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MP: हाईकोर्ट का बड़ा फैसला,10 साल से अधिक सेवा वाले संविदा कर्मियों को मिलेगा स्थायी कर्मचारी वाला लाभ

MP High Court News: हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति विशाल धगट की एकलपीठ ने मध्य प्रदेश में 10 वर्ष से अधिक समय से निरंतर कार्यरत संविदा, आउटसोर्स और अंशकालिक कर्मचारियों को बड़ी राहत देते हुए महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि 10 साल या उससे अधिक सेवा देने वाले ये कर्मचारी राज्य सरकार की 2016 की वर्गीकरण नीति के तहत नियमितीकरण और परिणामी लाभों के हकदार हैं तथा उन्हें उनके पद के अनुरूप न्यूनतम वेतनमान का भुगतान किया जाना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि ऐसे कर्मचारी आर्थिक न्याय और सभ्य जीवन स्तर के हकदार हैं।

MP High Court News: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने लंबे समय से संविदा पर काम कर रहे कर्मचारियों को बड़ी राहत दी है। न्यायमूर्ति विशाल धगट की एकलपीठ ने कहा कि अनुबंध, आउटसोर्स और अंशकालिक आधार पर लगे कर्मचारी यदि लगातार 10 वर्ष या उससे अधिक समय से राज्य सरकार के विभिन्न विभागों में निरंतर कार्यरत हैं, तो वे 2016 की वर्गीकरण नीति के तहत लाभ के हकदार हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ऐसे कर्मचारियों को उनके पद के अनुरूप न्यूनतम वेतन का भुगतान किया जाना चाहिए। साथ ही कोर्ट ने टिप्पणी की कि ये कर्मचारी आर्थिक न्याय और सभ्य जीवन स्तर के हकदार हैं।

याचिकाओं पर सुनवाई

विभिन्न विभागों में वर्षों से सेवाएं दे रहे संविदा कर्मचारियों ने जबलपुर सहित प्रदेश के अन्य स्थानों से हाईकोर्ट में याचिकाएं दायर की थीं। याचिकाकर्ताओं ने बताया कि उन्हें 7 जुलाई 2009 के आदेश के अनुसार अनुबंध आधार पर नियुक्त किया गया था और 30 जुलाई 2009 को उनके नियुक्ति आदेश जारी हुए थे। उसके बाद से उनकी सेवाएं निरंतर जारी हैं। कर्मचारियों ने दलील दी कि राज्य सरकार ने संविदा कर्मचारियों को स्थायी रूप में वर्गीकृत करने और उनके पद के अनुसार न्यूनतम वेतनमान देने की नीति बनाई है। ऐसे में उन्हें भी इस नीति का लाभ मिलना चाहिए।

संवैधानिक प्रावधानों का हवाला

याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि नियमितीकरण और वर्गीकरण में भेदभाव किया जा रहा है, जो संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन है। सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति विशाल धगट ने माना कि 10 वर्ष से अधिक निरंतर सेवा देने वाले ‘संविदा’, ‘आउटसोर्स’ और ‘अंशकालिक’ कर्मचारियों को 2016 की नीति के दायरे से बाहर रखने का कोई तर्कसंगत आधार नहीं है। कोर्ट ने आदेश दिया कि संबंधित अधिकारियों को याचिकाकर्ताओं को 2016 की नीति (सर्कुलर दिनांक 07.10.2016) के तहत वर्गीकृत करना होगा और सभी परिणामी लाभ प्रदान करने होंगे।

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