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16 मई है बहुत महत्वपूर्ण, शनि देव जंयती, प्रकाश दिवस, जाने और कौन-कौन से है डे

विशेष। 16 मई की डेट धार्मिक, सामाजिक, वैज्ञानिक और स्वास्थ की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण मानी जा सकती है, क्योकि यह दिन सभी तरह से कुछ-न-कुछ यादगार बना रहा है, क्योकि आज मुख्य रूप से अंतर्राष्ट्रीय प्रकाश दिवस और भारत में राष्ट्रीय डेंगू दिवस मनाया जाता है। इसके अलावा, 16 मई 2026 को शनि जयंती भी मनाई जा रही है, क्योंकि इस दिन अमावस्या तिथि है। यहां जाने और भी बहुत कुछ….

अंतर्राष्ट्रीय प्रकाश दिवस

1960 में थियोडोर मैमन द्वारा पहले सफल लेज़र ऑपरेशन की याद में विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में प्रकाश के महत्व को रेखांकित करने के लिए मनाया जाता है। अंतर्राष्ट्रीय प्रकाश दिवस, जो 16 मई 1960 को भौतिक विज्ञानी थियोडोर मैमन द्वारा ह्यूजेस रिसर्च लेबोरेटरीज में दुनिया के पहले सफल लेज़र ऑपरेशन की याद दिलाता है। यह दिवस विज्ञान, संस्कृति, कला, शिक्षा और सतत विकास में प्रकाश-आधारित तकनीकों (जैसे चिकित्सा, संचार, इंटरनेट) के महत्व को रेखांकित करता है। 1960 में, मैमन ने एक सिंथेटिक रूबी क्रिस्टल का उपयोग करके पहला कार्यशील लेज़र विकसित किया था। इस दिवस को यूनेस्को द्वारा घोषित किया गया है, जो प्रकाश विज्ञान और इसकी परिवर्तनकारी क्षमता के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए मनाया जाता है।

राष्ट्रीय डेंगू दिवस

डेंगू के बारे में जागरूकता बढ़ाने और इसके मच्छरों को पनपने से रोकने (साफ-सफाई) के लिए मनाया जाता है। भारत में हर साल 16 मई को राष्ट्रीय डेंगू दिवस मनाया जाता है, जिसे स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा डेंगू बुखार के प्रति जागरूकता बढ़ाने और मानसून से पहले बचाव के उपाय (विशेषकर एडीज मच्छरों के प्रजनन को रोकने) के लिए मनाया जाता है। 2026 में इसका मुख्य जोर एकजुट हों।

सिक्किम स्थापना दिवस

16 मई 1975 को सिक्किम भारत का 22वां राज्य बना था। राष्ट्रपति ने 15 मई को इस संशोधन की पुष्टि की और सिक्किम को अंततः 16 मई 1975 को भारत संघ में देश के 22 वें राज्य के रूप में शामिल किया गया। दोरजी को सिक्किम का मुख्यमंत्री बनाया गया और राजशाही समाप्त कर दी गई।

शनि देव जयंती

2026 में, इस दिन शनि जयंती भी पड़ रही है, जो शनिदेव की पूजा के लिए विशेष मानी जाती है। जो शनिदेव का जन्मोत्सव है। इसके साथ ही, इस दिन अमावस्या का विशेष संयोग भी है। इस दिन देशभर में शनि मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना की जाती है और शनिदेव की कृपा पाने के लिए व्रत व उपाय किए जाते हैं।

सोलह श्रृंगार कर महिलाओं ने की वट वृक्ष की पूजा

अखंड सौभाग्य और पति की लंबी उम्र की कामना का महापर्व वट सावित्री व्रत बेहद हर्षाेल्लास और श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है। वट वृक्ष (बरगद के पेड़) के नीचे सुहागिन महिलाओं का हुजूम उमड़ पड़ा। सोलह श्रृंगार कर, हाथों में पूजा की थाली थामे माताएं-बहनें पूजा अर्चना के लिए पहुंचीं।

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