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मंत्री प्रतिमा बागरी जाति विवाद: हाईकोर्ट के आदेश पर एक्शन तेज, गांवों में डुगडुगी बजवाकर मांगे गए साक्ष्य

Minister Pratima Bagri Caste ControversyMinister Pratima Bagri Caste Controversy

Minister Pratima Bagri Caste Controversy

सतना: मध्य प्रदेश की नगरीय विकास राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी के कथित अनुसूचित जाति (एससी) प्रमाण-पत्र को लेकर खड़ा हुआ कानूनी और राजनीतिक विवाद अब गहराता जा रहा है। हाईकोर्ट के कड़े निर्देश के बाद इस मामले में प्रशासनिक कार्रवाई की रफ्तार बेहद तेज हो गई है। राज्य स्तरीय जाति छानबीन समिति के आदेश पर सतना जिले की नागौद तहसील के अंतर्गत आने वाले ग्राम वसुधा में बाकायदा डुगडुगी बजाकर आम लोगों को इस संबंध में सार्वजनिक सूचना दी गई। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि शनिवार को हरदुआ और मझोल गांवों में भी इसी तरह डुगडुगी पिटवाकर मुनादी कराई जाएगी और पंचनामा रिपोर्ट तैयार की जाएगी।

आम जनता से सबूत देने की अपील, वीडियोग्राफी भी हुई

प्रशासनिक अमले ने इस मुनादी के जरिए ग्रामीणों से सीधे तौर पर अपील की है कि यदि किसी भी व्यक्ति के पास राज्यमंत्री की जाति से संबंधित कोई भी पुख्ता तथ्य, ऐतिहासिक दस्तावेज या साक्ष्य उपलब्ध हैं, तो वे उन्हें बिना किसी झिझक के सीधे छानबीन समिति के समक्ष प्रस्तुत कर सकते हैं। ग्राम पंचायत वसुधा में जब यह डुगडुगी पिटवाई जा रही थी, तब पारदर्शिता के लिए प्रशासन द्वारा इसकी पूरी वीडियोग्राफी भी कराई गई। इसके साथ ही इश्तहार (नोटिस) की कॉपियां तहसील कार्यालय नागौद, जनपद पंचायत कार्यालय और संबंधित ग्राम पंचायतों के नोटिस बोर्ड पर भी चस्पा कर दी गई हैं।

कांग्रेस नेता ने हाईकोर्ट में दी थी चुनौती, राजपूत होने का दावा

इस पूरे विवाद की जड़ें पिछले विधानसभा चुनाव से जुड़ी हैं। दरअसल, प्रतिमा बागरी ने अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सतना जिले की रैगांव विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा था और शानदार जीत हासिल की थी, जिसके बाद उन्हें राज्य सरकार में मंत्री पद से भी नवाजा गया। उनकी इस जीत और जाति प्रमाण-पत्र को चुनौती देते हुए कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की थी। याचिका में बेहद गंभीर दावा किया गया है कि संबंधित क्षेत्र में ‘बागरी’ समुदाय अनुसूचित जाति की आधिकारिक सूची में शामिल ही नहीं है और प्रतिमा बागरी मूल रूप से राजपूत/ठाकुर समुदाय से ताल्लुक रखती हैं, इसलिए उनका एससी प्रमाण-पत्र पूरी तरह अवैध है।

6 जुलाई को छानबीन समिति के सामने व्यक्तिगत रूप से होना होगा पेश

मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने राज्य स्तरीय जाति छानबीन समिति को इस पूरे प्रकरण की गहराई से जांच कर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए थे। कोर्ट के इसी रुख के बाद छानबीन समिति पूरी तरह एक्टिव मोड में आ गई है। समिति ने राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी को कड़ा नोटिस जारी करते हुए आगामी 6 जुलाई 2026 को अनुसूचित जाति विकास आयुक्त कार्यालय में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने और संबंधित दस्तावेज पेश करने के निर्देश दिए हैं। सतना कलेक्टर को इस नोटिस की तामीली सुनिश्चित कराने की विशेष जिम्मेदारी दी गई थी। अब राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों की नजरें 6 जुलाई को होने वाली इस बड़ी पेशी पर टिकी हैं।

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