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Motivational Story For Youth : ज़िद-चुप्पी और फिर हमेशा का पछतावा,ह्रदय को झकझोर देने वाली,लेकिन युवाओं के लिए प्रेरणादायक कहानी

Motivational Story For Youth : ज़िद-चुप्पी और फिर हमेशा का पछतावा,ह्रदय को झकझोर देने वाली,लेकिन युवाओं के लिए प्रेरणादायक कहानी-आज के दौर में जब युवाओं की इच्छाएं तेजी से बढ़ रही हैं वहीं माता-पिता की जिम्मेदारियां भी कई गुना बढ़ चुकी हैं। बच्चे अक्सर अपनी जरूरतों और जिद के पीछे यह भूल जाते हैं कि उनके माता-पिता किन हालातों से गुजरते हुए उनकी हर खुशी पूरी करने की कोशिश करते हैं। यह कहानी एक ऐसी बेटी और पिता की है, जो हर उस युवा को सोचने पर मजबूर कर देती है, जो बिना परिस्थितियों को समझे अपनी मांगें रखते हैं। यह सिर्फ एक कहानी नहीं, बल्कि संवेदनाओं, प्रेम, त्याग और पछतावे का आईना है। एक भावुक और प्रेरणादायक कहानी जो युवाओं को माता-पिता की भावनाओं, त्याग और संघर्ष को समझने की सीख देती है। जिद, गुस्सा और पछतावे से भरी यह कहानी दिल को छू जाती है।

एक पिता की मजबूरी और बेटी की जिद जो बन गई हमेशा का पछतावा

सुबह का समय था। पिता ऑफिस जाने के लिए तैयार थे। तभी बेटी ने जिद पकड़ ली-उसे एक्टिवा चाहिए। पिता ने प्यार से समझाया कि अभी परिस्थितियां अनुकूल नहीं हैं, सैलरी सीमित है, घर की कई जिम्मेदारियां हैं। लेकिन बेटी अपनी जिद पर अड़ी रही।

बेटी की नाराज़गी बन गई पिता की मौत का कारण

पिता अपनी व्यथा बता कर अपने ऑफिस आ तो गया लेकिन ऑफिस पहुंचकर भी पिता का मन बेचैन रहा। बार-बार बेटी को फोन किया लेकिन बेटी ने एक बार भी फोन नहीं उठाया। बेटी की नाराजगी और चुप्पी पिता के दिल को भीतर तक तोड़ रही थी। बेचैनी बढ़ती गई और सीने में दर्द शुरू हो गया। पिता सीधे अपने बॉस के पास पहुंचे और बेटी की खुशी के लिए तत्काल लोन पास करवाया। दर्द और तनाव के बावजूद वे शोरूम पहुंचे और बेटी के लिए एक्टिवा खरीद ली। उन्होंने बेटी को फोन कर खुशखबरी देने की कोशिश की लेकिन फोन अब भी नहीं उठा। उधर बेटी गुस्से में थी, जिद में थी, और पिता की हालत से अनजान थी। पिता का दर्द बढ़ता गया। भावनाओं और तनाव के दबाव में ऑफिस में ही उन्हें हार्ट अटैक आ गया। शाम को घर के बाहर नई चमचमाती एक्टिवा खड़ी थी। बेटी खुशी से झूम उठी लेकिन तभी एंबुलेंस भी पहुंची। जब स्ट्रेचर से पिता का निर्जीव शरीर बाहर निकाला गया, तो बेटी की दुनिया उजड़ गई। वह फूट-फूटकर रोने लगी-माफ कर दो पापा…मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गई…काश मैंने आपका फोन उठा लिया होता-लेकिन अब तक बहुत देर हो चुकी थी और हाथ लगा तो सिर्फ कभी न ख़त्म होने वाला पछतावा।

युवाओं के लिए जीवन की सबसे बड़ी सीख

यह कहानी हर उस युवा के लिए एक आईना है जो बिना सोचे-समझे जिद करता है, गुस्सा करता है, और अपने माता-पिता की मजबूरियों को नहीं समझता। माता-पिता की मुस्कान के पीछे अक्सर अनकहा दर्द छिपा होता है। वे अपनी जरूरतों को मारकर, कर्ज लेकर, मानसिक तनाव सहकर भी बच्चों की खुशियों को पूरा करने में लगे रहते हैं। हर बच्चे को यह समझना चाहिए कि पापा की सैलरी सिर्फ पैसे नहीं बल्कि उनकी मेहनत, स्वास्थ्य और सपनों की कीमत होती है। हर मांग पूरी होना जरूरी नहीं वहीं गुस्सा और चुप्पी कई बार रिश्तों को हमेशा के लिए तोड़ देती है।

निष्कर्ष-(Conclusion)-माता-पिता का प्रेम अनमोल होता है। वे हमारे लिए जीते हैं, हमारे लिए सहते हैं और कई बार हमारे लिए ही टूट जाते हैं। इसलिए अगली बार जब कोई जिद करें, तो एक पल ठहरकर सोचिए-क्या यह जिद आपके माता-पिता की सेहत, सम्मान और शांति से ज्यादा जरूरी है ? आज फोन उठाना, प्यार से बात कर लेना, धन्यवाद कहना-यही छोटे-छोटे शब्द कल किसी बड़े पछतावे से बचा सकते हैं। माता-पिता हैं तो जीवन है, उनका सम्मान ही हमारी सबसे बड़ी पूंजी है।


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