एमपी के कांग्रेस जिलाध्याक्षों का दिल्ली में मंथन, राहूल गांधी, खड़गे कर रहे चर्चा, मिल सकती है बड़ी जिम्मेदारी

नईदिल्ली। कांग्रेस पार्टी के शीर्ष नेता मध्यप्रदेश में फोकस कर रहे है। 2018 के डेढ़ साल को अगर छोड़ दिया जाए तो 22 सालों से एमपी में कांग्रेस सत्ता से बाहर है। ऐसे में कांग्रेस के संगठन को मजबूत बनाने की कवायद तेज हो गई है। शायद यही वजह है कि मध्यप्रदेश के जिलाध्यक्षों की बैठक दिल्ली में आयोजित हो रही है। दिल्ली में कांग्रेस के नए मुख्यालय में हो रही बैठक में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल, मप्र के प्रभारी हरीश चौधरी, पीसीसी चीफ जीतू पटवारी, मप्र के सह प्रभारियों के साथ एमपी के सभी जिलाध्यक्ष बैठक में हिस्सा लिए हुए है।

दलबदल से कंमजोर हुई कांग्रेस

मध्यप्रदेश में लगातार चुनाव में हार का सामना कर रही कांग्रेस पार्टी और दलबदल के चलते कांग्रेस संगठन भी कंमजोर हुआ है। असल में मध्यप्रदेश में 2018 के विधानसभा चुनाव को छोड़कर 2003 से कांग्रेस लगातार चुनाव हारती आ रही है। कमलनाथ सरकार के गिरने के बाद 2020 में हुए दलबदल तथा जमीनी संगठन के कमजोर होने के बाद अब कांग्रेस के र्शीष नेता एमपी में कांग्रेस संगठन को नए तरीके से मजबूत बनाने के लिए काम करने की तैयारी कर रहे है।

अहमदाबाद में राष्ट्रीय अधिवेशन

ज्ञात हो कि अहमदाबाद में होने वाले कांग्रेस के राष्ट्रीय अधिवेशन से पहले यह बैठकें अहम मानी जा रही है, माना जा रहा है कि जो फैसले लिए जाएंगे, उन्हें अहमदाबाद के अधिवेशन में रखा जाएगा। आने वाले समय में कांग्रेस इसे लागू कर सकती है। कांग्रेस की इस तैयारी के बीच माना जा रहा है कि पार्टी आने वाले समय में जिलाध्यक्षों को पॉवर फुल बना सकती है। जैसे उन्हें अपने जिले में टिकट बांटने जैसे अधिकार, पार्टी में उनका फीडबैक, जिलाध्यक्षों को जिले में संगठनात्मक फैसलों में अहम भूमिका निभाने की जिम्मेदारी दी जा सकती है। इसके लिए कांग्रेस आलाकमान ने अलग-अलग कमेटियों से सुझाव भी मांगे हैं। इस बैठक को लेकर माना जा रहा है कि कांग्रेस आलाकमान संगठन स्तर पर बड़े बदलाव भी कर सकता है।

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