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एमपी में एमबीबीएस डॉक्टर करेगें सोनोग्रॉफी, रेडियोलॉजिस्ट की कमी को दूर करने उठाए जा रहे कदम

भोपाल। मध्यप्रदेश की स्वास्थ व्यवस्था को गुणवत्ता पूर्ण बनाने एवं जांच को अच्छा करने के लिए जल्द ही एमबीबीएस डॉक्टरों के हाथ जांच की कमान सौपने की तैयार की जा रही है। जो खबरें आ रही है उसके तहत जिला-सिविल अस्पतालों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के रेडियोंलॉजी विभाग की जिम्मेदारी एमबीबीएस डॉक्टर सम्हालेगे और वे अल्ट्रासाउंड खुद करेगे।

6 महीने का दिया जाऐगा प्रशिक्षण

रेडियोलॉजिस्ट की कमी दूर करने के लिए सरकार की नई योजना के तहत ऐसे अस्पतालों के एमबीबीएस डॉक्टरों को 6 महीने के विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिन अस्पतालों में फिलहाल जांच की सुविधा बनी हुई है। 6 महीने तक उन्हे ट्रेनिग दी जाऐगी और वे सीनियर डॉक्टर की देखरेख में जांच करेगे। ट्रेर्निग पूरी होने के बाद उनकी परीक्षा होगी। जो पास होगा, उसी को जांच की अनुमति मिलेगी।

रेडियोलॉजिस्ट की कमी होगी दूर

बता दें कि गांव और छोटे शहरों के अस्पतालों में मशीनें हैं लेकिन रेडियोलॉजिस्ट की कमी है। जांच के लिए मरीजों को परेशान होना पड़ता है। इस पहल से अब मरीज को जांच में राहत मिलेगी, तो उन्हे प्राइवेट सेंटरों में होने वाले मंहगे खर्च से मुक्ति मिलेगी। यह कदम बिहार और कर्नाटक जैसे राज्यों की तर्ज पर उठाया गया है, जहां पहले ही विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी को पाटने के लिए इन-सर्विस एमबीबीएस डॉक्टरों को अल्ट्रासाउंड की ट्रेनिंग देने की नीति को मंजूरी दी जा चुकी है।

योजना की मुख्य बातें और नियम

इस कदम की जरूरत क्यों पड़ी?

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