भोपाल। मध्यप्रदेश में टैक्स को लेकर बड़ा बदलाव होने की संभावना है, क्योकि सरकार प्रदेश के सभी नगरीय क्षेत्रों में बेटरमेंट टैक्स लागू करने पर विचार कर रही है। कर को लेकर अगर यह व्यवस्था लागू हो जाती है तो इसमें प्रॉपर्टी की कीमत के हिसाब से टैक्स देना होगा और इसे एक साथ ही जमा करना होगा यानि की सरकार जिस क्षेत्र में जितना काम करेगी और उस विकास के आधार पर आपके प्रापर्टी का जितना रेट बढ़ेगा, उसी आधार पर उसे टैक्स तय किया जाएगा।
जाने क्या है बेटरमेंट टैक्स
नगर निगम या सरकारी निकायों द्वारा वसूला जाने वाला एक कर है, जो किसी सार्वजनिक विकास परियोजना (जैसे- सड़क, मेट्रो, पुल, सीवरेज) के कारण आस-पास की जमीन या प्रॉपर्टी की कीमत में हुई वृद्धि के बाद संपत्ति मालिक से लिया जाता है। यह एक बार लगने वाला टैक्स है, जो बढ़ी हुई संपत्ति वैल्यू का कुछ प्रतिशत होता है।
सरकार ऐसे तय करेगी टैक्स
सरकार पहले नगरीय निकायों के जरिए अलग-अलग इलाकों में विकास के कार्य जैसे नई और चौड़ी सड़के, ब्रिज आदी बनवाने जैसे काम करेंगी। यह बनने के बाद वहां आस-पास की प्रापर्टी के दाम बढ़ेंगे। इसके बाद फिर इस बात का आकलन किया जाएगा कि किस जगह पर विकास कार्य कराने से वहां जमीन के प्रापर्टी के रेट कितने बढ़े। इसी के आधार पर प्रॉपर्टी के मालिक को फिक्स टैक्स देना होगा।
बेटरमेंट टैक्स के मुख्य बिंदु
उद्देश्य- सरकारी खर्च पर हुए विकास कार्य से हुए निजी फायदे के बदले टैक्स वसूलना।
कब लगता है- जब नई सड़कों, मेट्रो, या बेहतर बुनियादी ढांचे से आपकी जमीन की कीमत बढ़ती है।
टैक्स का आधार- विकास के पहले और बाद में जमीन की कीमत का मूल्यांकन करके लिया जाता है।
प्रकृति- यह एक एकमुश्त शुल्क है।
उदाहरण- इंदौर और भोपाल में मेट्रो या सड़कों के विकास के दौरान ऐसा कर लागू किया गया है।
