भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने साल 2026 के लिए दक्षिण-पश्चिम मॉनसून का पहला आधिकारिक पूर्वानुमान जारी कर दिया है। Monsoon 2026 Forecast के मुताबिक, इस साल देश के कई हिस्सों में बारिश का आंकड़ा सामान्य से कम रह सकता है। अल-नीनो के प्रभाव और हिंद महासागर के बदलते तापमान के कारण खेती-किसानी और जल संचयन पर इसका सीधा असर पड़ने की संभावना है।
Monsoon 2026 Forecast: क्या कहता है मौसम विभाग का डेटा?
मौसम विभाग की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, इस साल मॉनसून की लंबी अवधि का औसत (LPA) 94 फीसदी से 98 फीसदी के बीच रहने का अनुमान है। वैज्ञानिक दृष्टि से इसे ‘सामान्य से कम’ श्रेणी में रखा जाता है। रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि जून से सितंबर के दौरान बारिश का वितरण पूरे देश में एक समान नहीं रहेगा।
मध्य भारत और उत्तर-पश्चिम के कुछ राज्यों में सूखे जैसी स्थिति पैदा हो सकती है। हालांकि, दक्षिण भारत और उत्तर-पूर्व के राज्यों में स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर रहने की उम्मीद है। विभाग ने चेतावनी दी है कि किसानों को अपनी बुवाई की योजना मौसम की बदलती परिस्थितियों के आधार पर ही बनानी चाहिए।
किन राज्यों में दिखेगा कम बारिश का असर?
मौसम विभाग के बुलेटिन के अनुसार, उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान और हरियाणा जैसे प्रमुख कृषि प्रधान राज्यों में इस बार बादल कम बरस सकते हैं। इन इलाकों में शुरुआती मॉनसून की गति धीमी रहने के आसार हैं। उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में तापमान सामान्य से अधिक रहने की वजह से फसलों पर दबाव बढ़ सकता है।
दूसरी ओर, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में मॉनसून की आवक समय पर होगी, लेकिन जुलाई के अंत में बारिश की कमी दर्ज की जा सकती है। खेती के लिहाज से यह एक चुनौतीपूर्ण स्थिति है, क्योंकि यही समय धान और खरीफ फसलों की सिंचाई का मुख्य दौर होता है।
दक्षिण और पूर्वोत्तर भारत में झमाझम बारिश के आसार
Monsoon 2026 Forecast के सकारात्मक पहलुओं की बात करें तो केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु के तटीय इलाकों में अच्छी बारिश की भविष्यवाणी की गई है। इसके साथ ही असम, मेघालय और पश्चिम बंगाल के उत्तरी हिस्सों में सामान्य या सामान्य से अधिक वर्षा होने की 70% संभावना है।
पश्चिमी घाट के क्षेत्रों में भी मॉनसून सक्रिय रहेगा, जिससे जलाशयों के जलस्तर में सुधार देखने को मिल सकता है। ओडिशा और आंध्र प्रदेश के तटवर्ती जिलों में चक्रवातीय गतिविधियों के कारण मॉनसून के दौरान तेज हवाओं के साथ भारी बारिश का अलर्ट भी जारी किया गया है।
अल-नीनो और जलवायु परिवर्तन का प्रभाव
मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि प्रशांत महासागर में सक्रिय अल-नीनो की स्थिति भारतीय मॉनसून को कमजोर कर रही है। हालांकि, ‘इंडियन ओशन डिपोल’ (IOD) के सकारात्मक रहने की उम्मीद है, जो बारिश की कमी को कुछ हद तक संतुलित कर सकता है। फिर भी, वैश्विक जलवायु परिवर्तन के कारण मॉनसून के पैटर्न में काफी अनिश्चितता देखी जा रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अब मॉनसून के दौरान ‘रेन डेज़’ यानी बारिश वाले दिनों की संख्या कम हो रही है, लेकिन कम समय में बहुत अधिक बारिश (Extreme Rainfall) की घटनाएं बढ़ रही हैं। यह पैटर्न शहरी इलाकों में बाढ़ और ग्रामीण इलाकों में मिट्टी के कटाव का कारण बनता है।
खेती और अर्थव्यवस्था पर संभावित असर
भारत की जीडीपी में कृषि का बड़ा योगदान है और भारतीय कृषि मुख्य रूप से मॉनसून पर निर्भर है। अगर Monsoon 2026 Forecast के अनुरूप बारिश कम रहती है, तो इसका असर महंगाई दर पर भी पड़ सकता है। दलहन और तिलहन की पैदावार कम होने से बाजार में कीमतों में उछाल आने का खतरा रहता है। सरकार ने भी राज्यों को सिंचाई प्रबंधन और आकस्मिक योजनाएं तैयार रखने के निर्देश दिए हैं।
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