Medical Store Strike In India: अगर आप रोजाना कोई दवा लेते हैं या घर में बुजुर्ग और मरीज हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। 20 मई को देशभर के दवा दुकानदारों ने ऑनलाइन और ई-फार्मेसी (Online Pharmacy) प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ हड़ताल का ऐलान किया है। ऐसे में कई शहरों में मेडिकल स्टोर बंद रह सकते हैं और जरूरी दवाएं मिलने में दिक्कत हो सकती है। इसलिए लोगों को सलाह दी जा रही है कि वे अपनी जरूरी दवाएं पहले ही खरीदकर रख लें।
आखिर क्यों हो रही है हड़ताल?
देशभर के केमिस्ट और दवा दुकानदार ऑनलाइन दवा बेचने वाली कंपनियों और इंस्टेंट डिलीवरी ऐप्स के खिलाफ विरोध जता रहे हैं। ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD) का आरोप है कि कई ई-फार्मेसी प्लेटफॉर्म बिना पर्याप्त निगरानी के दवाएं बेच रहे हैं, जिससे मरीजों की सुरक्षा खतरे में पड़ रही है।
एसोसिएशन का कहना है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर कई बार गलत, फर्जी या बिना वैध डॉक्टर पर्ची के भी दवाइयां दे दी जाती हैं। आरोप है कि कुछ कंपनियां बिना रजिस्टर्ड डॉक्टरों के प्रिस्क्रिप्शन पर भी दवा बेच रही हैं।
50% तक छूट देकर बाजार बिगाड़ने का आरोप
केमिस्ट एसोसिएशन का कहना है कि बड़ी कॉर्पोरेट कंपनियों के समर्थन से चल रही ई-फार्मेसी कंपनियां भारी डिस्काउंट देकर बाजार में असंतुलन पैदा कर रही हैं। कई प्लेटफॉर्म 50% तक की छूट देकर दवाएं बेच रहे हैं, जबकि छोटे मेडिकल स्टोर इतने कम दाम पर दवा नहीं बेच सकते।
AIOCD के महासचिव राजीव सिंघल के मुताबिक, बड़े ऑनलाइन प्लेटफॉर्म अपने मुनाफे के दम पर लंबे समय तक भारी छूट दे सकते हैं, लेकिन छोटे दुकानदारों के लिए ऐसा करना संभव नहीं है। इससे छोटे मेडिकल स्टोर बंद होने की कगार पर पहुंच रहे हैं।
किन नियमों को वापस लेने की मांग?
केमिस्ट संगठन सरकार से दो नोटिफिकेशन — GSR 817(E) और GSR 220(E) — वापस लेने की मांग कर रहा है।
GSR 817(E) क्या है?
यह ड्राफ्ट नोटिफिकेशन करीब 8 साल पहले ऑनलाइन फार्मेसी के लिए रेगुलेटरी सिस्टम बनाने के लिए लाया गया था। इसमें ऑनलाइन दवा बिक्री के रजिस्ट्रेशन, प्रिस्क्रिप्शन जांच और नियम उल्लंघन पर कार्रवाई जैसी व्यवस्थाओं का प्रस्ताव था। हालांकि इसे आज तक पूरी तरह लागू नहीं किया गया।
GSR 220(E) क्या है?
यह नोटिफिकेशन कोविड काल में जारी किया गया था, जिसके तहत रजिस्टर्ड फार्मेसी को घर तक दवाएं पहुंचाने की अनुमति दी गई थी।
सरकार का क्या कहना है?
स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि यह मामला अभी विचाराधीन है। हालांकि केमिस्ट संगठनों का दावा है कि उन्होंने सरकार और ड्रग रेगुलेटरी अधिकारियों से कई बार मुलाकात की, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
कुछ राज्यों में हड़ताल के असर को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं, लेकिन AIOCD का कहना है कि यह देशव्यापी हड़ताल होगी।
मरीजों को क्या करना चाहिए?
अगर आप डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, हार्ट, थायरॉइड, अस्थमा या किसी अन्य बीमारी की नियमित दवा लेते हैं, तो 20 मई से पहले ही दवाओं का स्टॉक जरूर रख लें। खासकर बुजुर्गों और गंभीर मरीजों के लिए पहले से तैयारी करना जरूरी हो सकता है।
लोगों की बढ़ सकती है परेशानी
अगर हड़ताल बड़े स्तर पर सफल रही, तो अस्पतालों और मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। कई इलाकों में मेडिकल स्टोर बंद रहने से इमरजेंसी दवाएं मिलना भी मुश्किल हो सकता है।

