मौनी अमावस्याः आखिर क्यों है इतना महत्वंपूर्ण, प्रयाग के संगम में लाखों भक्त लगा रहे डुबकी

मौनी अमावस्या। सनातन धर्म में प्रत्येक तिथि का अपना आध्यात्मिक महत्व है, परंतु अमावस्या को विशेष रूप से स्नान, दान, तर्पण और पितृ शांति के लिए अत्यंत फलदायी माना गया है। इन्हीं अमावस्या तिथियों में मौनी अमावस्या को अन्य अमावस्या तिथियों की तरह ही पुण्यदायी अमावस्या कहा गया है। माघ मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को मनाई जाने वाली यह तिथि आत्मशुद्धि, मौन साधना और पितरों के कल्याण का अनुपम अवसर प्रदान करती है। मौनी अमावस्या को माघी अमावस्या भी कहा जाता है। इस दिन मौन रहकर किए गए जप-तप और सेवा कार्य साधक को विशेष पुण्य प्रदान करते हैं। शास्त्रों में वर्णन मिलता है कि इस दिन किया गया स्नान और दान मनुष्य को सांसारिक बंधनों से मुक्त कर मोक्ष के मार्ग की ओर अग्रसर करता है।

धुल जाते है पाप, मां गंगा की होती है कृपा

सनातन धर्म में मौनी अमावस्या के दिन गंगा स्नान करने की परंपरा है। इस शुभ अवसर पर भक्त गंगा तट पर स्नान करते हैं, ध्यान करते हैं और भगवान शिव की पूजा करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि मौनी अमावस्या के दिन गंगा में स्नान करने से जाने-अनजाने में किए गये पाप धुल जाते हैं। मां गंगा की कृपा भी भक्तों पर बरसती है।

पितरों को समर्पित

हिंदू शास्त्रों के अनुसार अमावस्या तिथि पितरों को समर्पित होती है। माघ महीने की अमावस्या को विशेष रूप से शुभ माना गया है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान, दान और पितरों के लिए किए गए कर्मकांड से उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है। साथ ही ध्यान, जप और तप से आत्मिक शक्ति और मानसिक शांति मिलती है।

अर्ध्य और दान का है महत्वं

मौनी अमावस्या के दिन पवित्र नदियों में स्नान करना, सूर्य देव को अर्घ्य देना और दान करना बहुत शुभ माना जाता है. गंगा, नर्मदा सहित अन्य पवित्र जल में स्नान करने से पुण्य कई गुना बढ़ जाता है. इस दिन जरूरतमंदों को भोजन कराना, कपड़े, कंबल, तेल, दूध, अनाज या अपनी क्षमता के अनुसार धन का दान करना फलदायी होता है। यह भी माना जाता है कि जब श्रद्धालु मौनी अमावस्या पर उपवास रखते हैं और इसे कुंभ मेले में अमृत स्नान के साथ जोड़ते हैं, तो वे जीवन और मृत्यु के चक्र से मुक्ति प्राप्त करने की दिशा में एक कदम आगे बढ़ते हैं और अंततः मोक्ष प्राप्त करते हैं।

मनु से जुड़ा है माघ अमावस्या

यद्यपि ब्रह्मा जी और मनु के लिए एक दिन मनुष्य के समय से कहीं अधिक लंबा है, फिर भी उस तपस्या का फल आध्यात्मिक ज्ञान की प्राप्ति थी। क्योंकि मनु ने माघ अमावस्या को मौन धारण किया था, इसलिए इस दिन को मौनी अमावस्या के रूप में जाना जाने लगा, जो इस बात का स्मरण दिलाता है कि मौन, अनुशासन और भक्ति से ही सच्चे आध्यात्मिक ज्ञान की प्राप्ति हो सकती है।

मौनी अमावस्या का शुभ मुहूर्त

वर्ष 2026 में मौनी अमावस्या 18 जनवरी को मनाई जा रही है। अमावस्या तिथि का शुभारंभ 18 जनवरी की रात 12 बजकर 03 मिनट से होगा और इसका समापन 19 जनवरी की रात 1 बजकर 21 मिनट पर होगा। उदयातिथि की मान्यता के अनुसार, यह पर्व 18 जनवरी को मनाया जाएगा। मौनी अमावस्या के दिन गंगा, यमुना, नर्मदा, सरयू अथवा किसी भी पवित्र नदी में स्नान करना अत्यंत पुण्यकारी माना गया है। प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर सूर्यदेव को अर्घ्य देने की परंपरा है। स्नान के समय पितरों का स्मरण करते हुए उन्हें जल अर्पित करें। ऐसा करने से पितर प्रसन्न होते हैं, परिवार को आशीर्वाद देते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि का संचार होता है। मान्यता है कि इस दिन तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध करने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है।

गंगा स्नान संभव न हो तो क्या करें?

मौनी अमावस्या पर पवित्र नदियों में स्नान करके करोड़ों श्रद्धालु पुण्य लाभ प्राप्त करते हैं। किसी कारणवश आप गंगा या किसी पवित्र नदी में स्नान करने में असमर्थ हैं, तो निराश होने की आवश्यकता नहीं है। घर पर स्नान के जल में कुछ बूंदें गंगाजल मिलाकर ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करें। इसे भी गंगा स्नान के समान पुण्यकारी माना गया है।

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