Minister Vijay Shah Case: मंत्री विजय शाह के खिलाफ कर्नल सोफिया कुरैशी मामले में एमपी-एमएलए कोर्ट में सुनवाई हो सकती है। यह मामला विशेष जांच दल (एसआईटी) की रिपोर्ट और अभियोजन की मंजूरी से जुड़ा है। सूत्रों के अनुसार, अंतिम फैसला मुख्यमंत्री मोहन यादव के दावोस से लौटने के बाद लिया जा सकता है, जिसके बाद आगे की कार्रवाई की दिशा स्पष्ट होगी।
Minister Vijay Shah Case: मध्य प्रदेश के मंत्री कुंवर विजय शाह की कर्नल सोफिया कुरैशी पर आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में मुश्किलें लगातार बढ़ रही हैं। विशेष जांच दल (SIT) ने अगस्त 2025 में जांच पूरी कर अभियोजन की मंजूरी मांगी थी, लेकिन राज्य सरकार ने अब तक कोई फैसला नहीं लिया है। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (19 जनवरी 2026) को इस पर सख्त रुख अपनाते हुए मध्य प्रदेश सरकार को दो हफ्ते के भीतर अभियोजन स्वीकृति (sanction to prosecute) पर निर्णय लेने का निर्देश दिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने माफी को ठुकराया, कहा- अब बहुत देर हो चुकी है
सुनवाई के दौरान विजय शाह के वकील ने कोर्ट को बताया कि उनके मुवक्किल ने माफी मांग ली है। इस पर मुख्य न्यायाधीश सुर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच (जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस जॉयमाल्या बागची सहित) ने कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा, “अब माफी मांगने में बहुत देर हो चुकी है। आप एक पब्लिक फिगर हैं, बोलते समय शब्दों पर सोच-समझकर ध्यान देना चाहिए।” कोर्ट ने आगे कहा कि शाह अब लोगों के सामने पूरी तरह बेनकाब हो चुके हैं।
सरकार पर सवाल: जानबूझकर देरी तो नहीं?
कोर्ट ने राज्य सरकार से सख्त सवाल किए कि SIT की रिपोर्ट पर महीनों से चुप्पी क्यों साधे हुए है। CJI ने कहा, “कानून आपको जिम्मेदारी देता है और फैसला लेना होगा। हम अब जनवरी 2026 में हैं।” SIT ने विभिन्न पहलुओं की जांच के बाद भारतीय न्याय संहिता की धारा 196 (सांप्रदायिक वैमनस्य बढ़ाने) के तहत मुकदमा चलाने की मंजूरी मांगी थी। कोर्ट ने सरकार को स्पष्ट निर्देश दिया कि अभियोजन मंजूरी पर फैसला लेकर अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करे। साथ ही, SIT को पुराने संबंधित मामलों की अतिरिक्त जांच कर रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है।
ट्रायल इंदौर के MP-MLA कोर्ट में हो सकता है
कानूनी जानकारों के अनुसार, यदि सरकार अभियोजन मंजूरी देती है तो केस का ट्रायल इंदौर के MP-MLA कोर्ट में शुरू हो सकता है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव फिलहाल स्विटजरलैंड के दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में भाग ले रहे हैं। उनके लौटने (23 जनवरी तक) के बाद सरकार इस मामले पर अंतिम फैसला ले सकती है।
ऑपरेशन सिंदूर पर दिया बयान
विवाद मई 2025 में शुरू हुआ जब विजय शाह ने इंदौर के महू में रायकुंडा गांव के हलमा कार्यक्रम में ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए कहा था, “उन्होंने (आतंकियों) कपड़े उतार-उतार कर हमारे हिंदुओं को मारा। मोदी जी ने उनकी बहन को ही उनकी ऐसी की तैसी करने उनके घर भेजा।” यह बयान कर्नल सोफिया कुरैशी (जो ऑपरेशन सिंदूर में मीडिया ब्रीफिंग दे चुकी थीं) पर लिया गया। बयान से देशव्यापी हंगामा मचा और कड़ी आलोचना हुई।
पूरा मामला एक नजर में
11 मई 2025: विजय शाह ने महू में विवादित बयान दिया।
13 मई 2025: माफी मांगी, लेकिन भाजपा संगठन ने कार्रवाई की।
14 मई 2025: हाईकोर्ट ने FIR दर्ज करने का आदेश दिया; रात में मानपुर थाने में FIR दर्ज।
15-16 मई 2025: हाईकोर्ट ने FIR की भाषा पर नाराजगी जताई; सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई।
17-19 मई 2025: सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की, शाह को फटकार लगाई और SIT गठन का आदेश दिया।
19 मई 2025: SIT गठित (IG प्रमोद वर्मा, DIG कल्याण चक्रवर्ती, SP वाहिनी सिंह)।
20-21 मई 2025: SIT ने जांच शुरू की, महू पहुंची।
28 मई 2025: बयान दर्ज कर दस्तावेज कोर्ट में पेश।
19 जुलाई 2025: SIT ने शाह से जबलपुर में 25 मिनट पूछताछ की।
28 जुलाई 2025: सुप्रीम कोर्ट ने फिर फटकार लगाई।
19 जनवरी 2026: सुप्रीम कोर्ट ने माफी खारिज की, सरकार को 2 हफ्ते का समय दिया।
