MP Wheat Purchase PP Bags Crisis: मध्यप्रदेश में इस साल गेहूं की सरकारी खरीदी की तैयारियों के बीच पॉलीप्रोपाइलीन (पीपी) बैगों की कमी एक बड़ी चुनौती बन गई है, क्योंकि पेट्रोलियम उत्पादों से बने इन बैगों का उत्पादन अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों (विशेषकर युद्ध के असर) से प्रभावित हो रहा है, जिसके चलते भंडारण व्यवस्था में दिक्कत आ रही है और सरकार को पहले निर्धारित 16 मार्च की बजाय अब खरीदी 1 अप्रैल से शुरू करने का फैसला करना पड़ा है।
MP Wheat Purchase PP Bags Crisis: प्रदेश में इस साल रबी विपणन सीजन के दौरान गेहूं की सरकारी खरीदी को लेकर नई चुनौती सामने आई है। पॉलीप्रोपाइलीन (पीपी) बैगों की भारी कमी के कारण खरीदी और भंडारण की व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईरान-इजरायल-अमेरिका युद्ध के कारण पेट्रोलियम उत्पादों की सप्लाई बाधित होने से पीपी बैगों का उत्पादन प्रभावित हुआ है, जिसका सीधा असर अनाज भंडारण पर पड़ रहा है।
खरीदी की तारीख आगे बढ़ी
सूत्रों के अनुसार, पहले गेहूं की खरीदी 16 मार्च से शुरू होने वाली थी, लेकिन बैगों की कमी को देखते हुए सरकार ने इसे 1 अप्रैल तक टाल दिया है। अधिकारियों का कहना है कि खरीदी शुरू होने से पहले पर्याप्त मात्रा में बैगों की व्यवस्था अनिवार्य है। यदि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां नहीं सुधरीं तो समस्या और गंभीर हो सकती है। सरकार कुछ स्टॉक में उपलब्ध बैगों का उपयोग कर रही है, लेकिन बड़े पैमाने पर खरीदी के लिए वैकल्पिक इंतजामों पर विचार किया जा रहा है।
12 लाख किसानों का पंजीयन, 100 लाख टन खरीद की उम्मीद
इस साल प्रदेश में गेहूं का उत्पादन अच्छा होने का अनुमान है। लगभग 12 लाख किसानों ने समर्थन मूल्य पर गेहूं बेचने के लिए पंजीयन कराया है। सरकार को करीब 100 लाख टन (10 मिलियन टन) तक खरीदी का लक्ष्य हासिल होने की उम्मीद है। अच्छी पैदावार के बावजूद बैगों की कमी से भंडारण में दिक्कत आ सकती है, जिससे किसानों को परेशानी हो सकती है।
सरकार का दावा: घरेलू गैस में कोई कमी नहीं
ईरान युद्ध के असर से पेट्रोलियम उत्पादों पर दबाव बढ़ने के साथ ही देश में एलपीजी (एलपीजी) की सप्लाई भी प्रभावित हुई है। कई राज्यों में कमर्शियल गैस की सप्लाई पर रोक लगाई गई है, जिससे होटल-रेस्तरां क्षेत्र प्रभावित हो रहा है। हालांकि, केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि घरेलू रसोई गैस (एलपीजी सिलेंडर) में किसी तरह की कमी नहीं है। कंपनियों के पास पर्याप्त स्टॉक है और धीरे-धीरे सप्लाई सामान्य होने की उम्मीद है। रिफाइनरियों को घरेलू उपयोग के लिए उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।

