कोल्ड-डे। मध्य प्रदेश में ठंड अपने सबसे तीखे तेवर दिखा रही है। मौसम विभाग ने अगले दो दिनों के लिए शीतलहर का अलर्ट जारी किया है। 48 घंटो के दौरान भोपाल, इंदौर, विदिशा, राजगढ़, शाजापुर और सीहोर में शीतलहर चलने की चेतावनी है। मौसम विभाग से जो जानकारी आ रही है उसके तहत उत्तर भारत से आ रही सर्द हवाएं और ऊंचाई पर सक्रिय जेट स्ट्रीम के कारण ठंड का असर और गहराने वाला है। भोपाल में रात का न्यूनतम तापमान 7.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि शहडोल के कल्याणपुर में पारा 4.7 डिग्री तक गिर गया, जो प्रदेश में सबसे कम रहा।
जेट स्ट्रीम 222 किमी के रफ्तार से
उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में जेट स्ट्रीम 222 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से सक्रिय है। जमीन से करीब 12 किलोमीटर ऊपर बहने वाली यह तेज हवा जब पहाड़ों से उतर रही ठंडी और बर्फीली हवाओं से मिलती है, तो सर्दी और तीव्र हो जाती है। इसी का असर मध्य प्रदेश में साफ दिखाई दे रहा है।
आखिर कैसे बनती है शीतलहर
शीत लहर का मतलब सर्दी के मौसम में तापमान का सामान्य से बहुत ज्यादा गिर जाना है, जब ठंडी हवाएं तेज़ी से चलती हैं और न्यूनतम तापमान कई दिनों तक बहुत कम यानि की 10 से साढ़े 4 डिग्री के बीच चला जाता है, ऐसी स्थित में शीतलहर का अलर्ट जारी किया जाता हैं, क्योकि मौसम की यह स्थित मानव शरीर के लिए ख़तरनाक हो जाती है, खासकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए।
ठंडी हवा का होता है आक्रमण
शीतलहर, जिसे कभी-कभी कोल्ड स्नैप या डीप फ़्रीज़ भी कहा जाता है, एक मौसम संबंधी घटना है जिसमें हवा ठंडी हो जाती है, या एक बड़े क्षेत्र में बहुत ठंडी हवा का आक्रमण होता है। यह किसी क्षेत्र के औसत तापमान से काफ़ी नीचे औसत तापमान में गिरावट के रूप में चिह्नित होती है।
इस तरह की होती है समस्या
शीत लहर में अधिक ठंड के लम्बे समय तक सम्पर्क में रहने से त्वचा कठोर एवं सुन्न हो सकती है। शरीर के अंगों जैसे- हाथ-पैर की उंगलियों, नाक एवं कान में लाल फफोले हो सकते हैं। शरीर के भाग के मृत हो जाने पर त्वचा का लाल रंग बदलकर काला हो सकता है। यह बहुत खतरनाक है और इसे गैंग्रीन रोग कहा जाता है। फसलों और सेवाओं पर बुरा असर पड़ता है; यह ध्रुवीय या आर्कटिक हवाओं के कारण आती है और ज्यादा ठंड, ठिठुरन और गंभीर होने पर फ्रॉस्टबाइट जैसी समस्याएं पैदा कर सकती है।
इस तरह से करें बचाव
शीतलहर से बचने के लिए गर्म और परतदार कपड़े पहनें, खासकर सिर, कान, हाथ और पैरों को ढकें; घर को गर्म रखें और हवादार बनाएँ; पौष्टिक और गर्म भोजन व पेय (जैसे सूप, अदरक वाली चाय) लें; बुजुर्गों, बच्चों और बीमारों का विशेष ध्यान रखें; और बेवजह बाहर जाने से बचें, धूप सेंकें और मौसम की जानकारी पर नज़र रखें, ताकि ठंड के दुष्प्रभावों (जैसे फ्रॉस्टबाइट या निमोनिया) से बचा जा सके।
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