MIT University Sikkim में AI Tools Workshop का सफल आयोजन

External view of Management and Information Technology University building in Namchi, Sikkim

सिक्किम के शैक्षिक परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, MIT University Sikkim ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की बारीकियों को समझाने के लिए एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया। इस AI Tools Workshop का मुख्य उद्देश्य छात्रों को भविष्य की बदलती हुई नौकरियों और तकनीकी चुनौतियों के लिए व्यावहारिक रूप से तैयार करना था।

MIT University Sikkim

AI टूल्स की व्यावहारिक समझ पर जोर

आज के दौर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस केवल एक किताबी विषय नहीं रह गया है, बल्कि यह हर उद्योग का अनिवार्य हिस्सा बन चुका है। इसी आवश्यकता को समझते हुए विश्वविद्यालय ने एक निःशुल्क प्रशिक्षण सत्र आयोजित किया। इसमें न केवल सिक्किम, बल्कि पश्चिम बंगाल, दिल्ली और पड़ोसी देश नेपाल के छात्रों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। विशेषज्ञों का मानना है कि जो छात्र इन तकनीकों में माहिर होंगे, उन्हें करियर में विशेष बढ़त मिलेगी।

प्रमुख टूल्स और प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग का प्रशिक्षण

इस कार्यशाला की सबसे बड़ी विशेषता इसकी प्रैक्टिकल अप्रोच रही। दिल्ली से आए एआई विशेषज्ञ प्रो. राकेश वर्मा ने छात्रों को जटिल सिद्धांतों के बजाय सीधे टूल्स के इस्तेमाल पर केंद्रित रखा। इसमें ChatGPT और Claude AI जैसे टेक्स्ट-आधारित प्लेटफॉर्म्स के साथ-साथ Google Gemini के रिसर्च ओरिएंटेड उपयोग के बारे में विस्तार से बताया गया। छात्रों को सिखाया गया कि कैसे सही ‘प्रॉम्ट’ के जरिए एआई से सटीक और प्रोफेशनल परिणाम हासिल किए जा सकते हैं।

वीडियो जनरेशन और भविष्य की तकनीक

कार्यशाला के दौरान कंटेंट क्रिएशन के क्षेत्र में आ रहे बदलावों पर विशेष सत्र आयोजित हुआ। इसमें OpenAI के Sora और Runway ML जैसे आधुनिक टेक्स्ट-टू-वीडियो टूल्स का प्रदर्शन किया गया। छात्रों को यह समझने का मौका मिला कि कैसे केवल टेक्स्ट कमांड के जरिए प्रोफेशनल क्वालिटी के वीडियो तैयार किए जा सकते हैं। विशेषज्ञों ने बताया कि मीडिया, मार्केटिंग और फिल्म मेकिंग जैसे क्षेत्रों में इन स्किल्स की मांग तेजी से बढ़ रही है।

MIT University Namchi Sikkim Building Entrance

इंडस्ट्री की मांग और करियर के अवसर

वर्तमान बाजार सर्वेक्षणों के अनुसार, भारत में लगभग 75 प्रतिशत कंपनियां ऐसे उम्मीदवारों को प्राथमिकता दे रही हैं जो एआई साक्षर हैं। विश्वविद्यालय के डीन डॉ. रमेश सिंह ने इस दौरान कहा कि एआई की समझ अब एक विकल्प नहीं, बल्कि जरूरत है। छात्रों ने भी माना कि ऑनलाइन वीडियो देखने के मुकाबले, इस तरह की हैंड-ऑन ट्रेनिंग ने उनके आत्मविश्वास को कई गुना बढ़ा दिया है।

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