MP Budget Session 2026: मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र में कांग्रेस स्थगन प्रस्ताव लाएगी, जिसमें इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पेयजल के कारण हुई दर्जनों मौतें (अब तक 30 से अधिक), प्रदेश में जहरीले कोल्ड्रिंक/कफ सीरप (जैसे कोल्ड्रिफ) से बच्चों की हुई 20-25 मौतें, और सेना की अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी के खिलाफ मंत्री विजय शाह द्वारा दिए गए असभ्य एवं आपत्तिजनक बयान पर राज्य सरकार द्वारा अब तक कोई कार्रवाई न करने को प्रमुख मुद्दा बनाया जाएगा।
MP Budget Session 2026: इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से हुई 32 मौतों को लेकर कांग्रेस पहली बार एकजुट होकर सड़कों पर उतरी है। लगातार धरना, प्रदर्शन और आंदोलन चल रहे हैं। अब यह मुद्दा विधानसभा में भी गूंजेगा। कांग्रेस विधायक दल इसे सदन में प्रभावी ढंग से उठाने की योजना बना रहा है। पार्टी स्थगन प्रस्ताव लाकर सरकार से जवाब मांग सकती है।
नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय इस मामले में निशाने पर हैं, क्योंकि विभाग उनके अधीन है। कांग्रेस का आरोप है कि भ्रष्टाचार और प्रशासनिक चूक के कारण यह त्रासदी हुई है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी समेत कई नेताओं ने पहले ही मुआवजे, जांच और कार्रवाई की मांग की है। अब सबकी नजर विधायक दल की रणनीति और सदन में दबाव बनाने की क्षमता पर टिकी है।
25 बच्चों की मौत पर सरकार से सवाल
एक अन्य गंभीर मुद्दा जहरीले कोल्ड्रिफ कफ सीरप से जुड़ा है, जिसके सेवन से छिंदवाड़ा, बैतूल और पांढुर्णा में अब तक 25 बच्चों की मौत हो चुकी है। कांग्रेस ने पहले ही इस मामले में चूक का आरोप लगाया था और अब सदन में इसे जोर-शोर से उठाने की तैयारी है। पार्टी स्थगन प्रस्ताव के जरिए चर्चा की मांग करेगी और सरकार पर दबाव बनाएगी। साथ ही, मंत्री विजय शाह द्वारा सेना की अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी पर दिए गए असभ्य बयान को भी प्रमुखता से उठाया जा सकता है। सरकार ने अब तक इस पर कोई कार्रवाई नहीं की है, जिसे कांग्रेस भाजपा के खिलाफ बड़ा हथियार बना रही है।
विधायक दल पर सबकी नजर
कांग्रेस विधायक दल की एकजुटता और प्रदर्शन इस बार खास तौर पर देखने लायक होगा। भागीरथपुरा मामले में पार्टी ने सशक्त विपक्ष की भूमिका निभाई है और इसे पूरे प्रदेश तक पहुंचाया है। अब सदन में सरकार पर कितना दबाव बन पाता है, यह विधायक दल पर निर्भर करेगा। हालांकि, बजट सत्र में सामान्यतः स्थगन प्रस्ताव नहीं लिए जाते, इसलिए इनकी ग्राह्यता पर संशय है। सूत्रों के अनुसार, चर्चा कराने के अन्य माध्यमों का भी सहारा लिया जा सकता है। पार्टी विधानसभा घेराव जैसी रणनीति भी अपना सकती है।
