Pulses Farming in MP: ग्वालियर-चंबल संभाग में गेहूं, सरसों और धान के अलावा तूअर (अरहर) तथा चना जैसी दलहनी फसलों की भी अच्छी पैदावार होती है। इसके साथ ही कुछ क्षेत्रों में मूंग और उड़द की खेती भी की जाती है।
Pulses Farming in MP: मध्य प्रदेश सरकार प्रदेश को दलहन उत्पादन और प्रसंस्करण में पूर्ण आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही है। राष्ट्रीय दलहन आत्मनिर्भरता मिशन के तहत राज्य में कुल 55 खाद्य प्रसंस्करण एवं पैकेजिंग यूनिट्स (दाल मिल्स) स्थापित की जा रही हैं। यह योजना केंद्र सरकार के सहयोग से चल रही है, जिसके अंतर्गत प्रत्येक यूनिट के लिए अधिकतम 25 लाख रुपये तक का ऋण उपलब्ध होगा और सरकार की ओर से 33 प्रतिशत अनुदान (लगभग 8.25 लाख रुपये तक) सीधे प्रदान किया जाएगा।
यह पहल किसानों को कच्ची फसल बेचने के बजाय मूल्य संवर्धन (प्रसंस्करण, ग्रेडिंग और पैकेजिंग) के माध्यम से बेहतर मूल्य दिलाने में मदद करेगी। विशेष रूप से ग्वालियर जिले और चंबल संभाग के किसानों-ग्रामीण युवाओं के लिए यह स्वरोजगार का बड़ा अवसर है।
योजना के प्रमुख लाभ
आर्थिक सहायता: यूनिट स्थापना पर 25 लाख तक ऋण + 33% अनुदान (अधिकतम 8.25 लाख रुपये की बचत)।
बेहतर आय: किसान चना, तुअर (अरहर), मूंग, उड़द जैसी दलहनों को सफाई, ग्रेडिंग और पैकेजिंग कर उच्च दामों पर बेच सकेंगे।
रोजगार सृजन: स्थानीय स्तर पर नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।
आत्मनिर्भरता: खेती के साथ-साथ प्रसंस्करण व्यवसाय से किसान आत्मनिर्भर बनेंगे।
ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में गेहूं, सरसों और धान के अलावा तुअर, चना, मूंग व उड़द की अच्छी पैदावार होती है। ऐसे में यहां दलहन प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना से किसानों को दोहरा फायदा मिलेगा।
चयन प्रक्रिया: पहले आओ, पहले पाओ
पूरे प्रदेश के लिए केवल 55 यूनिट्स का लक्ष्य है, इसलिए चयन पहले आवेदन करने वालों के आधार पर होगा। आवेदन में देरी से मौका छूट सकता है। पात्र आवेदक (किसान, ग्रामीण युवा, स्वयं सहायता समूह आदि) जल्द से जल्द आवेदन करें।
आवेदन कैसे करें?
इच्छुक किसान या युवा स्थानीय कृषि अभियांत्रिकी विभाग के कार्यालय में संपर्क करें। विभाग पात्रता मानदंड, आवेदन प्रक्रिया, आवश्यक दस्तावेज और अन्य विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराएगा।
टीसी पाटीदार, कार्यकारी इंजीनियर, कृषि अभियांत्रिकी विभाग ने कहा, “दलहन प्रसंस्करण व पैकेजिंग इकाई लगाने की ग्वालियर जिले में जबरदस्त संभावनाएं हैं। 33 प्रतिशत अनुदान के साथ यह किसानों के लिए खेती के साथ अपना व्यवसाय शुरू करने का शानदार मौका है। चूंकि प्रदेशव्यापी टारगेट सिर्फ 55 इकाइयों का है, इसलिए पहले आवेदन करने वाले किसानों को प्राथमिकता मिलेगी।”

