से प्रतिदिन लगभग 98 करोड़ लीटर (98 मिलियन लीटर या 98 MLD) अनुपचारित सीवेज सीधे नर्मदा नदी में बहाया जा रहा है। इस दूषित पानी के कारण नदी में हानिकारक बैक्टीरिया, खासकर फीकल कोलीफॉर्म (Fecal Coliform) की मौजूदगी पाई गई है। ये बैक्टीरिया मानव और पशु मल-मूत्र से आते हैं, जो बिना किसी उपचार के नदी में प्रवाहित हो रहे हैं।
याचिकाकर्ता ने आगे बताया कि नर्मदा नदी में न केवल नगरपालिका का अनुपचारित सीवेज, बल्कि नगरपालिका अपशिष्ट और कुछ औद्योगिक अपशिष्ट भी मिल रहे हैं। नर्मदा एक प्रमुख नदी होने के नाते बड़ी आबादी के लिए पेयजल का मुख्य स्रोत है। इसका प्रदूषण जन स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रहा है और पर्यावरणीय संतुलन को बुरी तरह प्रभावित कर रहा है।
जल गुणवत्ता पर चिंताजनक आंकड़े
विशेषज्ञों के शोध और रिपोर्ट्स के अनुसार, जबलपुर क्षेत्र में नर्मदा और इसकी सहायक नदियों (जैसे परियट) का पानी अक्सर क्षारीय (उच्च pH स्तर) पाया जाता है, जो आदर्श सीमा 8.5 से अधिक हो जाता है। जल जीवन मिशन के आकलन वाली एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि मध्य प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल के 36.7 प्रतिशत नमूने असुरक्षित और पीने योग्य नहीं पाए गए।हाल ही में इंदौर में दूषित पेयजल के कारण डायरिया के प्रकोप से करीब 30 लोगों की मौत हुई और कई लोग अस्पताल में भर्ती हुए, जिससे जल प्रदूषण का संकट और गहरा गया है।
याचिका में मुख्य मांगें
याचिका में हाईकोर्ट से मांग की गई है कि नर्मदा नदी के प्रदूषण को तत्काल रोका जाए, जिसमें अपशिष्ट का उचित उपचार सुनिश्चित करना, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स की क्षमता बढ़ाकर उनका प्रभावी संचालन सुनिश्चित करना, जन स्वास्थ्य की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाना तथा नदी की पारिस्थितिक अखंडता को बहाल करना शामिल है। कोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है, जिसके आधार पर अगली सुनवाई में आगे के निर्देश जारी किए जा सकते हैं।

