मॉनसून पर अल नीनो का असर कम होने और ला नीना की सक्रियता बढ़ने से इस साल बारिश की स्थिति बदल सकती है। जून-अगस्त के मौसम अपडेट की पूरी जानकारी यहाँ पढ़ें।

Rain clouds over Indian agricultural fields showing impact of El Nino on Monsoon.

भारत में कृषि और अर्थव्यवस्था की जान कहे जाने वाले दक्षिण-पश्चिम मॉनसून को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। मॉनसून पर अल नीनो का असर इस बार पिछले वर्षों के मुकाबले कम रहने की संभावना है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, प्रशांत महासागर में बदलती समुद्री परिस्थितियों का सीधा प्रभाव भारत के वर्षा पैटर्न पर पड़ने वाला है। इस साल जून से अगस्त के दौरान बारिश के सामान्य या उससे बेहतर रहने के संकेत मिल रहे हैं, जो किसानों के लिए राहत भरी खबर हो सकती है।

प्रशांत महासागर में बदलाव और मॉनसून पर अल नीनो का असर

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) और अंतरराष्ट्रीय मौसम एजेंसियों के ताजा आंकड़ों के अनुसार, अल नीनो का प्रभाव अब धीरे-धीरे कमजोर पड़ रहा है। अल नीनो एक ऐसी स्थिति है जब मध्य और पूर्वी प्रशांत महासागर का पानी सामान्य से अधिक गर्म हो जाता है, जिससे अक्सर भारत में कम बारिश या सूखे की स्थिति पैदा होती है। हालांकि, इस साल मॉनसून के शुरुआती महीनों में ही ‘एनसो-न्यूट्रल’ (ENSO-neutral) स्थिति बनने के आसार हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि मॉनसून पर अल नीनो का असर खत्म होने के साथ ही ‘ला नीना’ (La Niña) की स्थितियां सक्रिय हो सकती हैं। ला नीना को आमतौर पर भारत में अच्छी बारिश का संकेत माना जाता है। जून के मध्य से अगस्त के अंत तक देश के अधिकांश हिस्सों में व्यापक वर्षा की उम्मीद जताई जा रही है।

जून से अगस्त के बीच कैसा रहेगा बारिश का हाल?

मौसम विभाग के पूर्वानुमानों को देखें तो जून का महीना मॉनसून की शुरुआत के साथ उमस और गर्मी से राहत दिलाएगा। हालांकि, जून के पहले पखवाड़े में बारिश की रफ्तार थोड़ी धीमी रह सकती है। इसके बाद जुलाई और अगस्त में मॉनसून अपने चरम पर होगा। इन दो महीनों में देश के उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत में सामान्य से अधिक बारिश होने की प्रबल संभावना है।

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दक्षिणी प्रायद्वीप और पूर्वोत्तर राज्यों में भी बारिश का वितरण संतुलित रहने की उम्मीद है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि अगर जुलाई में बारिश का कोटा सही समय पर पूरा होता है, तो खरीफ फसलों की बुवाई के लिए यह आदर्श स्थिति होगी। जलाशयों के जलस्तर में सुधार के लिए भी यह समय काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

ला नीना की सक्रियता से बढ़ेगी मॉनसून की ताकत

जब हम मॉनसून पर अल नीनो का असर कम होने की बात करते हैं, तो ला नीना की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। ला नीना के दौरान प्रशांत महासागर का पानी ठंडा हो जाता है, जिससे भारतीय उपमहाद्वीप में मॉनसूनी हवाएं अधिक सक्रिय और शक्तिशाली हो जाती हैं। स्काईमेट और अन्य निजी मौसम पूर्वानुमान केंद्रों के अनुसार, अगस्त के अंत तक देश में बारिश का कुल प्रतिशत 100% से अधिक रह सकता है।

हालांकि, मौसम विभाग ने अत्यधिक बारिश (Extreme Weather Events) के प्रति भी सचेत किया है। अचानक होने वाली तेज बारिश से शहरी इलाकों में जलभराव और पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए, स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन टीमों को अगस्त के महीने के लिए विशेष रूप से अलर्ट रहने की सलाह दी गई है।

खेती और अर्थव्यवस्था पर इस मौसम अपडेट का प्रभाव

भारतीय ग्रामीण अर्थव्यवस्था काफी हद तक समय पर होने वाली बारिश पर निर्भर है। पिछले साल अल नीनो के कारण कई राज्यों में असमान बारिश दर्ज की गई थी, जिससे उत्पादन पर असर पड़ा था। लेकिन इस साल मॉनसून पर अल नीनो का असर नगण्य होने से चावल, दाल और तिलहन की खेती को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

वहीं, देश के प्रमुख बांधों और नदियों में पानी की पर्याप्त आवक होने से न केवल सिंचाई की सुविधा बढ़ेगी, बल्कि बिजली उत्पादन में भी स्थिरता आएगी। मौसम के इस सकारात्मक अपडेट ने बाजार और नीति निर्माताओं के चेहरे पर भी मुस्कान ला दी है, क्योंकि अच्छी बारिश का सीधा संबंध ग्रामीण मांग और कम महंगाई दर से होता है।

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